स्वदेशी टिके के बल पर लक्ष्य से आगे चलता भारत का कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान

मंगलवार यानि 31 अगस्त 2021 भारत में कोविड-19 टीकाकरण (India covid vaccination campaign) अभियान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक साबित हुआ। मंगलवार को भारत में एक करोड़ 41 लाख से ज्यादा लोगों को 1 दिन में टीका लगाया गया। यह अभूतपूर्व है। विश्व का कोई भी देश आज तक ऐसा नहीं कर पाया है।

अगर हम दूसरे शब्दों में कहें तो भारत ने अपनी पूरी आबादी के लगभग 1% आबादी को टीका लगा दिया। 1 सप्ताह के अंदर ऐसा दूसरी बार है जब देश में एक करोड़ से ज्यादा टीका एक दिन में लगाया गया है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

भारत का कोरोनारोधी टीकाकरण अभियान जो कि विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है, उसे शुरू से ही कई अवरोधों का सामना करना पड़ा है।

जब भारत ने अपने टीकाकरण अभियान का रोड मैप प्रस्तुत किया और 31 अगस्त 2021 तक 60 करोड़ टीका का डोज लगाने का लक्ष्य रखा तो उसका मजाक बनाया गया। विपक्ष, इंटेलेक्चुअल एवं मीडिया के कुछ वर्ग में इसको लेकर के आशंका जताई। विदेशी मीडिया में उपहास किया गया। सीएनएन ने इस लक्ष्य को एक गरीब एवं विकासशील देश के लिए अति महत्वाकांक्षी लक्ष्य करार दिया, जिसका पूरा होना बहुत मुश्किल है।

लेकिन भारत ने सब को गलत साबित करते हुए न सिर्फ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया बल्कि 31 अगस्त 2021 तक 60 करोड़ के लक्ष्य को पार करते हुए 65 करोड़ टीका का डोज लगाने में सफल रहा। सिर्फ अगस्त महीने में 18 करोड़ से ज्यादा टीके का डोज लगाया गया। इसके लिए देश के वैज्ञानिक, स्वास्थ्य कर्मी एवं सरकार बधाई के पात्र हैं।

भारत के टीकाकरण अभियान को उसी समय से अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है जब देश में स्वदेशी टिका (indigenous vaccine) विकसित करने का काम प्रारंभ हुआ है। विपक्ष, मीडिया एवं बुद्धिजीवियों के वर्ग द्वारा स्वदेशी टीका को लेकर लगातार नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की गई। टिका विकसित करने से लेकर उसकी मंजूरी देने तक हर कदम पर विपक्ष, मीडिया के एक वर्ग एवं कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा लगातार उसके खिलाफ अवरोध पैदा करने की कोशिश की गई। वैज्ञानिकों की प्रशंसा के बजाए टीका की आलोचना की गई। देश में कोरोना टीका को लेकर एक हेजिटेंसी पैदा की गई। जिसके कारण शुरुआती दिनों में लोग टीका लगवाने में हिचकीचाते दिखे।

विश्व की बड़ी फार्मा कंपनियों जैसे फाइजर एवं मोड़ेरना ने भारत में स्वदेशी टिका के खिलाफ माहौल बनवाने की कोशिश की। क्योंकि उनके लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। इन विदेशी फार्मा कंपनियों के सह पर भारत में मीडिया एवं बुद्धिजीवियों को एक वर्ग द्वारा स्वदेशी टिका की आलोचना कर, महंगी विदेशी कोरोनारोधी टिका जैसे फाइजर एवं मोड़ेरना के लिए माहौल बनाने की कोशिश की गई। इन कंपनियों के महंगे टीके को भारत में मंजूरी देने एवं खरीदने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गयी, जिसमे देश का विपक्ष भी शामिल था।

लेकिन इतने दबाव के बाद भी भारत सरकार ने इन कंपनियों की शर्त नहीं मानी, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की जानी चाहिए।

आज भारत अगर अपने टीकाकरण लक्ष्य से आगे चल रहा है तो इसके लिए देश के वैज्ञानिकों एवं स्वदेशी कंपनियां जैसे भारत बायोटेक एवं सिरम इंस्टीट्यूट बधाई के पात्र हैं। अगर भारत ने अपना स्वदेशी टीका विकसित नहीं किया होता, तो आज वह अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाता। उस परिस्थिति में भारत को महंगे विदेशी टीके पर भारी पैसा खर्च करने के साथ ही दूसरे देश की सरकारों पर निर्भर रहना पड़ता। देश के वैज्ञानिकों के कड़ी मेहनत के कारण आज भारत के पास अपना स्वदेशी टीका है।

फाइजर एवं मोड़ेरना के जिस टीका के लिए देश की मीडिया एवं बुद्धिजीवियों के एक वर्ग द्वारा माहौल बनाने की कोशिश की गई वह टिका आज सवालों के घेरे में है। जिन देशों में बड़ी संख्या में फाइजर एवं मोड़ेरना के टीके लगे अब वहां भी इनके खिलाफ माहौल बन रहा है और सरकारें अपने निर्णय पर विचार कर रही है क्योंकि ये वैक्सीन अपने अपेक्षित परिणाम देने में असफल रहे हैं।

भारत के लिए यह राहत की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी सरकार इन विदेशी फार्मा लॉबी के दबाव में नहीं आई। आज स्वदेशी टिके के बल पर देश में टीकाकरण अभियान अपने पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

 


More Related Posts

Scroll to Top