संसद में नस्लवाद का मुद्दा उठाकर भारत में ब्रिटेन को उसकी भाषा में दिया जवाब

भारत अब दुनिया को उसी की भाषा में उत्तर देने लगा है| चाहे वह कनाडा हो ब्रिटेन हो या कोई और देश| भारत के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप करने की विदेशी ताकतों की कोशिशों का भारत करारा जवाब देने लगा है|

तीन कृषि कानूनों के विरोध में जब भारत में किसान आंदोलन शुरू हुआ तो कनाडा में रह रहे कट्टरपंथी सिख संगठनों को खुश करने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदेऔ ने किसान आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए चिंता जताई थी|

भारत ने भारत में कनाडा के उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय तालाब कर न सिर्फ अपनी नाराजगी जताई बल्कि दो टूक कह दिया कि कनाडा के प्रधानमंत्री का बयान दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचाएगा|

ब्रिटेन के संसद में भी उसे उठाने का लगातार प्रयास हुआ| पहली बार तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन के एक सिख सांसद के प्रश्नों को टाल दिया था| लेकिन कुछ दिन पहले एक अन्य सांसद के प्रस्ताव पर ब्रिटेन की संसद में भारत के तीनों कृषि कानूनों एवं किसान आंदोलन पर चर्चा हुई थी| इस पर भारत सरकार ने भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त को तलब कर विरोध दर्ज करा दिया था|

सोमवार को भारत ने भी ब्रिटेन को उसी के अंदाज में जवाब दिया| ब्रिटेन में व्याप्त रंगभेद एवं नस्लवाद का मुद्दा बहुत ही ज्यादा गर्माया हुआ है| यहां तक कि ब्रिटेन का शाही परिवार भी इस मुद्दे पर विवाद में घिर गया है|

सोमवार को यह मुद्दा भारत की संसद में भी उठा| राज्यसभा में उड़ीसा से भाजपा सांसद अश्वनी वैष्णव ने ब्रिटेन में रंगभेद एवं नस्लवाद का मुद्दा उठाया| कर्नाटक से संबंध रखने वाली ऑक्सफोर्ड की छात्रा रश्मि सामंत का मुद्दा उठाया| जिनके साथ ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में नस्लवादी व्यवहार हुआ था| अपनी हिंदू आस्था पर अडिग रहने के कारण उन्हें साइबर हमलों का सामना करना पड़ा| यहाँ तक की रश्मि सामंत को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा|

अश्वनी वैष्णव ने कहा कि रश्मि सामंत को इस हद तक इंटरनेट पर प्रताड़ित किया गया कि उन्हें स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा| उनके माता-पिता की हिंदू आस्था का एक प्रोफेसर द्वारा खुलेआम मजाक उड़ाया गया| आखिर यह विश्व को क्या संदेश देता है?

उन्होंने शाही परिवार की सदस्य एवं पूर्व अभिनेत्री मेघान मर्केल का मुद्दा भी उठाया|

इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिटेन में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं| भारत पूरे मसले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं| ब्रिटेन से हमारे अच्छे संबंध हैं तथा जब जरूरत पड़ेगी हम ब्रिटेन के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे| भारत हमेशा ही नस्लवाद एवं असहिष्णुता को प्रमुखता से उठाता रहा है|

ब्रिटेन में व्याप्त नक्सलवाद पर अपनी संसद में चर्चा कर भारत ने साफ संदेश दे दिया है कि अगर ये बड़े देश भारत की अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करेंगे तो भारत भी उसी भाषा में उत्तर देगा| इससे पहले पिछले साल अमेरिकी नेताओं को संदेश देते हुए एस जयशंकर ने भारत विरोधी अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल से मिलने से मना कर दिया था|

 


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