5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज, जानिये इन राज्यों की वर्तमान राजनितिक परिदृश्य

चुनाव आयोग द्वारा पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनितिक माहौल गर्माना शुरू हो गया है। इन चार राज्यों व केंद्र शासित पुडुचेरी में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग चरणों में मतदान संपन्न होगा। सभी राज्यों में मतों की गणना एक साथ दो मई को होगी। इस दौरान कुल 824 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा और कुल 18.68 करोड़ मतदाता 2.7 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान कर सकेंगे। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में छह अप्रैल को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक आठ चरणों में जबकि असम में तीन चरणों में मतदान संपन्न होगा।

असम में भाजपा सरकार को कांग्रेस की महागठबंधन की चुनौती

असम में विधानसभा की कुल 126 सीटे हैं। इसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के 60 विधायक हैं जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 26 विधायक हैं। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के सामने भाजपा को दुबारा सत्ता में लाने की चुनौती है। 126 विधानसभा सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए आठ और अनुसूचित जनजाति की 16 सीटें आरक्षित हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत राजग का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने एआईयूडीएफ, भाकपा, माकपा, भाकपा (एमएल)और आंचलिक गण मोर्चा (एजीएम) के साथ एक महागठबंधन बनाया है। असम में 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को मतदान होगा।

तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों अन्नाद्रमुक एवं द्रमुक के बीच सीधा मुकाबला  

तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं तथा चुनाव में द्रविड़ पार्टियों अन्नाद्रमुक एवं द्रमुक के बीच सीधा मुकाबला है। अन्नाद्रमुक पिछले 10 साल से सत्ता में है| 2016 में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक ने 136 सीटें जीती थी। मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के पास 97 सीटें हैं। पिछले कई दशक में यह पहला चुनाव है जब दो बड़े नेता जयललिता एवं करुणानिधि इस दुनिया में नहीं है| तमिलनाडु में 6 अप्रैल को मतदान होगा। राज्य की अन्य पार्टियों में कांग्रेस के पास सात, इंडियन मुस्लिम लीग के पास पांच सीटें हैं।

पश्चिम बंगाल में इसबार भाजपा-टीमएमसी के बीच सीधी टक्कर

सबसे ज्यादा काटें की टक्कर इस पश्चिम बंगाल में दी खायी दे रही है| सत्ता के लिए इसबार भाजपा-टीमएमसी के बीच सीधी टक्कर| पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं, जिनपर आठ चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न होंगे। पहले चरण का मतदान 27 मार्च को पांच जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर होगा। दूसरे चरण का मतदान एक अप्रैल को चार जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर होगा। तीसरे चरण का चुनाव छह अप्रैल को 31 विधानसभा सीटों पर होगा। चौथे चरण का मतदान 10 अप्रैल को 44 विधानसभा सीटों पर होगा। पांचवें चरण का मतदान 17 अप्रैल को 44 विधानसभा सीटों पर होगा। छठे चरण में 22 अप्रैल को 43 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा। सातवें चरण में 26 अप्रैल को 36 विधानसभा सीटों पर और अंतिम व आठवें चरण में 29 अप्रैल को 35 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के पास फिलहाल 209 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 27 विधायक हैं। अन्य विपक्षी दलों में कांग्रेस के पास 23, सीपीआई(एम) के पास 19 सीटें हैं।

केरल में एलडीएफ-यूडीएफ के बीच इतिहास बनाने या दोहराने की चुनौती  

केरल में कुल 141 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 140 पर चुनाव होता है, जबकि एक एंग्लो-इंडियन सदस्य को मनोनीत किया जाता है। केरल में पिनराई विजयन की अगुवाई में लेफ्ट की सरकार है। उनके सामने यह चुनौती है की वह लेफ्ट को दुबारा सत्ता में लाकर इतिहास बना दे, जबकि विपक्ष सत्ता परिवर्तन के साथ इतिहास दोहराने की कोशिश में है| यहां लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के पास कुल 91 विधायक हैं, जबकि यूनाइडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के पास 47 सीटें हैं। इसके अलावा एनडीए के पास यहां एक सीट और केरल जनपक्षम सेक्युलर (केजेएस) के खाते में एक सीट है। केरल में 6 अप्रैल को मतदान होगा। 2016 विधानसभा चुनाव में सीपीआईएम (58), कांग्रेस (22), सीपीआई (19), मुस्लिम लीग (18), केरल कांग्रेस (6) और भाजपा ने एक सीट जीती थी।

पुडुचेरी पर सबकी निगाहें

पुडुचेरी में 30 सीटों पर विधानसभा चुनाव होता है। यहां विधानसभा के तीन सदस्य नामित होते हैं। फिलहाल पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है, क्यूंकि बीते दिनों राज्य में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के चलते सरकार अल्पमत में आ गई थी। साल 2016 के चुनावों में कांग्रेस ने यहाँ बाजी मारी थी।

 


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