भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे राजस्थान के जैसलमेर में चल रहे तीनों सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास ‘दक्षिण शक्ति’ देखने के लिए गुरुवार को पहुंचे। उन्होंने अभ्यास की समीक्षा के दौरान युद्ध की तैयारी और सैनिकों की परिचालन प्रभावशीलता को मान्य किया। इस युद्धाभ्यास में थल सेना के साथ वायुसेना भी शामिल है। गुजरात के कच्छ में भी ऐसा ही युद्धाभ्यास चल रहा है, जिसमें एक साथ तीनों सेनाएं शामिल हो रही हैं। इन युद्धाभ्यासों का समापन शुक्रवार को होगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की संभावना है।
सेना ने रेगिस्तान में अपनी क्षमताओं को परखा
पाकिस्तान की सीमा के नजदीक थार के रेगिस्तान से लेकर कच्छ के रण तक करीब 500 किलोमीटर के दायरे में चल रहे युद्धाभ्यास में सेनाओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। युद्धाभ्यास ‘दक्षिण शक्ति’ में सेना ने रेगिस्तान में अपनी क्षमताओं को परखा। भारतीय सेना और वायुसेना इस युद्धाभ्यास के जरिए बदलते परिवेश में कम से कम समय में जवाबी हमला बोलने और दुश्मन के रणनीतिक स्थानों पर कब्जा करने का भी अभ्यास कर रही हैं। इसी को ध्यान में रखकर एयर स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। युद्धाभ्यास में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर के अलावा ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है।
कच्छ में भी रहा है युद्धाभ्यास
गुजरात के कच्छ में भी ऐसा ही युद्धाभ्यास ‘दक्षिण शक्ति’ चल रहा है, जिसमें एक साथ सेना, नौसेना और वायुसेना शामिल है। इस अभ्यास में कुल 30 हजार जवान हिस्सा ले रहे हैं। भविष्य को ध्यान में रखते हुए तीनों सेनाओं के सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनरल एमएम नरवणे ने आज जैसलमेर में ‘दक्षिण शक्ति’ अभ्यास की समीक्षा की, जिसमें भारतीय सेना के लिए बहु डोमेन युद्धक्षेत्र में युद्ध की भविष्य की अवधारणाओं को दर्शाते हुए विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन, हवाई हमले और झुंड ड्रोन का उपयोग किया गया।
भविष्य के युद्ध के लिए ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप’ बनाए जाने पर जोर
राजस्थान के जैसलमेर और गुजरात के कच्छ में चल रहे इन युद्धाभ्यासों का समापन शुक्रवार को होगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान करीब 400 पैराट्रूपर्स एक साथ पैरा जंप करेंगे। यह पहला मौका है जब पाकिस्तान से सटी सीमा पर नई तकनीक से युद्धाभ्यास किए जा रहा है। भारतीय सेनाओं का मानना है कि भविष्य के युद्ध परमाणु शक्ति से लैस देशों के बीच कम समय में और सीमित स्थान पर लड़े जा सकते हैं। इसलिए भारतीय सेनाएं भी ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप’ यानी आईबीजी बनाए जाने पर जोर दे रही हैं। सभी आईबीजी को मिशन, खतरे और इलाके के हिसाब से गठित किये जाने की तैयारी है।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप में नौसेना, थल सेना और वायुसेना के जांबाज होंगे शामिल
सैन्य सूत्रों के अनुसार आईबीजी की कमान मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी के पास होगी। इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप में नौसेना, थल सेना और वायुसेना के जांबाज जवानों को शामिल किया जायेगा। इस ग्रुप में टैंक, तोप, इंजीनियर्स, लॉजिस्टिक, सपोर्ट यूनिट भी होगी। अब तक ये सब अलग-अलग यूनिट के तौर पर तैनात हैं। यह सभी यूनिट सिर्फ युद्ध के वक्त एक साथ आती हैं, लेकिन अब सबको मिलाकर छोटा और मारक ग्रुप बनाया जा रहा है। इनका आकार किसी भी सैन्य ब्रिगेड से बड़ा और किसी डिवीजन से थोड़ा कम होगा।