कैसे हो बिहार का विकास एवं पैदा हो रोजगार के अवसर? क्या करना चाहिए नीतीश कुमार की नई सरकार को?

विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद नीतीश कुमार दो-दो उपमुख्यमंत्रियों तारकेश्वर प्रसाद एवं रेनू देवी के साथ एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं| विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव भी संपन्न हो गया है और भारतीय जनता पार्टी के विधायक विजय कुमार सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष चुन लिए गए हैं| यह पहला मौका है जब भाजपा का कोई विधायक विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है| चुनाव के बाद सरकार एवं नवनिर्वाचित विधानसभा के गठन की सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब प्रश्न है कि बिहार का विकास कैसे हो और कैसे बिहार में रोजगार के अवसर पैदा हो| बिहार की जनता की बदलाव के संदेश को सुनते हुए आखिर नीतीश कुमार को अपनी रणनीति में क्या परिवर्तन करनी चाहिए| आइए जानते हैं|

देखिये कैसे पैदा हो बिहार में रोजगार के अवसर?

आज बिहार की सबसे बड़ी समस्या है रोजगार का सृजन| रोजगार सृजन एवं विकास कार्यों के लिए पैसा चाहिए और बिहार सरकार के पास पैसा है नहीं| तो बात बनेगी कैसे? और बिहार सरकार के पास भी पैसा तभी आएगा जब जनता के क्रय शक्ति बढ़ेगी? क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए जनता की आय बढ़ानी होगी, उसे रोजगार देना होगा|

शराबबंदी के फैसले को बदलना होगा

इन परिस्थितियों में बिहार के विकास की पहली शर्त है की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी सरकार के शराबबंदी के फैसले को बदलना होगा| नीतीश कुमार को चाहिए कि वह अपने इस फैसले को इगो पर ना लें| एक अच्छे उद्देश्य से लिया गया निर्णय अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त करने में असफल रहा है| इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा|

शराबबंदी का मूल उद्देश्य था कि लोग शराब ना पिए| सरकार ने शराबबंदी तो कर दी लेकिन शराब बंद नहीं हुआ| आज बिहार के प्रत्येक गांव में शराब उपलब्ध है| पहले ठेका पर जाना पड़ता था, अब घर पर ही होम डिलीवरी हो रही है| पुरे प्रदेश में शराब माफिया एवं तस्कर सक्रिय हैं| सरकार को राजस्व का जो नुकसान हो रहा है वह सीधे इनकी जेब में जा रहा है|

हर गांव में कुछ नौजवान लड़के आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में गलत रास्ते पर चल पड़े हैं और शराब की तस्करी करने लगे हैं| इससे पहले की एक युवा शक्ति बर्बाद हो अपराधियों की एक नई पीढ़ी में बदल जाए इसे रोकना होगा|

शराबबंदी को लागू करने के लिए बिहार सरकार ने पुलिस को लगा दिया| पुलिस के लिए शराबबंदी कमाई का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है| पूरे प्रदेश में पुलिस - शराब माफिया नेक्सस सक्रिय है| पुलिस का ध्यान कानून व्यवस्था से हटकर शराब माफियाओं एवं तस्करों से हफ्ता वसूली पर ज्यादा है| जिसके कारण बिहार में अपराध बढ़े हैं और कानून व्यवस्था खराब हुआ है|

इसलिए जरूरी है कि बिहार में शराबबंदी के निर्णय को बदला जाए और शराब को कानूनी रूप से बेचने की अनुमति दी जाए| इससे प्रदेश में शराब की तस्करी बंद होगी| शराब माफिया एवं तस्करों से प्रदेश को छुटकारा मिलेगा| अपराधियों की एक नई पीढ़ी बनने से रोका जा सकेगा| जब पुलिस का ध्यान शराब तस्करों से हफ्ता वसूली से हटेगा तो वह अपराध नियंत्रण के अपने मूल कार्य पर ध्यान दे पाएगी| बिहार की कानून व्यवस्था में सुधार होगा| लोगो के अन्दर सुरक्षा की भावना आएगी आत्मविश्वास बढेगा|

सबसे बड़ी बात हजारों करोड़ रुपया जो तस्करों एवं माफियाओं की जेब में जा रहा है, वह राजस्व के रूप में बिहार सरकार के खजाने में जमा होगा| इन हजारो करोड़ के राजस्व का उपयोग बिहार सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास योजनाओं के लिए खर्च कर सकेगी| जिससे रोजगार का सृजन भी होगा और बिहार का विकास भी|

