भारत-जापान शिखर संमेलन: अगले पांच साल में भारत में 3.2 लाख करोड़ रुपया निवेश करेगा जापान

भारत-जापान शिखर संमेलन India-Japan summit में भाग लेने के जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा दो दिवसीय भारत दौरे पर शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे तथा शाम को जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भारत – जापान शिखर वार्ता संपन्न हुए। जापान अगले पांच साल में भारत में 3.20 लाख करोड़ रुपये (5 ट्रिलियन येन) का निवेश करेगा। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार के लिए छह समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।

शिखर वार्ता के बाद मीडिया को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-जापान के मजबूत संबंधों से न केवल दोनों देशों को फायदा होगा, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता को भी बढ़ावा देने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रगति, समृद्धि और साझेदारी भारत-जापान संबंधों के आधार हैं। हम भारत में जापानी कंपनियों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत-जापान के बीच आर्थिक साझेदारी में प्रगति हुई है। जापान भारत में सबसे बड़े निवेशकों में से एक है।

जापान के पीएम किशिदा ने कहा कि यूक्रेन में रूस का आक्रमण गंभीर मसला है, इसने अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार को हिला दिया है। हमने इस मुद्दे पर चर्चा की। ताकत का इस्तेमाल कर यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे हालात में भारत और जापान के बीच घनिष्ठ साझेदारी होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है। जापान-भारत मिलकर युद्ध को खत्म करने की कोशिश करता रहेगा और यूक्रेन तथा उसके पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करता रहेगा। दोनों देशों को खुले तथा मुक्त हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करना चाहिए और इसके लिए अपने प्रयास बढ़ाने चाहिए।

शिखर वार्ता पर जानकारी देते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया कि तीन समझौते संपन्न हुए हैं। इसमें साइबर सुरक्षा पर सहयोग का एक ज्ञापन, सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग का एक ज्ञापन और अपशिष्ट जल प्रबंधन पर सहयोग का एक ज्ञापन शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री किशिदा ने यूक्रेन पर अपने दृष्टिकोण का आदान-प्रदान किया। उन्होंने चल रहे संघर्ष और मानवीय संकट के बारे में गंभीरता व्यक्त की और इंडो-पैसिफिक के लिए व्यापक प्रभाव का आकलन किया।

 


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