महाराष्ट्र की राजनीति में उठा बवंडर शांत होने का नाम नहीं ले रहा है| उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर पर स्कार्पियो में विस्फोटक रखने के मामले में एनआईए द्वारा मुंबई पुलिस के पूर्व एपीआई सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद से लगातार बदलती परिस्थितियों में महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी की सरकार एक के बाद एक मुश्किल में फंसती चली जा रही है|
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह मामले को और सनसनी खेज बनाते हुए महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सचिन वाजे के जरिए 100 करोड़ प्रति माह की वसूली का आरोप लगा चुके हैं| फ़िलहाल सीबीआई जाँच की मांग करने वाली उनकी याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई होनी हैं| परमवीर सिंह के आरोप के बाद से विपक्षी भारतीय जनता पार्टी विशेषकर करके महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस सरकार पर लगातार हमलावर है|
देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस की ट्रांसफर एवं पोस्टिंग में रैकेट चलने का आरोप लगाया था| इस सिलसिले में वह केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात कर टेलीफोन टैपिंग का रिकॉर्ड दे चुके है|
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के ऊपर अपने पद से हटने का लगातार दबाव बना हुआ है| दबाव मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे एवं एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर भी है|
इसी बीच शनिवार को अमदाबाद में एक कार्यक्रम में हुई बड़ी राजनीतिक मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म हो गया है|
कार्यक्रम का आयोजन मशहूर उद्योगपति गौतम अदानी यहां हुआ था| जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल भी शामिल हुए थे| खबर है कि उस कार्यक्रम के दौरान अमित शाह, शरद पवार एवं प्रफुल्ल पटेल के बीच में एक वार्ता भी हुई|
गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुलाकात की खबर का खंडन नहीं किया है| इस पर सिर्फ इतना कहा की सभी चीजें सार्वजनिक नहीं होती है|
इसी बीच शिवसेना के मुखपत्र सामना में रविवार को प्रकाशित अपने लेख में शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के ऊपर जमकर के हमले किए हैं| जिसपर एनसीपी आग बबूला है| जो शिवसेना और संजय राउत कल तक अनिल देशमुख का बचाव कर रहे थे वही आज अचानक उनके ऊपर हमलावर क्यों हो गए हैं?
वही दूसरी तरफ, जब से यह पूरा हंगामा शुरू हुआ है तब से चुप्पी साधे बैठे एनसीपी के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार भी अचानक हमलावर हो गए हैं| सामना में छपे संजय राउत के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए अजित पवार ने कहा कि शिवसेना को ऐसे बयानों से बचना चाहिए, यह गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है|
इन राजनीतिक गतिविधियों से एक चीज तो स्पष्ट है महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ तीनों दल शिव सेना, कांग्रेस एवं एनसीपी में एक दुसरे के प्रति एक अविश्वास है| तिनो दल पुरे प्रकरण में अपने आप को पाक साफ साबित करने और जिम्मेदारी दुसरे पर मढ़ कर निकल जाने की तैयारी में लगे है|
अब गृह मंत्री अमित शाह, शरद पवार एवं प्रफुल्ल पटेल के बीच की मुलाकात एक औपचारिक मुलाकात है या राजनीतिक, यह तो समय ही बताएगा| लेकिन राजनीति में कुछ भी अनायास नहीं होता है|
महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक सच्चाई यह है कि सचिन वाजे प्रकरण के बाद से महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ तीन दलों में से दो दल एवं इशिवसेना एवं एनसीपी भारी दबाव में है और वह इस संकट से बच निकलने का उपाय ढूंढने में लगे हुए|