भारत ब्रांड: अब देश में यूरिया का सिर्फ एक ब्रांड, कीमत और क्वालिटी दोनों तय

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि से जुड़े क्षेत्र का अहम योगदान है। ऐसे में समय-समय पर कृषि से सम्बंधित व्यापक सुधार की आवश्यकता होती है। इसी क्रम में कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले उर्वरकों की क्वालिटी और किसानों तक इसके समुचित पहुंच को बढ़ाने पर केंद्र सरकार विशेष ध्यान दे रही है। केंद्र सरकार इसके लिए ‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’ नीति लेकर आई है। इस योजना के तहत ने कृषि में बहुतायत प्रयोग में लाए जाने वाले यूरिया को योजनाबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

क्या है ‘वन नेशन, वन फर्टिलाइजर’

वन नेशन वन फर्टिलाइजर योजना के तहत देश के हर कोने में एक नाम, एक ब्रांड और एक समान गुणवत्ता वाले यूरिया की बिक्री होगी। इसके तहत आने वाले ब्रांड का नाम ‘भारत’ रखा गया है। इससे किसानों को हर किस्म के भ्रम से मुक्ति मिलेगी और बेहतर खाद भी उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके तहत अब सभी प्रकार के उर्वरक चाहे वह डीएपी, एनपीके या यूरिया हो, को देश भर में उर्वरक ब्रांडों को मानकीकृत करने के लिए एक ब्रांड नाम ‘भारत’ के तहत बेचा जाएगा भले ही उन्हें कोई भी कंपनी बनाती हो। कंपनियों को एकल ब्रांड नाम ‘भारत’ के तहत उर्वरकों के विपणन में मदद करने के लिए पीएम मोदी ने भारत यूरिया बैग भी लॉन्च किया है।

‘भारत ब्रांड’ यूरिया

पीएम मोदी ने 12 नवंबर को रामागुंडम (तेलंगाना) संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करते हुए बताया कि उर्वरकों के अनेक ब्रांडों के अस्तित्व में आने के कारण किसानों को पहले होने वाली समस्याओं के मद्देनजर भविष्य में यूरिया को ‘भारत यूरिया’ नामक एकल ब्रांड के तहत उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि इसकी गुणवत्ता और कीमत पहले से ही निर्धारित है। इन सभी प्रयासों से पता चलता है कि हम किसानों, विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए व्यवस्था में सुधार कर रहे हैं। सरकार पहले ही नीम कोटेड यूरिया बनाने का फैसला ले चुकी है।

क्या होता है नीम कोटेड यूरिया

नीम कोटेड यूरिया न सिर्फ खेती की लागत घटाता है, बल्कि इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। नीम कोटेड यूरिया बनाने के लिए यूरिया के ऊपर नीम के तेल का लेप कर दिया जाता है। ये लेप नाइट्रीफिकेशन अवरोधी के रूप में काम करता है। नीम लेपित यूरिया धीमी गति से प्रसारित होता है जिसके कारण फसलों की आवश्यकता के अनुरूप नाइट्रोजन पोषक तत्व की उपलब्धता होती है और फसल उत्पादन में भी वृद्धि होती है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, नीम कोटेड यूरिया सामान्य यूरिया के अनुपात में 5 से 10 प्रतिशत तक कम लगती है, जिससे किसान की लागत घटती है। 2014 के बाद केंद्र सरकार ने सबसे पहले यूरिया की 100% नीम कोटिंग सुनिश्चित करना और कालाबाजारी रोकना जैसे अहम फैसलों पर काम किया, जिससे किसानों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

यूरिया सेक्टर में आएगी आत्मनिर्भरता

भारत सरकार यूरिया की 5 बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा चलाने योग्य बना रही है। यह काम रामागुंडम (तेलंगाना), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), सिंद्री (झारखंड), तलचर (ओडिशा) और बरौनी (बिहार) में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले अमोनिया यूरिया संयंत्र लगाकर पूरा किया जायेगा। इन संयत्रों को यूरिया में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने की दिशा में फिर से शुरू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर संयंत्र ने उत्पादन शुरू कर दिया है और रामागुंडम संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया गया है। जब ये पांच संयंत्र पूरी तरह से काम करने लगेंगे, तो देश को 60 लाख टन यूरिया मिलेगा, जिससे आयात पर भारी बचत होगी और यूरिया की उपलब्धता आसान होगी।

 


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