बिहार के थानेदार को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, पर सन्नाटा इतना जैसे कुछ हुआ ही नहीं

बिहार के किशनगंज जिले के किशनगंज टाउन थाना (Kishanganj Town Thana) के थाना अध्यक्ष इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार (Inspector Ashwini Kumar) को किशनगंज की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के पांतापाड़ा (Pantapada) गांव में सैकड़ों की हिंसक भीड़ ने एक अपराधी को बचाने के लिए पिटपीट कर मार डाला। अश्वनी कुमार का अपराध यह था कि वह मोटरसाइकिल लूट के एक आरोपी की तलाश में छापा मारने गए हुए थे।

किशनगंज टाउन थाना क्षेत्र के छगलिया में मुश्फिक आलम की बाइक लूट ली गई थी| मुश्फिक ने अपराधी जाकिर को पहचान लिया था| पुलिस को पता चला कि जाकिर पश्चिम बंगाल (West Bengal) स्थित अपने ससुराल पांतापाड़ा में है| इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस को सूचना देकर थाना अध्यक्ष अश्वनी कुमार और सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार के नेतृत्व में पुलिस पांतापाड़ा गांव पहुंची थी।

पुलिस टीम के पहुंचते ही लाठी-डंडों एवं हथियारों से लैस सैकड़ों की भीड़ ने पुलिस के ऊपर हमला कर दिया और अश्वनी कुमार को पीट पीट कर मार डाला। 

यह घटना कितनी हृदयविदारक है| बेटे की मृत्यु की सदमे से इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार की माँ की भी मृत्यु हो गयी| बाद में माँ - बेटे दोनों का एक साथ ही अंतिम संस्कार किया गया| 

इस संबंध में पश्चिम बंगाल के ग्वालपोखर (Gwalpokhar) थाना क्षेत्र की पुलिस ने फिरोज आलम, अबुजार आलम एवं उनकी मां सहीनूर खातून को गिरफ्तार किया है।

लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है की एक अपराधी को बचाने के लिए सैकड़ों की भीड़ इकट्ठा हो जाती है और एक पुलिस अधिकारी को पीट-पीटकर के मार डालती है इसके बाद भी चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई भी इस मॉबलिंचिंग पर बोलने को तैयार नहीं है। हर छोटी बड़ी घटना को मॉबलिंचिंग बता करके हर समय हाहाकार मचाने वाले इस पूरी घटना पर चुप है| आखिर इसके पीछे क्या कारण है? क्या इसलिए सन्नाटा है की भीड़ मुसलमानों की थी? क्या इसलिए की जहाँ पुलिस छापा मारने गयी थी वह मुसलमानों की बस्ती है?

क्या पुलिस मुस्लिम बस्ती में छापा नहीं मार सकती? क्या इसीलिए मॉबलिंचिंग (Moblinching) की डर से पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए मुस्लिम बस्तियों में घुसने से डरती है की कही उसका भी हाल अश्वनी कुमार जैसा नहीं हो जाये?

कारण जो भी हो किसी तथाकथित सेकुलर या लिबरल लोगो की प्रतिक्रिया का परवाह किये बिना ऐसे मामले में कठोर कार्यवाई कर पुलिस को यह सख्त सन्देश देना होगा की भीड़ किसी भी जाती धर्म का हो अगर वह अपराधी को बचाने आएगी तो उसके साथ सख्ती से पेश आया जायेगा।

अपराधी को पकड़ने के लिए मुस्लिम बस्तियों में घुसने से पुलिस प्रशासन का संकोच एवं डर समाज में अपराध को बढ़ावा देता है। पुलिस को इस तरह के किसी भी संकोच एवं डर के बिना जहाँ भी अपराधी हो बेख़ौफ़ दबिश देनी चाहिए और अगर भीड़ किसी अपराधी को बचाने आती है तो उसके साथ भी कठोरता से निपटना चाहिए ताकि आगे से कोई भी भीड़ इस तरह से किसी अपराधी को बचाने की कोशिश ना करें।

 


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