प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में कई राज्य मंत्रियों को पदोन्नति देकर के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। राज्य मंत्री से पदोन्नति पाकर के कैबिनेट मंत्री बनने वालों में एक नाम भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) का नाम भी शामिल है। उन्हें वित्त राज्यमंत्री से पदोन्नति देकर के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है।
46 वर्षीय अनुराग ठाकुर मोदी सरकार का युवा चेहरा है एवं पहली बार कैबिनेट मंत्री बने हैं तथा उन्हें सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Information and Broadcasting) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का दायित्व दे दिया गया है। यह इनके ऊपर प्रधानमंत्री के विश्वास को भी दर्शाता है।
अब सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में अनुराग ठाकुर पर प्रधानमंत्री के इस विश्वास पर खरा उतरने की बहुत बड़ी चुनौती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में अनुराग ठाकुर मोदी सरकार का चेहरा होंगे। उन्हें ही अब जनता एवं सरकार के बीच में संवाद स्थापित करना है। उन्हें सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना है तथा विपक्ष के होने वाले हमलों का समुचित जवाब भी देना है।
जनता से संवाद स्थापित करना, फेक न्यूज़ रोकना, अपना नैरेटिव बनाना
मोदी सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी रही है संवाद हीनता। मोदी सरकार अपने कामों एवं उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में नाकाम रही है। जिसका परिणाम यह हुआ कि सरकार अपने ऊपर होने वाले हमलों का न जवाब दे पा रही है और नहीं अपना नैरेटिव गढ़ पाती हैं।
फेक न्यूज़ जंगल में आग की तरह फैल जाता है और मोदी सरकार समय पर न तो उसका जवाब दे पाती है और न उसका काट कर पाती है| जबतक नींद से जागती है और फेक न्यूज़ पर जवाब देती है तब तक बहुत देर हो चुका होता है। यह सब हम कोरोना की दूसरी लहर के समय बखूबी देख चुके है|
नए सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में अनुराग ठाकुर के समक्ष यह सबसे बड़ी चुनौतियां हैं| अनुराग ठाकुर को इस स्थिति को बदलना होगा। उनके मंत्रालय को अपने ढीले ढाले अंदाज को पीछे छोड़ना होगा। सरकार पर होने वाले किसी भी हमले या उठने वाले किसी भी प्रश्न का उत्तर उनके मंत्रालय को तथ्यों के साथ पूरी तत्परता एवं स्फूर्ति के साथ देना होगा। उनको सरकार की बात को रियल टाइम में तथ्यों के साथ तेजी से आगे आकर आम भाषा में पूरी ताकत के साथ रखना होगा| ताकि किसी फेक न्यूज़ के फैलने तथा नकारात्मक नेरिटिक बनाने से रोका जा सके।
मीडिया के जिस प्लेटफार्म चाहे वह डिजिटल हो, सोशल मीडिया हो, इलेक्ट्रानिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया जहां सरकार के ऊपर प्रश्न उठे या सरकार के खिलाफ कोई बात या लेख हो, वहीं पर जाकर सरकार को पूरे तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी होगी| तभी फेक न्यूज़ के फैलने एवं सरकार के खिलाफ बनने वाले नैरेटिव को रोका जा सकेगा। इसके लिए मंत्री के रूप में अनुराग ठाकुर को खुद के साथ-साथ सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों को भी मीडिया के लिए सुलभ होना होगा, सरकार की बात रखनी होगी एवं मीडिया के प्रश्नों के जवाब भी देना होगा।
जागरूकता एवं सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुचाना
इसी तरह से सरकार के कार्यक्रमों एवं योजनाओं को लेकर के जनता में कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा है| टेलीविजन हो या प्रिंट मीडिया हो कही भी सरकार की उपलब्धियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओ को बताता केंद्र सरकार का विज्ञापन दिखाई नहीं देता है| आम जनता केंद्र सरकार की योजनाओं का कैसे लाभ उठा सकती है इसको लेकर के सरकार द्वारा कहीं भी जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा रहा है। मीडिया कैंपेन के जरिए चलने वाला यह जागरूकता अभियान आम जनमानस पर कितना ज्यादा प्रभाव डालता है इसका जीता जागता उदाहरण है दिल्ली की अरविंद केजरीवाल की सरकार। आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए लोग आपको केजरीवाल सरकार की उपलब्धियों के लेकर बात करते सुनाई दे देंगे| उसमें सच्चाई है या नहीं यह राजनितिक विषय है। उसी मीडिया कैंपेन का परिणाम है की विपक्ष के द्वारा अरविंद केजरीवाल पर किया जाने वाला एक भी हमला आम जनता के सामने टिक नहीं पाता है।
