भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के पास दुनिया के लिए अपार अवसर

भारत के G20 शेरपा अमिताभ कांत की अध्यक्षता में भारत की G20 अध्यक्षता के अंतर्गत दूसरी G20 शेरपा बैठक 30 मार्च से 2 अप्रैल, 2023 तक केरल के कुमारकोम के सुरम्य गांव में चल रही है।

इस चार दिवसीय बैठक में G20 के सदस्य, 9 आमंत्रित देश, और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठन के 120 से अधिक प्रतिनिधि, G20 की आर्थिक और विकासात्मक प्राथमिकताओं के साथ ही समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने पर बहुपक्षीय विचार विमर्श करेंगे।

नैस्कॉम, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और डिजिटल इम्पैक्ट एलायंस (डीआईएएल) के साथ साझेदारी में आयोजित होने वाला डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सह-आयोजन, सभी G20 प्रतिनिधियों के लिए एक व्यापक डिजिटल अनुभव होगा। इसके साथ ही वैश्विक चुनौतियों से निपटने और विकास पर कई पैनल चर्चाएँ भी होंगी।

क्या है डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर?

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) डिजिटल पहचान, (digital identity)  भुगतान अवसंरचना (payment infrastructure) और डेटा विनिमय समाधान (data exchange solution) जैसे ब्लॉक या प्लेटफाॅर्म को संदर्भित करता है जो देशों को अपने लोगों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने, नागरिकों को सशक्त बनाने और डिजिटल समावेशन (digital inclusion) को सक्षम करके जीवन में सुधार करने में मदद करता है।

DPIs लोगों, धन और सूचना के प्रवाह में मध्यस्थता करते हैं। पहले एक डिजिटल ID प्रणाली के माध्यम से लोगों का प्रवाह। दूसरा रियल-टाइम त्वरित भुगतान प्रणाली के माध्यम से धन का प्रवाह और तीसरा DPI के लाभों को प्राप्त करने एवं डेटा को नियंत्रित करने की वास्तविक क्षमता के साथ नागरिकों को सशक्त बनाने के लिये सहमति-आधारित डेटा साझाकरण प्रणाली के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी का प्रवाह।

ये तीन सेट एक प्रभावी DPI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के आधार हैं।

प्रत्येक DPI स्तर एक स्पष्ट आवश्यकता को पूरा करती है और विभिन्न क्षेत्रों में लिये बहुत उपयोगी है।

भारत और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत, इंडिया स्टैक के माध्यम से सभी तीन मूलभूत DPI- डिजिटल पहचान (आधार), रीयल-टाइम फास्ट पेमेंट (UPI) और डेटा एम्पावरमेंट प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर (DEPA) पर निर्मित अकाउंट एग्रीगेटर विकसित करने वाला पहला देश बन गया है।

DEPA एक डिजिटल ढाँचा का निर्माण करता है जो उपयोगकर्त्ताओं को एक तृतीय-पक्ष (third party) इकाई के माध्यम से अपने डेटा को अपनी शर्तों पर साझा करने की अनुमति देता है, जिन्हें कंसेंट मैनेजर के रूप में जाना जाता है।

आधार:

आधार सामाजिक और वित्तीय समावेशन, सार्वजनिक क्षेत्र के वितरण सुधारों, राजकोषीय बजट के प्रबंधन, सुविधा बढ़ाने और परेशानी मुक्त जन-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने के लिये एक सामरिक नीति उपकरण है।

आधार धारक निजी क्षेत्र के प्रयोजनों के लिये स्वेच्छा से अपने आधार का उपयोग कर सकते हैं और निजी क्षेत्र की संस्थाओं को ऐसे उपयोग के लिये विशेष अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। 

डिजीयात्रा:

डिजीयात्रा एक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) पर आधारित बायोमेट्रिक इनेबल्ड सीमलेस ट्रेवल (BEST) अनुभव है।

डिजीलॉकर:

डिजीलॉकर के 150 मिलियन उपयोगकर्त्ता हैं, जिसमें छह बिलियन दस्तावेज संग्रहीत हैं और सात वर्षों में 50 करोड़ रुपए के एक न्यूनतम बजट के साथ इसे कार्यान्वित किया गया है। 

उपयोगकर्त्ता अपने दस्तावेज जैसे- बीमा, चिकित्सा रिपोर्ट, पैन कार्ड, पासपोर्ट, विवाह प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र एवं अन्य दस्तावेज डिजिटल प्रारूप में संग्रहीत कर सकते हैं।

UPI:

UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) के माध्यम से लेन-देन का आँकड़ा प्रतिमाह आठ बिलियन तक पहुँच गया है, जिसका मासिक मूल्य 180 बिलियन अमेरिकी डॉलर है या यह मूल्य प्रतिवर्ष भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 65% है।

