कुशल राजनेता, प्रखर वक्ता एवं कवि के रूप में जनता के दिलों पर राज करने वाले भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया, बल्कि इसलिए महत्वपूर्ण है कि उस दौरान उनकी सरकार द्वारा देश की रक्षा एवं विकास को लेकर कई बड़े निर्णय हुए जो बहुत ही दूरगामी साबित हुए.
अटल जी का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल कई साहसिक निर्णय लेने के लिए याद किया जाता है. उन निर्णयों ने देश की नीति एवं राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया. आइए नजर डालते है कुछ ऐसे ही साहसिक एवं बडें निर्णयों पर.
भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र घोषित करना भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री के रूप में सबसे बड़े साहसिक निर्णय में से एक है. 1998 में प्रधानमंत्री बनने के 2 महीने के अंदर 11 एवं 13 मई को पोखरण में 5 परमाणु विस्फोट कर, उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित कर दिया. यह सब इतना गोपनीय था कि अमेरिका जैसे देश तक को भनक नहीं लगी. जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इसकी घोषणा की तो पूरा विश्व भौंचका रह गया.
भारत के परमाणु परीक्षण से तिलमिलाए अमेरिका ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए, लेकिन बिना झुके भारत ने उसका डटकर सामना किया. जिसका जिक्र खुद अटल जी ने लोकसभा में किया था.
प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी बाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को ठीक करने के लिए बहुत ही ईमानदार कोशिशें की. फरवरी 1999 में दिल्ली लाहौर के बीच बस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया और खुद पहली बस से लाहौर पहुंचे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उनका स्वागत किया तथा दोनों ने लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए.
लेकिन पाकिस्तान ने एक बार फिर पीठ में छुरा घोपा. जिस समय संबंधों को ठीक करने के लिए बाजपेयी खुद लाहौर पहुंचे थे ठीक उसी समय तबके पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने करगिल में घुसपैठ शुरू कर दी.
भारत ने घुसपैठियों को निकालने की कार्यवाही शुरू की. अटल सरकार ने निर्णय लिया कि युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत मां के वीर सपूतों का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में होगा. शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर देश के अलग-अलग कोनों में उनके गांव - कस्बे पहुंचने लगे. सरकार के इस निर्णय ने पूरे देश का माहौल बदल दिया. जब भी किसी सैनिक का पार्थिव शरीर पहुंचता, उसको अंतिम विदाई देने के लिए जनता का सैलाब उमड़ पड़ता. लोगों के जज्बात में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा एवं देशभक्ति उमड़ने लगी.
पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए और जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध समाप्त हो गया. लेकिन कारगिल युद्ध के पराजय से भी पाकिस्तान ने सबक नहीं सीखा और भारत के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश जारी रखा. जिसका उदाहरण है कंधार विमान अपहरण एवं संसद भवन पर हुआ आतंकी हमला.
विकट परिस्थितियों के बावजूद अटल सरकार ने देश की विकास को रफ्तार देने के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण करने के लिए बड़े महत्वाकांक्षी निर्णय लिए. सरकार ने देश में राजमार्गों का जाल बिछाने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज के निर्माण का अभूतपूर्व निर्णय लिया. सरकार ने दिल्ली मुंबई चेन्नई एवं कोलकाता को आपस में जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग का निर्माण शुरू किया. इसी के साथ उत्तर से दक्षिण को जोड़ने के लिए कश्मीर के श्रीनगर से तमिलनाडु के कन्याकुमारी के बीच नॉर्थ साउथ कॉरिडोर तथा पश्चिम से पूरब को जोड़ने के लिए गुजरात के पोरबंदर से असम के सिलचर के बीच ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर का निर्माण शुरू हुआ.
यह निर्णय ऐतिहासिक था आज तक भारत में इतने बड़े स्तर पर राजमार्गों के निर्माण की कोशिश नहीं हुई थी. शेरशाह सूरी द्वारा किए गए ग्रैंड ट्रंक रोड के निर्माण के बाद इतिहास की सबसे बड़ी कोशिश थी. यह अटल सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है जो आज भी देश की आर्थिक विकास को रफ्तार दे रहा है.
ऐसा नहीं है की अटल सरकार ने देश में सिर्फ राजमार्गों के निर्माण का अभूतपूर्व निर्णय लिया बल्कि देश के गांवों को भी सड़कों से जोड़ने के लिए महत्वाकांक्षी एवं दूरदर्शिता पूर्ण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की. इससे देश के गांव सड़कों से जुड़े और आर्थिक विकास उन तक पहुंचने शुरू हुए. इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी और गांव एवं शहर की दूरी को कम किया.
देश में स्कूली शिक्षा को मजबूत करने के लिए अटल सरकार ने ठोस पहल किए. शिक्षित समाज ही एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण कर सकता है, इसी सोच से बाजपेयी सरकार ने सर्वप्रथम छोटे बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया. 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए बाजपेयी सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान शुरू किया. वर्ष 2000 में इस योजना के शुरू होने के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चे यानी ड्रॉपआउट की संख्या में भारी कमी देखी गई. वर्ष 2000 में जहाँ ड्रॉपआउटस 40 प्रतिशत था, वहीं 2005 आते-आते यह 10 प्रतिशत पर आ गया.
सर्व शिक्षा अभियान की थीम लाइन ‘स्कूल चले हम’ को खुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने लिखा था.
अटल सरकार में आर्थिक सुधारों को अभूतपूर्व गति प्रदान की गई. विनिवेश को बढ़ावा देने के लिए विनिवेश मंत्रालय का गठन किया गया. देश ने तेज आर्थिक विकास दर्ज की.
संचार क्षेत्र में भी अभूतपूर्व सुधार किए. जब बाजपेयी सरकार सत्ता में आई तब संचार पर सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड का एकाधिकार था. टेलीफोन एवं मोबाइल रखना देश में स्टेटस सिंबल था तथा वह आम आदमी की पहुंच से बाहर था.
1999 में बाजपेयी सरकार ने नई टेलीकॉम नीति लागू किया और भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल के एकाधिकार को खत्म कर दिया.
संचार क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया. प्रतिस्पर्धा बढ़ी और लोगों को सस्ती दरों पर फोन कॉल करने का लाभ मिला. बाद में सस्ती मोबाइल फोन का दौर शुरू हुआ और मोबाइल फ़ोन आम आदमी की पहुंच में आया. आज हर हाथ में मोबाइल है.
संचार क्षेत्र में किए गए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के निर्णयों ने देश में संचार क्रांति लाने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
