राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस हर साल 14 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य ऊर्जा दक्षता और संरक्षण में राष्ट्र की उपलब्धियों को प्रदर्शित करना है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के अंतर्गत संचालित किया जाता है। आज दिल्ली के विज्ञान भवन में ऊर्जा संरक्षण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह और विद्युत तथा भारी उद्योग राज्यमंत्री कृष्णपाल की मौजूदगी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'ईवी यात्रा पोर्टल' और 'मोबाइल एप' भी लॉन्च किया। जानते हैं इस दिवस के उद्देश्य और महत्व के बारे में विस्तार से…
ऊर्जा संरक्षण क्या है ?
ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है कि ऊर्जा का अनावश्यक उपयोग न करना और कम से कम ऊर्जा का प्रयोग कर कार्य करना। उदाहरण के तौर पर इसमें घर या ऑफिस में अनावश्यक लाइट, पंखा का उपयोग न करना, कमरे से बाहर जाते हुए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करना आदि शामिल है। हमारे दैनिक जीवन में घरो में उपयोग की जाने वाली विद्युत् से लेकर फैक्ट्रीज एवं ऑटोमोबाइल से लेकर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के लिए ऊर्जा का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसका संरक्षण आवश्यक है।
क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस
भारत की अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे-वैसे प्रतिवर्ष ऊर्जा की माँग भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में ऊर्जा संरक्षण जरूरी हो जाता है। भारत सरकार द्वारा भी देश के नागरिको में ऊर्जा संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने लिए प्रतिवर्ष ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य ऊर्जा दक्षता और संरक्षण में राष्ट्र की उपलब्धियों को भी प्रदर्शित करना है। देश में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों एवं भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2001 में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 को लागू किया था। इस अधिनियम के अंतर्गत देश में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन कार्यक्रमों के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण को सुनिश्चित किया गया। इस अधिनियम के पश्चात ही प्रतिवर्ष ऊर्जा संरक्षण हेतु 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाता है। अगस्त 2022 में लोकसभा ने ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया है। इसका उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 में संशोधन करना है.
ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिये कार्यक्रम
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा BEE के माध्यम से कई नीतियों और योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, जैसे- ‘प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना’, ‘मानक और लेबलिंग कार्यक्रम’, ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता, उजाला योजना और इको निवास संहिता ।
प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार योजना (Perform Achieve and Trade or PAT Scheme):
PAT योजना के तहत ऊर्जा बचत के प्रमाणीकरण के माध्यम से ऊर्जा दक्षता सुधार में लागत प्रभावशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। यह ‘संवर्द्धित ऊर्जा दक्षता पर राष्ट्रीय मिशन’ (NMEEE) का हिस्सा है जो ‘जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना’ (NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है। इस योजना के तहत अब 1100 इंडस्ट्रियल यूनिटों को कवर किया जा रहा है। इस कार्यक्रम से 40 हजार करोड़ रुपए की सालाना बचत होने के साथ ही 105 मिलियन टन Co2 का उत्सर्जन भी काम होता है।
मानक और लेबलिंग कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के तहत एयर कंडीशनर, सीलिंग फैन, कलर टेलीविज़न, कंप्यूटर, रेफ्रीजरेटर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, जनरल पर्पज़ इंडस्ट्रियल मोटर, एलईडी लैंप, एग्रीकल्चर पंप सेट आदि के मानक निर्धारण और लेबलिंग का कार्य किया जाता है। यह उपभोक्ता को ऊर्जा की बचत के बारे में एक जानकारी प्रदान करता है और इस प्रकार संबंधित उत्पाद की लागत बचत क्षमता भी प्रदान करता है। इस कार्यक्रम से 60 बिलियन यूनिट बिजली की सालाना बचत हो रही है और 60 मिलियन टन Co2 का उत्सर्जन भी कम हुआ है।
उजाला योजना
भारत सरकार की उजाला योजना के अन्तर्गत कम मूल्य पर एलईडी बल्ब दिये जाते हैं जिससे बिजली की बचत की जा सके। यह योजना 2015 में लॉन्च हुई थी। इसमे 150 करोड़ एलईडी बल्ब बाटें गए। इस योजन से भारी मात्र मे ऊर्जा की बचत होने के साथ ही 100 मिलियन टन Co2 का उत्सर्जन भी कम हुआ है।
ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ECBC)
इसे नए व्यावसायिक भवनों के लिये विकसित किया गया था। ऊर्जा संरक्षण भवन कोड 100 किलोवॉट (kW) के संयोजित लोड या 120 kVA (किलोवोल्ट-एम्पीयर) और उससे अधिक की अनुबंधित मांग वाले नए वाणिज्यिक भवनों के लिये न्यूनतम ऊर्जा मानक निर्धारित करता है। BEE ने इमारतों के लिये एक स्वैच्छिक स्टार रेटिंग कार्यक्रम भी विकसित किया है जो एक इमारत के वास्तविक प्रदर्शन पर आधारित है।
इको निवास संहिता
विद्युत मंत्रालय ने इको निवास संहिता, 2018 (रिहायशी इमारतों हेतु ऊर्जा संरक्षण इमारत संहिता ECBC-R) की शुरुआत की। इस संहिता के कार्यान्वयन से 2030 तक सालाना 125 अरब यूनिट बिजली की बचत होने की संभावना है जिससे लगभग 100 मिलियन टन कॉर्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इस योजना का उद्देश्य ऐसे अपार्टमेंट और नगरों का डिज़ाइन तैयार करना तथा उनके निर्माण को बढ़ावा देना है जिनमें रहने वालों को ऊर्जा की बचत का लाभ मिल सके।
हमारा योगदान
भारत सरकार द्वारा की गई पहलों से सालाना कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए की बजत होने के साथ ही 267 मिलियन टन Co2 का उत्सर्जन भी कम होता है। ऊर्जा संरक्षण देश के नागरिकों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। प्रतिदिन के जीवन में अनावश्यक जल रहे बिजली के बल्ब, ए.सी. पंखे, बिजली को अन्य उपकरणों को बंद करके और निजी वाहन की जगह सार्वजनिक वाहन का उपयोग कर हम ऊर्जा संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकते है। एक जागरूक नागरिक दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कार्यो के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण में अहम योगदान देकरऊर्जा संरक्षण के आंदोलन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभा सकता है।