चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दाव, 39 जातियां हो सकती हैं ओबीसी में शामिल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक दांव चलने जा रही है. योगी सरकार एक दो नहीं बल्कि 39 जातियों को ओबीसी की सूची (OBC List) में शामिल करने जा रही है जिसका चुनाव पर व्यापक असर होगा.

योगी सरकार पिछले कुछ समय से इस प्रस्ताव पर विचार कर रही थी लेकिन मराठा आरक्षण पर मई 2021 में आए उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद राज्य सरकार के हाथ बंध गए थे. उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद ओबीसी सूची बनाने का राज्यों का अधिकार समाप्त हो गया था. उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा था कि ओबीसी की सूची बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है यानी किसी जाति को ओबीसी सूची में सिर्फ केंद्र सरकार ही शामिल कर सकती है.

लेकिन अभी-अभी समाप्त हुए मानसून सत्र में 127वां संविधान संशोधन विधेयक पास करा करके केंद्र सरकार ने राज्यों को फिर से यह अधिकार दे दिया है कि वह राज्य स्तर पर ओबीसी सूची तैयार कर सकते हैं एवं किसी भी जाति को ओबीसी सूची में शामिल कर सकते हैं.

संसद द्वारा कानून के पास होते ही योगी सरकार एक बार फिर से सक्रिय हो गई है. news18 को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जसवंत सैनी ने बताया कि आयोग बहुत जल्द इस संबंध में राज्य सरकार को अपनी अनुशंसा भेजने वाला है.

ये 39 जातियां हैं

ये 39 जातियां हैं – वैश्य, जैसवार राजपूत, रूहेला, भूटिया, अग्रहरी, दोसर, मुस्लिम शाह, मुस्लिम कायस्थ, हिन्दू कायस्थ, कोरे क्षत्रिय राजपूत, दोहर, अयोध्यावासी वैश्य, बरनवाल, कमालापुरी वैश्य, केसरवानी वैश्य, बगवान, भट्ट, ओमर बनिया, महौर वैश्य, हिन्दू भाट, गोरिया, बोट, पंवरिया, उमरिया, नोवाना, मुस्लिम भाट, विश्नोई, खार राजपूत, पोरवाल, पुरुवार, कुंदर खराड़ी, बिनौधिया वैश्य, होनोराब्ल वैश्य, गुलहरे वैश्य, गढ़ैया, राधेडी एवं पिथ्बज.

जसवंत सैनी का कहना है कि आयोग को 39 जातियों का प्रतिवेदन मिला था जिसमें से 24 जातियों का अध्ययन पूरा हो गया है तथा अगले कुछ दिनों में बाकी 15 का भी सर्वे एवं अध्ययन कार्य पूरा हो जाएगा.

आज कल उत्तर प्रदेश में जाति एवं आरक्षण का मुद्दा पूरी तरह से गरमाया हुआ है. एक तरफ जहाँ बसपा ब्राह्मण सम्मलेन कर रही है तो दूसरी तरफ सपा जातीय जनगणना को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है.

भाजपा भी अपने पत्ते काफी सोच समझकर चल रही है. इसकी पहली झलक केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में दिखी जब जाति एवं क्षेत्र के आधार पर मंत्रियों को शामिल किया गया. उसके बाद केंद्र सरकार ने NEET प्रवेश परीक्षा में ओबीसी आरक्षण लागू करने का आदेश पारित किया.अभी दो दिन पहले ही ओबीसी आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक संसद से पास हुआ है. अब योगी सरकार का यह संभावित निर्णय दिखाता है कि भाजपा ओबीसी पर अपनी पकड़ को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती बल्कि और मजबूत करने की कोशिश में लगी है ताकि विपक्ष की कोई भी चाल कामयाब नहीं हो सके.

 


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