सतत विकास के लिए ‘LIFE मूवमेंट’ सबसे बेहतर साधन

भारत की अध्यक्षता में G20 से संबधित बैठकें पूरे देश में हो रही हैं। इसमें G20 के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों सहित तमाम विषयों से संबंधित दुनियाभर के एक्सपर्ट्स जुट रहे हैं।

हाल ही में 27 से 29 मार्च को गुजरात के गांधीनगर में सम्पन्न हुई तीन दिवसीय पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह (ECSWG) की बैठक में भूमि क्षरण को रोकने, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में तेजी लाने और जैव विविधता को समृद्ध करने सहित संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के साथ ही एक स्थायी और जलवायु अनुकूल ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

इस बैठक का सार साधन मुख्य रूप से लाइफ पहल यानि पर्यावरण के लिये जीवनशैली के आस – पास घूमता है, जिसके माध्यम से उन सभी लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है जिन्हें इस बैठक में निर्धारित किया गया है।

लाइफ मूवमेंट क्या है?

लाइफ का विचार भारत द्वारा वर्ष 2021 में ग्लासगो में 26वें संयुक्त्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) के दौरान पेश किया गया था।

यह विचार पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली को बढ़ावा देता है जो ‘भले-बुरे के ज्ञान और व्यर्थ खपत’ के बजाय ‘सावधानी के साथ और सही सोच के साथ उपयोग’ पर केंद्रित है।

यह मिशन प्रकृति के साथ सही सामंजस्य बनाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर जोर देता है। ध्यान हो कि चक्रीय अर्थव्यवस्था ऐसी अर्थव्यवस्था है जहाँ उत्पादों को स्थायित्व, पुन:उपयोग और पुनर्चक्रण के रूप में देखा जाता है और इस प्रकार लगभग हर चीज का पुन:उपयोग, पुनर्निर्माण एवं कच्चे माल के रूप में पुनर्चक्रण किया जाता है या फिर ऊर्जा स्रोत के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।

इसमें 6 R की अवधारणा शामिल है—Reduce (सामग्री के उपयोग को कम करना), Reuse (पुनःउपयोग), Recycle (पुनर्चक्रण), Refurbishment (पुनर्निर्माण), Recover (पुनरुद्धार) और Repairing (मरम्मत)।

LiFE ने जलवायु के आसपास के सामाजिक मानदंडों को प्रभावित करने के लिए सामाजिक नेटवर्क की ताकत का लाभ उठाने की योजना बनाई है।

इस मिशन की योजना ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ (P3) नामक व्यक्तियों का एक वैश्विक नेटवर्क बनाने और पोषित करने की है, जिनकी पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को अपनाने और बढ़ावा देने के लिए साझा प्रतिबद्धता होगी।

P3 समुदाय के माध्यम से, मिशन एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास करता है जो पर्यावरण के अनुकूल व्यवहारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुदृढ़ और सक्षम करेगा।

वर्तमान वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएं

दुनिया का लगभग प्रत्येक देश आज जलवायु संकट से जूझ रहा है। वर्तमान दुनिया अब धीरे-धीरे पर्यावरणीय खतरों की चपेट में आने लगी है। चरम मौसमी घटनाओं ने इसका संकेत देना शुरू कर दिया है।

पिछले 100 वर्षों में अंटार्कटिका के तापमान में दोगुनी वृद्धि हुई है। इसके कारण अंटार्कटिका के बर्फीले क्षेत्रफल में भी कमी आई है। ऐसा अनुमान किया गया है कि इस सदी के अन्त तक एल्प्स पर्वत शृंखला के लगभग 80 प्रतिशत हिमनद (ग्लेशियर) पिघल जाएँगे।

शोध के मुताबिक धरती के तापमान में वद्धि के कारण हिमनद और ध्रुवीय प्रदेशों की बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ गई है जिसके परिणामस्वरूप महासागरों का जल स्तर औसतन 27 सेंटीमीटर ऊपर उठ चुका है।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस शताब्दी के अन्त तक भारत में औसत तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी। वहीं बीसवीं सदी में विश्व की सतह का औसतन तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है।

लाइफ कैसे महत्वपूर्ण ?

