हाथरस में विपक्षी दलों के नेताओं और मीडिया को आखिर क्यों रोका गया? वे लोग तो अपना काम ही कर रहे थे, उन्हें करने दिया जाना चाहिए था। प्रशासन को अपना काम करना चाहिए था, जो वह कर नहीं पा रहा था...।
अब भगवान के लिए कम से कम यह तो मत बोलो कि राहुल व प्रियंका गांधी यूपी में क्या करने गए थे, राजस्थान क्यों नहीं गए। राजस्थान क्यों जाएंगे, वहां तो उनकी खुद की सरकार है। लेकिन, इन सत्ताधारियों को क्या हो गया है, वे क्यों नहीं पहुंच जाते राजस्थान..., ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए...!? कौन रोक रहा है, उन्हें!!?? क्या सत्ता की ही राजनीति करनी आती है!!!??? आज का सत्ता पक्ष क्या विपक्ष की राजनीति करना भूल गया!!!!????
जो लोग यह कह रहे हैं कि हाथरस कांड पर विपक्ष राजनीति कर रहा है तो वे 'सही' ही कह रहे हैं लेकिन यह बताया जाए कि यदि राजनेता राजनीति न करें तो और क्या करें?
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और डेरेक ओ ब्रायन बिल्कुल ‘सही’ कर रहे थे। अपना ‘काम’ कर रहे थे। यदि वे वहां नहीं जाते तो सब यही कहते कि विपक्ष के नेता एसी में बैठे रहते हैं, जमीन पर उतरते ही नहीं, और इसी वजह से जनता से दूर हैं। उनको एक ‘मौका’ दिया गया अपनी जमीन पर मौजूदगी साबित करने के लिए। अब जब पुलिस ने उन्हें इलाके में घुसने नहीं दिया तो बेहतर होता कि वे गांधी जयंती पर गांधी परंपरा का पालन करते हुए, वहीं चादर बिछाकर धरना देते जब तक कि प्रशासन उन्हें अंदर न जाने दे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ...।
इस मामले में मीडिया अपनी भूमिका किस तरह निभा पाया, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण में पत्रकारिता का कितना लाभ हुआ, इसका आकलन होना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब वह खुद को इस लोकतंत्र का चौथा खंभा मानता हो।