जर्मनी को पछाड़कर भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार

भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार बन गया है। हाल ही में ब्रिटेन को पछाड़कर भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था और अब भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार (Vehicle Market) भी बन गया है।

जर्मनी को पछाड़कर पहुंचा इस मुकाम पर

ऑर्गनाइजेशन इंटरनेशनल डेस कंस्ट्रक्टर्स डी ऑटोमोबाइल्स (ओआईसीए) (OICA) के आंकड़ों के मुताबिक भारत जर्मनी को पछाड़कर चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार बना है। भारत ने साल 2021 में करीब 37.6 लाख वाहन बेचे जबकि जर्मनी में लगभग 29.7 लाख वाहनों की बिक्री हुई।

कोविड महामारी के बावजूद तोड़ा रिकॉर्ड

कोविड -19 महामारी के बावजूद, भारत ने जर्मनी में 2,973,319 वाहनों की तुलना में 2021 में 3,759,398 वाहन बेचे। यह इस क्षेत्र में लगभग 26% की वृद्धि को दर्शाता है और शीर्ष 5 देशों में दहाई अंकों की वृद्धि दर्ज करने वाला एकमात्र देश है। इससे एक बात तो साफ होती है कि भारतीय वाहन उद्योग अब देश में उभरते क्षेत्रों में बड़े अवसरों से भरपूर लाभ उठा रहा है जिसके नतीजे पूरी दुनिया के सामने आ गए हैं।

युवाओं के लिए बढ़े रोजगार के अवसर

वाहन उद्योग का विकास निश्चित रूप से हमें COP 26 में पीएम मोदी द्वारा दिए गए “पंचामृत” मंत्र के लिए भारत की प्रतिबद्धता को हासिल करने में मदद कर रहा है और साथ ही साथ भारतीय युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर भी प्रदान कर रहा है। गाड़ियों के प्रोडक्शन से जुड़े कामगारों को काम मिल रहा है। इससे व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहन प्रणाली की दिशा में प्रयास तेज

भारत इलेक्ट्रिक वाहन प्रणाली की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। इस दिशा में भारत की प्रगति से 2030 तक केवल तेल आयात पर 20 लाख करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। यानि भारत वैश्विक मंदी के दौर में धन की बचत करने के मार्ग तैयार कर विकास पथ पर और आगे बढ़ने की चाह में है। इस दिशा में भारत ने काम भी शुरू कर दिया है।

भारत के आर्थिक विकास का प्रमुख वाहक

ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Industry) या मोटर वाहन क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास का एक प्रमुख वाहक रहा है और विनिर्माण क्षेत्र में यह सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। मोटर वाहन उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 6.4 प्रतिशत और विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद में 35 प्रतिशत का योगदान देता है और यह एक प्रमुख रोजगार प्रदाता है।

इस समय विश्व की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी कोविड महामारी के बाद आई आर्थिक मंदी से उभर नहीं पाई हैं। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी के साथ विश्व अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। पिछले आठ वर्षों में भारत ने अपने साथ-साथ पूरी दुनिया की आर्थिक प्रगति को मजबूती दी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013 के अंत में भारत का विश्व की जीडीपी में योगदान महज महज 2.4 प्रतिशत था जो अब करीब 9.4 फीसदी हो गया है।

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था

आईएमएफ के विश्व आर्थिक आउटलुक वृद्धि अनुमान के अनुसार, वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए भारत की वास्तविक GDP के 9 प्रतिशत की दर से और 2023-24 में 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। यह भारत को इन तीनों वर्ष में पूरी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करता है।

गौरतलब हो, 2014 से पहले जो दुनिया भारत की अर्थव्यवस्था को फ्रैजाइल फाइव (Fragile Five) में मानकर हमें संदेह की दृष्टि से देखती थी। आज वही भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की चर्चा कर रही है। यानि अब दुनिया भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहती है।

2025 तक तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार बनने की उम्मीद

भारत के 2025 तक तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार बनने की उम्मीद है, हालांकि, इसके लिए भारत को जापान से आगे निकलने की आवश्यकता है जिसने 2021 में 4,448,340 इकाइयां बेचीं। फिलहाल, भारत बड़ी मात्रा में ई-व्हीकल लाने की तैयारी में है।

उल्लेखनीय है कि देश की पहली ”मेड इन इंडिया” कार की शुरुआत से बीते 7 दशक में भारत दुनिया के शीर्ष ऑटोमोबाइल मार्केट में शामिल हो गया है। देश में तमाम विदेशी कार-बाइक के शोरूम बन रहे हैं जिनकी चमक-दमक सबको हतप्रभ कर रही है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि भारत की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में कामयाबी की पटकथा संघर्षों से भरी, लेकिन प्रेरणादायक है। आंकड़े खुद इस बात की पुष्टि करते हैं। दोपहिया उत्पादन में भारत पहले और कार उत्पादन में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहीं कारों की बिक्री के मामले में भारत चौथा बड़ा देश बन गया है। यही नहीं, भारत दुनिया के सौ से अधिक देशों को कार निर्यात भी कर रहा है।

 


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