2023 में भारत में होने वाले SCO सम्मेलन की वेबसाईट जारी

भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वर्ष 2023 के लिए आधिकारी वेबसाईट लॉन्च कर दी है। भारत वर्ष 2023 में एससीओ संगठन के अध्यक्ष के रूप में अगले एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है।

इस साइट पर अगले साल होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गई हैं। साइट को खोलते ही अगले वर्ष के लिए एससीओ के बैठक स्थल वाराणसी के विषय में वीडियो जानकारियाँ प्रदान की गई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्विटर पर कहा कि एक सुरक्षित एससीओ के लिए। राष्ट्राध्यक्षों की एससीओ परिषद की भारत की अध्यक्षता हेतु आधिकारिक वेबसाइट अब https://indiainsco.in पर लाइव है। उन्होंने एससीओ अध्यक्ष के रूप में भारत के बारे में नवीनतम जानकारी, घटनाओं के कैलेंडर और अन्य अपडेट के लिए वेबसाइट पर जाने संबंधी जानकारियाँ प्रदान की। 

वर्ष 2023 में शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता करेगा भारत

इस वर्ष भारत को उज्बेकिस्तान के समरकंद में एससीओ की अध्यक्षता प्राप्त हुई थी। भारत सितंबर 2023 तक एक वर्ष के लिए समूह की अध्यक्षता करेगा जिसमें एससीओ सदस्य देशों के नेता शामिल होगें। ये 23वां एससीओ सम्मेलन होगा, इस से पहले 22वे एससीओ सम्मेलन की अध्यक्षता उज्बेकिस्तान ने वर्ष 2022 में की थी।

वाराणसी को वर्ष 2022-2023 के लिए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की पहली पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी नामित किया गया है। यह निर्णय समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्राध्यक्षों की 22वीं बैठक में लिया गया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार इससे भारत और एससीओ सदस्य देशों के बीच पर्यटन, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय एससीओ के सदस्य देशों, विशेष रूप से मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ भारत के प्राचीन संबंधों को भी दर्शाता है।

इस प्रमुख सांस्कृतिक आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत 2022-23 के दौरान वाराणसी में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और इसमें एससीओ सदस्य देशों के मेहमानों को आमंत्रित किया जाएगा। इन आयोजनों में विद्वान, लेखक, संगीतकार और कलाकार, फोटो पत्रकार, यात्रा ब्लॉगर और अन्य अतिथि आमंत्रित होंगे। एससीओ सदस्य देशों के बीच संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एससीओ पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी नामित किए जाने संबंधी नियमों को 2021 में दुशांबे एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाया गया था।

एससीओ क्या है ?

शंघाई सहयोग संगठन जिसे संक्षेप में एससीओ कहा जाता है एक आठ सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के नेताओं द्वारा चीन के शंघाई में की गई थी। उज्बेकिस्तान को छोड़कर ये देश, शंघाई फाइव ग्रुप के सदस्य हुआ करते थे, जिसका गठन 26 अप्रैल 1996 को सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य ट्रस्ट को गहरा करने की संधि पर हस्ताक्षर के साथ किया गया था।

2001 में, शंघाई में वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान ही पांच सदस्य देशों ने पहली बार उज्बेकिस्तान को शंघाई फाइव मैकेनिज्म में शामिल किया जिसके बाद यह शंघाई सिक्स में बदल गया। इसके बाद, 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए और जून 2002 में एससीओ सदस्य देशों के प्रमुखों ने एससीओ चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जो संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, संरचनाओं और संचालन के रूपों पर व्याख्या करने के साथ ही इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है।

जुलाई 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन हुआ जिसमें भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था। जुलाई 2015 में रूस के ऊफा में, SCO ने भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया। जिसके बाद भारत ने जून 2016 में ताशकंद, उज्बेकिस्तान में दायित्व ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे पूर्ण सदस्य के रूप में एससीओ में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। 9 जून 2017 को, अस्ताना में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के दौरान भारत आधिकारिक तौर पर पूर्ण सदस्य के रूप में SCO में शामिल हो गया।

भारत और एससीओ

भारत के एससीओ क्षेत्र के साथ सदियों पुरानी सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध हैं। बौद्ध भिक्षुओं से लेकर मसाला व्यापारियों तक, साहसिक खोजकर्ताओं से लेकर सूफी संतों तक, भारत और एससीओ सदस्य राज्यों के बीच बातचीत से वस्तुओं का आदान-प्रदान, विचारों का संलयन, नए व्यंजनों और कला-रूपों का परिचय हुआ है। इसलिए 2017 में एससीओ की भारत की सदस्यता इस क्षेत्र के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को गहरा करने के लिए भारत की उत्सुकता की पुष्टि थी।

भारत ने 2017 में एक पूर्ण सदस्य राज्य बनने के बाद से संगठन के साथ सक्रिय जुड़ाव बनाए रखा है। 2020 में, भारत ने पहली बार एससीओ काउंसिल ऑफ गवर्नमेंट की दूसरी सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था की बैठक की मेजबानी की। भारत ने एससीओ में सहयोग के तीन नए स्तंभों - स्टार्टअप्स एंड इनोवेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी और ट्रेडिशनल मेडिसिन पर जोर देकर अपने लिए एक जगह बनाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में SECURE की अवधारणा पेश की थी। SECURE अवधारणा की व्याख्या करते हुए, प्रधानमंत्री ने नागरिकों के लिए सुरक्षा के लिए 'S', आर्थिक विकास के लिए 'E', क्षेत्र में कनेक्टिविटी के लिए,C, एकता के लिए ‘U', संप्रभुता और अखंडता के लिये 'R', और पर्यावरण संरक्षण के लिए 'E' के रूप में पेश किया था।

भारत ने 2019 में एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों के बिश्केक शिखर सम्मेलन में की गई पीएम मोदी की घोषणाओं को लागू किया, जिसका उद्देश्य भारत की सहस्राब्दी पुरानी साझा सभ्यता की विरासत पर अधिक ध्यान केंद्रित करना था। इनमें शामिल हैं: राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा साझा बौद्ध विरासत पर पहली बार एससीओ डिजिटल प्रदर्शनी की मेजबानी, और भारतीय क्षेत्रीय साहित्य के 10 लेखों का रूसी और चीनी भाषाओं में अनुवाद।

भारत ने पहली बार एससीओ यंग साइंटिस्ट कॉन्क्लेव, एससीओ इकोनॉमिक थिंक टैंक का पहला कंसोर्टियम और पहला एससीओ स्टार्टअप फोरम (वर्चुअल-फॉर्मेट में) आयोजित किया। बी2बी प्रारूप में, फिक्की ने एससीओ बिजनेस काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यायों के माध्यम से एससीओ क्षेत्र के एमएसएमई के बीच सहयोग पर विशेष जोर देने के साथ एससीओ बिजनेस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। 2022 में सरकार के प्रमुखों की एससीओ परिषद की अध्यक्षता के सफल समापन के साथ, भारत सभी लोगों को एससीओ गतिविधियों के केंद्र में रखकर और इस क्षेत्र में अधिक शांति और समृद्धि को बढ़ावा देकर एससीओ के भीतर अधिक व्यापार,आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद करता है। एससीओ के साथ भारत के जुड़ाव का एक नया अध्याय तब शुरू हुआ जब 2022 में भारत ने उज्बेकिस्तान के बाद संगठन की अध्यक्षता ग्रहण की। तब से लेकर वर्तमान तक भारत शंघाई सहयोग संगठन का सक्रिय सदस्य है।

 


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