भारतीय रेल का 2023 तक होगा पूर्ण विद्युतीकरण - पीयूष गोयल

सरकार ने भारतीय रेलवे को साल 2030 तक ग्रीन रेलवे में बदलने यानि अक्षय ऊर्जा पर चलाने का लक्ष्य रखा है। इसके योजना के तहत भारतीय रेलवे का साल 2023 तक पूर्ण विद्युतीकरण किया जाएगा।

सरकार का यह कदम कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए है, जिसके तहत देश में चलने वाली डीजल रेलगाड़ियों की संख्या को फिलहाल कम किया जा रहा है। देश का पूरा रेल नेटवर्क अब इलेक्ट्रिक इंजनों के साथ चलता हुआ नजर आएगा। भारतीय रेलवे में किए जा रहे इस बड़े बदलाव को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में मैरीटाइम-इंडिया समिट 2021 में अपने संबोधन में दोहराया।

2030 तक भारतीय रेल करेगा 'ग्रीन रेलवे' का सपना साकार

भारत सरकार ने साल 2030 तक भारतीय रेल नेटवर्क को 'ग्रीन रेलवे' में तब्दील करने की पहल शुरू की हैं। इसके तहत भारतीय रेलवे ने अब तक कुल 40,000 किलोमीटर (कुल ब्रॉड-गेज मार्गों का 63 प्रतिशत) से अधिक रेलमार्गों के विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। इसमें से भी 18,605 किलोमीटर के मार्ग के विद्युतीकरण का कार्य साल 2014-20 के बीच ही पूरा कर लिया गया था।

लोकसभा में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार रेलवे नेटवर्क के बचे हुए ब्रॉड गेज मार्गों के विद्युतीकरण की योजना इस प्रकार है:

1) वर्ष 2019-20.20 में, 6,000 किमी ब्रॉड गेज मार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य

2) वर्ष 2020-2021 में, 6,000 किमी ब्रॉड गेज मार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य

3) वर्ष 2021-2022 में, 6,000 किमी ब्रॉड गेज मार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य

4) वर्ष 2022-2023 में 6,5000 किमी के ब्रॉड गेज मार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य

5) वर्ष 2023-2024 (दिसंबर 2023 के महीने तक) में, 4,310 किलोमीटर ब्रॉड गेज मार्ग के विद्युतीकरण का लक्ष्य

प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर अग्रसर है भारत

रेलवे का विद्युतीकरण होना प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर एक कदम है। अगले कुछ वर्षों में पूरे रेलवे के विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद भारतीय रेल दुनिया का पहला कार्बन उत्सर्जन-मुक्त नेटवर्क बन जाएगा। इसके साथ ही, रेलवे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर रहा है, जो अपने आप में एक अनूठी पहल है।

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि सड़क, रेल और जलमार्ग के एकीकरण पर भी जोर दिया जो भारत को 'वन नेशन, वन मार्केट, वन सप्लाई' हासिल करने में मदद कर सकता है। फिलहाल भारत सरकार परिवहन की लागत को कम करने तथा आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने के लिए बहु-मोडल लॉजिस्टिक समाधानों पर काम कर रही है। इस अवसंरचना क्षेत्र के विकास के लिए अपग्रेड, क्रिएट और डेडिकेट तीन मंत्र हैं।

 


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