मीडिया कैंपेन की ताकत
अनुराग ठाकुर को भी अपने मंत्रालय की इस कमजोरी को दूर करना होगा| उन्हें भी मीडिया कैंपेन की ताकत को पहचानना होगा और उसी मीडिया कैंपेन जरिए सरकार की उपलब्धियों एवं योजनओं को आम जनता तक पहुंचाना होगा। उनको सरकार एवं अपने मंत्रालय को इस सोच से बाहर निकालना होगा कि प्रधानमंत्री एक रैली कर देंगे और सरकार की सारी उपलब्धियां आम जनता तक पहुंच जाएगी। क्योंकि एक रैली कर देने से सरकार की सारी बातें, सारी उपलब्धियां आम जनता तक नहीं पहुंच पाती है| और इस वर्तमान कोरोना महामारी के दौर में अगले लंबे समय तक अब ऐसी रैलियां भी संभव नहीं है। अनुराग ठाकुर के पास समय कम हैं और उन्हें समय रहते मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करते हुए, मीडिया कैंपेन चला कर सरकार की उपलब्धियों एवं योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना होगा। तथा आम जनता को यह बताना होगा कि वह इन योजनाओं का लाभ कैसे ले सकती है।
ओटीटी प्लेटफार्म एवं वेब सीरीज (OTT and web series)
ओटीटी प्लेटफार्म भी सरकार के सामने बहुत बड़ी चुनौती बन कर के सामने आया है। वेब सीरीज के माध्यम से हिंदू विचारों, हिंदू देवी-देवताओं, संघ, भारतीय जनता पार्टी और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। ओटीटी विचारधारा की लड़ाई का केंद्र बन गया है। वेब सीरीज के माध्यम से हिंदू विचारों और हिंदुओं मान्यताओं पर लगातार हमले किए जा रहे हैं| एक तरह से हिंदूफोबिया का माहौल है। हिंदू देवी-देवताओं एवं हिंदू महापुरुषों को लेकर के गंदे गंदे जोक किए जा रहे हैं। इसके कारण आम हिंदू जनमानस के साथ-साथ जो बीजेपी का मूल समर्थक है, जो विचारधारा के कारण भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है, जो विचारधारा पर अडिग है वह वर्ग भी बहुत ही उद्वेलित हो जाता है। और जब सरकार इन वेब सीरीज एवं ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई करने में असफल होती है, उन्हें रोकने में असफल रहती है तो इस वर्ग का गुस्सा OTT प्लेटफार्म के साथ-साथ सरकार के प्रति भी पैदा हो जाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर एवं रविशंकर प्रसाद को सबसे ज्यादा इस गुस्से का सामना करना पड़ा। अतः अनुराग ठाकुर के सामने चुनौती होगी कि वह इन OTT प्लेटफार्म और वेब सीरीज बनाने वाले को बे-लगाम ना होने दें| न उन्हें यह छूट प्रदान किया जाए कि वह अपनी इच्छा के अनुसार जैसे चाहे वैसे इतिहास को तोड़ मरोड़ सके और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू भावनाओं को ठेस पंहुचा सकें और हिंदू देवी-देवताओं को निचा दिखा सके, हिंदू महापुरुषों को अपमानित कर सके।
फिल्म अधिनियम में संशोधन
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म अधिनियम में भी संशोधन करने का प्रस्ताव किया है| यह अनुराग ठाकुर के सामने चुनौती होगा कि वह वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार और भारतीय परंपरा एवं संस्कृति के परिपेक्ष में एक ऐसा कानून लेकर के सामने आए जिससे फिल्म इंडस्ट्री का संपूर्ण विकास हो| फिल्म इंडस्ट्री पर कुछ विचारों और व्यक्तियों का कब्जा हो गया है उसको हटाया जा सके| फिल्म इंडस्ट्री को अंडरवर्ल्ड के नियंत्रण एवं इस्लामिक सोंच से बाहर लाएं तथा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के अनुसार एक व्यापकता दायरा दे जहाँ सबको बिना भेदभाव के अपनी कला प्रदर्शित करने का मौका मिल सके।
नौकरशाही पर नियंत्रण
अनुराग ठाकुर इन सभी चुनौतियों का सामना तभी सफलता पूर्वक कर पाएंगे जब लुटियन कोजी क्लब से खुद को दूर रखने के साथ-साथ अपने मंत्रालय की नौकरशाही पर नियंत्रण रखने ने सफल होंगे। वर्तमान में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पर अफसरशाही यानी नौकरशाही हावी है| अनुराग ठाकुर को अपने मंत्रालय में सफल होना है तो उन्हें सबसे पहले इस बेलगाम नौकरशाही को अपने नियंत्रण में लेना होगा| नौकरशाही को अपने अनुसार चलाना होगा, ना कि खुद नौकरशाही के अनुसार चलने लगें।