बड़े उद्योग की जगह दिया जाए MSME को बढ़ावा

बिहार में बड़े स्तर पर MSME यानि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को बढ़ावा देने की जरुरत है| बड़े उद्योग से ही रोजगार पैदा हो सकते है इस सोच से बाहर निकलना होगा| सरकार अगर ईमानदारी से फैसिलिटेटर का काम करे तो पुरे बिहार में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण एवं सेवा क्षेत्र में MSME का जाल बिछ सकता है|

बिहार में रोजगार सृजन एवं विकास का आधार कृषि एवं सेवा क्षेत्र ही बन सकता है|

कृषि एवं संबंधित उद्योग

कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान देकर प्रदेश में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा किया जा सकता है| खाद्य प्रसंस्करण की इकाई पूरे प्रदेश में स्थापित की जा सकती है| उदाहरण के लिए हाजीपुर में केला से जुड़े हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना की जा सकती है| उसी तरह से मुजफ्फरपुर में लीची एवं मिथिलांचल में मखाना से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं| इससे किसानो की भी आय बढ़ेगी और इन खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे|

दुग्ध उत्पादन

दुग्ध उत्पादन बिहार के ग्रामीण विकास की धुरी बन सकता है| सुधा डेयरी बिहार ही नहीं देश की एक सफल डेहरी है और इसका एक ब्रांड वैल्यू भी है| इसमें क्षमता है कि वह बिहार का अमूल बन जाए| अगर अमूल गुजरात के ग्रामीण आय की धुरी बन सकता है तो सुधा डेहरी बिहार का क्यों नहीं?

सुधा डेयरी के और प्लांट लगाए जा सकते हैं| हर गांव में दूध संग्रह केंद्र खोले जाएं और जहां पशुपालक एवं किसान आकर अपना दूध बेच सकें| इससे ग्रामीण आए में भारी वृद्धि होगी और उनका क्रय शक्ति बढेगा|

मछली एवं मुर्गी पालन

बिहार की भौगोलिक स्थिति में मछली पालन उद्योग को आसानी से बढ़ावा दिया जा सकता है| मछली एवं मुर्गी पालन के जरिए बड़े स्तर पर रोजगार को पैदा किया जा सकता है| सरकार को इसके लिए बाजार एवं ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा उपलब्ध करानी होगी|

पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र

पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र के माध्यम से बिहार में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा किए जा सकते हैं|

बिहार में पहले से ही बोधगया जैसा पर्यटन स्थल है जिसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान है| जहाँ हवाई अड्डा की भी सुविधा उपलब्ध है| इसी तरह गया में होने वाला पितृपक्ष मेला हिन्दुओ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| राजगीर को भी एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है|

कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है जिसका फायदा उठाते हुए चंपारण में स्थित टाइगर रिजर्व को एक अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है|

पर्यटकों के अंदर सुरक्षा एवं विश्वास बढ़ाने के लिए बिहार सरकार को टूरिस्ट पुलिस का गठन करने पर भी विचार करना चाहिए|

इन पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में छोटे-बड़े होटल खोलने की अनुमति एवं बढ़ावा दी जानी चाहिए| इससे बड़े स्तर पर होटल उद्योग की स्थापना होगी| जब होटल खुलेंगे तो उस में काम करने वाले लोग भी चाहिए होंगे, पर्यटक आयेंगे तो गाइड भी चाहिए होंगे यानी रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे| जब पर्यटक आएंगे तो उन्हें लाने ले जाने के लिए एक ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री भी खड़ा हो जाएगी| पर्यटक खरीदारी भी करेंगे और खाना भी खाएंगे, इससे बाजार एवं रेस्टोरेंट क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा|

लोगों को जब रोजगार मिलेगा एवं उनकी आय बढ़ेगी तो उनकी क्रय क्षमता भी बढ़ेगी| लोगो की जैसे – जैसे आय बढ़ेगी वह उसी अनुपात में खर्च भी करेंगे|

यानि जब बाजार में खपत (विक्री) बढ़ेगी तो राज्य सरकार का जीएसटी संग्रह भी बढ़ेगा| अर्थात बिहार सरकार के पास विकास एवं जन कल्याण पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा होगा| जब सरकार ज्यादा खर्च करेगी तो सुविधाओ का ज्यादा विकास होगा, रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे| यह एक चक्र है जिसको एक बार पूरे मनोयोग एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से चलानी होगी| अगर एक बार यह चक्र चल गया तो फिर इसे चलते ही रहना है|

 


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