लाइफ पहल का उपयोग सभवतः अभी के परिदृश्य में सबसे अधिक सरल,सुलभ और लाभदायक साबित होगा।

लाइफ का दृष्टिकोण मुख्य रूप से तीन मुख्य सिद्धांतों पर कार्य करता है।

1: व्यक्तियों और समुदायों के व्यवहार और दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करके जीवन को एक जन आंदोलन बनाना

2: शीर्ष विश्वविद्यालयों, थिंक टैंक और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमागों से स्केलेबल विचार को एक साथ मिला कर इस पर विचार-विमर्श करना

3: अभियान चलाने के लिए दुनिया भर में विभिन्न संस्कृतियों के जलवायु-अनुकूल सामाजिक मानदंडों, विश्वासों और दैनिक घरेलू प्रथाओं का लाभ उठाना

उपभोग के सामाजिक, पर्यावरणीय एवं आर्थिक प्रभावों पर विचार करने, हरित उत्पादों की खरीद, बेहतर उपभोग – कम बर्बादी (consuming better – wasting less) और एक अधिक संवहनीय उपभोग पर विचार करने और इसके साथ ही, वर्तमान ‘टेक-मेक-यूज़-डिस्पोजल’ अर्थव्यवस्था (‘take-make-use-dispose’ economy) से एक चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) की ओर संक्रमण शुरू करने के लिए लाइफ एक बेहतर विकल्प है।

लाइफ के लिए भारत की अध्यक्षता में G20 महत्वपूर्ण मंच

मुश्किल चुनौतियों के लिए बेशक जादुई समाधान नहीं है, फिर भी वैश्विक उथल-पुथल के समय में आक्रामक सैन्य व्यवहारों को रोकने, सैन्य खर्च सीमित करने और हरित बदलाव में निवेश को प्रेरित करने के लिए हमें सक्रिय रूप से समाधानों की तलाश करनी होगी।

सफल आर्थिक समन्वय की नीतियों के अपने ट्रैक रिकॉर्ड के साथ G20 इन चुनौतियों का हल तलाशने में एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। ऐसा नहीं होने पर इस बात का जोखिम है कि हम बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों के कारण जलवायु को लेकर प्रतिक्रिया देने में एक और दशक गंवा दें।

हालांकि भारत की अध्यक्षता में यह संभव है की इस ओर एक बेहतर प्रगति हो क्योंकि भारत वैश्विक औसत 4 टन की तुलना में यहाँ प्रतिव्यक्ति का औसत कार्बन फुटप्रिंट प्रति वर्ष 0.56 टन है।

भारत का पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक मानदंड और दैनिक घरेलू प्रथाएं इसे बड़े पैमाने पर आंदोलन (जन आंदोलन), एलआईएफई के रूप में व्यक्तिगत व्यवहारों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के आख्यान का नेतृत्व करने के लिए मजबूती से रखती हैं।

भारत की अध्यक्षता में लाइफ मूवमेंट आने वाले समय में पर्यावरण संबंधी उन सभी मुद्दों के निराकरण के लिए बेहतर साधन होगा जो वर्तमान में जलवायु परिवर्तन जैसे चुनौतियों के रूप में दुनिया के सामने खड़ी है। वहीं अपनी G20 की अध्यक्षता में भारत के पास लाइफ के माध्यम से पर्यावरणीय मुद्दों पर दुनिया का मार्गदर्शन करने का मौका है तो दुनिया के पास वैश्विक जलवायु संकट से लड़ने के लिए भारत के साथ मिलकर एक नई पर्यावरण संरक्षित व्यवस्था बनाने का एक सुनहरा मौका।

 


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