क्या मोदी सरकार तमिलनाडु का विभाजन कर अलग राज्य कोंगूनाडु बनाने जा रही है?

पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु की राजनीति इस बात को लेकर के गरमाई हुई है कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार तमिलनाडु का विभाजन का पश्चिम तमिलनाडु, जिसे कोंगूनाडु Kongu Nadu भी कहते हैं, उसे अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बना सकती हैं।

जब से एम के स्टालिन के नेतृत्व में तमिलनाडु में डीएमके की सरकार आई है उसका केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से टकराव जारी है। डीएमके की सरकार दबी जुबान में अलगाववाद को हवा देने में लगी हुई है। उसने केंद्र सरकार को संघ सरकार यानी सेंट्रल गवर्मेंट को यूनियन गवर्मेंट कहना शुरू कर दिया है। तमिलनाडु के वित्त मंत्री पी थैयागराजन ने जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में विवाद खड़ा कर दिया था। डीएमके सरकार ने नीट परीक्षा के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए भी एक कमेटी का गठन कर दिया| नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को विरोधियों को मिलकर एक 5 सदस्य आर्थिक सलाहकार समिति का गठन किया है। टकराव का ताजा मामला जय हिंद को लेकर के तमिलनाडु विधानसभा में हुआ विवाद है।

ऐसा माना जा रहा है कि तमिलनाडु की एम के स्टालिन की सरकार ऐसा करके केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को चिढ़ाने की कोशिश कर रही है।

खबर है कि भारतीय जनता पार्टी एवं केंद्र सरकार ने भी डीएमके को उसी की भाषा में जवाब देने का मन बना लिया है। तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष 44 वर्षीय डॉ एल मुरूगन Dr. L. Murugan को संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। डॉ एल मुरूगन तमिलनाडु के कोंगूनाडु क्षेत्र से ही आते हैं।

डॉ एल मुरूगन के मंत्री बनने के बाद माय गोव MyGov द्वारा उनका परिचय देते हुए उन्हें कोंगूनाडु क्षेत्र का बताया गया। इसी के बाद से कोंगूनाडु को नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा गर्म हो गया है।

मंत्री बनने के बाद जब डॉ एल मुरूगन ने भारतीय जनता पार्टी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया तो उनकी जगह भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई को तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। वह भी कोंगूनाडु क्षेत्र से ही आते हैं।

तमिलनाडु के कोंगूनाडु क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी पकड़ है। मई में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी एवं एआईएडीएमके ने पूरे कोंगूनाडु क्षेत्र में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए डीएमके का सफाया कर दिया था। कोंगूनाडु क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के पास फिलहाल 2 विधायक हैं।

पश्चिम तमिलनाडु के जिले कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड, नमक्कल, सेलम, धर्मपुरी, नीलगिरी, करूर और कृष्णागिरी को मिलाकर के कोंगूनाडु क्षेत्र कहा जाता है। यह तमिलनाडु का सबसे संपन्न क्षेत्र है। इस पूरे क्षेत्र में बहुत ही बड़ी संख्या में एमएसएमई औद्योगिक इकाइयां तथा शिक्षण संस्थान है। कर्नाटक से लगा हुआ यह क्षेत्र कावेरी डेल्टा का भी क्षेत्र है।

कोंगूनाडु क्षेत्र में लोकसभा कि 10 तथा विधानसभा की 61 सीटें आती है| ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र को अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाकर के विधानसभा के सीटों की संख्या बढ़ाकर के 90 कर सकती है।

बदलते घटनाक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित को भी दिल्ली बुला लिया गया है| ऐसी चर्चा गर्म है कि तमिलनाडु में नए राज्यपाल की नियुक्ति हो सकती है| खबर है की पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नाम पर भी तमिलनाडु के नए राज्यपाल के रूप में विचार किया जा रहा है।

कोंगूनाडु को अलग राज्य बनाए जाने की को ले करके बताया जाता है कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी डीएमके भड़काऊ नीति को उसकी भाषा में जवाब देना चाह रही हैं|

तमिलनाडु के कोंगूनाडु क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत है और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ को और मजबूत कर लेना चाह रही है| नए राज्य बना करके क्षेत्र की जनता की सहानुभूति प्राप्त करके अधिक से अधिक लोकसभा सीटें भाजपा जितना चाह रही है।

 


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