‘प्रलय’ बैलिस्टिक मिसाइलों की खरीद को मंजूरी, रॉकेट फोर्स बनाने की दिशा में काम कर रहा भारत

भारतीय सेना के लिए रक्षा मंत्रालय ने ‘प्रलय’ बैलिस्टिक मिसाइलों की एक रेजिमेंट की खरीद को मंजूरी दे दी है। इन मिसाइलों की सीमाओं पर तैनाती करने के लिए इसे भारतीय सेना के बड़े निर्णय के रूप में भी देखा जा रहा है।

मिसाइल की ताकत और क्षमता

प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल की ताकत और क्षमता को लेकर बात करें तो यह 150-500 किलोमीटर के बीच लक्ष्य को भेद सकती है। इस मिसाइल की इस खूबी के चलते रक्षा मंत्रालय ने अपनी मारक क्षमता को बढ़ावा देते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LOC) पर तैनाती के लिए इसकी खरीद को मंजूरी दी है।

सेना इन मिसाइलों को पारंपरिक हथियारों के साथ तैनात करके सामरिक भूमिकाओं में उनका उपयोग करेगी। इन मिसाइलों को खरीदने का निर्णय भारतीय वायु सेना के लिए 15 सितम्बर को कम दूरी की हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल ‘ध्रुवास्त्र’ खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के तुरंत बाद लिया गया है।

इस मिसाइल में हवा में एक निश्चित दूरी तय करने के बाद अपना रास्ता बदलने की क्षमता है। ‘प्रलय’ एक ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर और अन्य नई प्रौद्योगिकियों से संचालित है। मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली में अत्याधुनिक नेविगेशन और एकीकृत एवियोनिक्स शामिल हैं।

मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकेगी ‘प्रलय’

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन इन मिसाइल को और विकसित कर रहा है। अगर सेना चाहे तो इसकी मारक सीमा को काफी बढ़ाया जा सकता है। दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने थल सेनाध्यक्ष के रूप में 2015 के आसपास इस मिसाइल प्रणाली के विकास को बढ़ावा दिया था।

इंटरसेप्टर मिसाइलों से करेगी मुकाबला

‘प्रलय’ सतह से सतह पर मार करने वाली एक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। इस उन्नत मिसाइल को इंटरसेप्टर मिसाइलों से मुकाबला करने के लिए विकसित किया गया है। सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल 500-1000 किलोग्राम का भार वहन करने में सक्षम है। इसे मोबाइल लॉन्चर से भी लॉन्च किया जा सकता है।

इस मिसाइल को पहले भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसे भारतीय सेना में भी शामिल किए जाने की संभावना है। इस तरह की मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल लंबी दूरी की दुश्मन वायु रक्षा प्रणालियों और अन्य उच्च-मूल्य वाले मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है। इन मिसाइलों को सशस्त्र बलों में शामिल करने के प्रस्ताव को ऐसे समय में मंजूरी दी गई है, जब रक्षा बल रॉकेट फोर्स बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों को मार गिरा सके।

 


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