डिजिटल डेटाबेस किसानों को कल्याणकारी योजनाओं का दिलाएगा लाभ

हाशिए पर पहुंचे लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं का सीधा मकसद उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना होता है। लेकिन  बेहतर व्यवस्था के अभाव में पहले तो लाभार्थियों के चयन करने में समस्या आती है और बाद में योजनाओं के क्रियान्वयन में बहुत मुश्किलें आती हैं। ऐसे में अगर एक ऐसा डेटाबेस हो जहां लक्षित वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए सारी जानकारियां उपलब्ध हो तो सरकार और लाभार्थी दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। केंद्र सरकार इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए एक ऐसे ही डिजिटल डेटाबेस बनाने पर काम कर रही है जिसका मकसद देश के अन्नदाता किसानों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने में मदद करना है।

आधार और बैंक डिटेल्स होंगे लिंक्ड

इस प्रस्तावित योजना के तहत देश के सभी किसानों के आधार और बैंक डिटेल्स को डेटाबेस में अपलोड किया जाएगा जिससे उन्हें कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दी जाने वाली वित्तीय सहायता सीधा उनके खातों में पहुंच सके। इस पहल से न सिर्फ किसानों को सही समय पर सहायता मिलेगी बल्कि वे समय पर खेती बाड़ी भी कर पाएंगे। हमने अपने आसपास ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जिनमें योजनाओं के बारे में जानकारी न होने की वजह से बहुत सारे लोग जिन्हें लाभ मिलना चाहिए था, वंचित रह जाते हैं, लेकिन इस पहल से ये परिस्थितियां बदलने वाली है।

भूमि रिकॉर्ड भी अपलोड किए जाएंगे

डेटाबेस में देश के किसानों की जमीनों का पूरा विवरण अपलोड किया जाएगा जिससे उन्हें योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए समस्याओं का सामना न करना पड़े। मौजूदा दौर में हमारे देश में ऐसी कोई डिजिटल डाटाबेस नहीं है जिससे इस बात का पता लगाया जा सके कि किसे कृषि से संबंधित योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। बनाए जा रहे इस महत्वाकांक्षी डेटाबेस में राज्यों के सभी किसानों के भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में बदला जाएगा।

कृषि मंत्रियों ने किया मंथन

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देश के सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की, जिसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। पीएम किसान के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹2000 की तीन समान किस्तों में ₹6000 दिए जाते हैं। केंद्र सरकार की इस योजना से किसान घरेलू जरूरतों के साथ-साथ कृषि और उससे जुड़े खर्चों को पूरा कर पाने में सक्षम हुए हैं। इस योजना को फरवरी 2019 में शुरू किया गया था और अब तक 11 किस्तों में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा धनराशि करीब 11.37 करोड़ पात्र किसानों को भेजे जा चुके हैं। इसी बैठक में उस डेटाबेस के निर्माण पर भी मंथन किया गया जिसमें किसानों की सारी जानकारियां इकट्ठा की जाएंगी। इस डेटाबेस से न सिर्फ मौजूदा समय में चलाई जा रही योजनाओं का लाभ बेहतर ढंग से किसानों को मिल पाएगा बल्कि भविष्य में शुरू की जाने वाली योजनाएं भी उन तक बेहतर ढंग से पहुंच पाएगी।

किसानों के कल्याण के लिए चलाई जा रही हैं कई अन्य योजनाएं

पीएम किसान योजना के अलावा देश में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं जैसे पीएम किसान मानधन योजना, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, फसल बीमा योजना जैसी योजनाएं हैं। पीएम किसान मानधन योजना की बात करें तो इस योजना के तहत  60 साल की उम्र से अधिक किसानों को हर महीने 3 हजार रुपए की पेंशन मिलती है। बस इससे पहले तक किसानों को अपनी उम्र के हिसाब से प्रीमियम भरना पड़ता है। जैसे अगर वो 18 से 40 साल की उम्र के बीच आवेदन करते हैं और उदाहरण के तौर पर उनकी उम्र 18 साल है तो उन्हें प्रति माह 55 रुपए प्रीमियम भरना होता है। वैसे ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों को अपने खेतों में सोलर पंप लगवाने पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी और 30 प्रतिशत तक लोन देती है। किसान इस योजना के अंतर्गत अपने खेतों में सोलर पंप या ट्यूबवेल लगवा सकते हैं।

जाहिर है केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों से किसानों के जीवन स्तर में बहुत बदलाव आया है, ऐसे में अगर डिजिटल डेटाबेस का निर्माण हो जाता है तो ये किसानों के लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा।

 


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