UPI वर्तमान में नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH), तत्काल भुगतान सेवा (Immediate Payment Service- IMPS), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (Aadhaar enabled Payment System- AePS), भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS), रुपे आदि सहित भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India- NPCI) संचालित प्रणालियों में सबसे बड़ा है।

इंडिया स्टैक:

इंडिया स्टैक (IndiaStack) एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) का एक सेट है जो सरकारों, व्यवसायों, स्टार्टअप और डेवलपर्स को उपस्थिति-रहित, पेपरलेस और कैशलेस सेवा वितरण की दिशा में भारत की कठिन समस्याओं को हल करने के लिये एक अद्वितीय डिजिटल बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति देता है। 

यह जनसंख्या स्तर पर पहचान, डेटा और भुगतान की पुरानी विधियों से लोगों को मुक्त करना चाहता है।

इंडिया स्टैक का विजन एक देश तक सीमित नहीं है; इसे किसी भी राष्ट्र में लागू किया जा सकता है, फिर वह चाहे विकसित राष्ट्र हो या विकासशील।

इस परियोजना की अवधारणा सबसे पहले भारत में विकसित हुई और सबसे पहले भारत में ही लागू की गई थी, जहाँ इसे अरबों लोगों और व्यवसायों द्वारा तेजी से अपनाया गया, वहीं इसने वित्तीय एवं सामाजिक समावेश को बढ़ावा दिया तथा देश को इंटरनेट युग के लिये तैयार किया।

DPI में G20 मंच की भूमिका

विश्व की लगभग 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हुए G20 बार-बार सामने आने वाले संकटों के समय में देश, क्षेत्रीय और वैश्विक लचीलेपन को मजबूत करने के लिए डीपीआई की आवश्यकता को लेकर एक सशक्त पैरोकार बन सकता है।

इसके साथ ही डीपीजी को तीव्र और बेहतर ढंग से कार्य करने के विकल्प के रूप में प्रचारित-प्रसारित किया जा सकता है। G20 प्रतिरोध क्षमता का निर्माण करने और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने योग्य ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकियों के उपयोग की वकालत करके भविष्य के लिए एक उदाहरण भी स्थापित कर सकता है।

G20 सदस्य कुछ कार्रवाईयों पर विचार कर सकते हैं, जैसा कि कोविड-19 महामारी और चल रहे जलवायु संकट के कारण पैदा हुई कई समस्याओं का समाधान डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से निकाला जा सकता है।

जैसे की महामारी के दौरान डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) उम्मीद से अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ। आधारभूत डीपीआई जटिल और सभी सेक्टरों की चुनौतियों का समाधान करने की देश की क्षमता को मजबूत करता है, जिसमें संस्थागत, क्षेत्रीय और भौगोलिक सीमाओं में डेटा का अधिक स्वतंत्र रूप से प्रवाह शामिल है।

बड़ी संख्या में हितधारकों द्वारा सार्वजनिक और निजी नवाचार के लिए इसका लाभ उठाया जा सकता है। इसमें भारत के ऐतिहासिक वैक्सीन अभियान को देखा जा सकता है जो संभवत दुनिया में अपनी तरह का ऐसा पहला इतना बड़े स्तर पर किया गया अभियान था। 

एक और सफल उदाहरण अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की सरकार है, जिसने OpenG2P फ्रेमवर्क का का उपयोग किया। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है, जो सरकार द्वारा लोगों को भुगतान करने के लिए पारस्परिक संचालन योग्य और समावेशी प्रणालियों को लागू करने हेतु डीपीजी के समूह को एक साथ लाता है। OpenG2P ने कोविड-19 के बाद हालात पर नियंत्रण करने के लिए MOSIP के साथ भागीदारी निभाई है।

महामारी ने जहां एक तरफ एसडीजी हासिल करने में देरी की है, वहीं हमारे समाज पर भी असर डाला है और सामाजिक-आर्थिक विभाजन की खाई को और बढ़ा दिया है।  हालांकि, इसने यह भी साबित कर दिया है कि पूरे समाज के नजरिए को अपनाने, अच्छे डीपीआई को लेकर क्षेत्रीय सहयोग स्थापित करने और उसे बढ़ावा देने एवं सतत प्रौद्योगिकियों में निवेश कर हम अपनी मंशा के बारे में स्पष्ट तौर पर बता सकते हैं कि मौजूदा समय की चुनौतियों और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का हम किस प्रकार से सामना कर सकते हैं।

भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से दुनिया अपने नागरिकों को और क्या अधिक सुख-सुविधाएं दे सकती हैं और वैश्विक संकटों से उभरने में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना कारगर साबित हो सकता है इसका उदाहरण हम देख चुके है।

 G20 की भारत की अध्यक्षता में होने वाली शेरपा बैठक में बेहतर तरीके से चर्चा के माध्यम से डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को सार्वभौमिक और वृहद स्तर पर सभी तक पहुंच के लिए आसान बनाने पर कार्य किया जाएगा जिससे वैश्विक प्रणालियों में बेहतर सुधार होगा।

 


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