न्यायमूर्ति बी वी नगराथ्ना बन सकती हैं भारत की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश

खबरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंगलवार देर शाम सुप्रीम कोर्ट में 9 नए जजों की नियुक्ति की अनुशंसा की है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने लगभग 22 महीने के बाद सुप्रीम कोर्ट में किसी जज की नियुक्ति की अनुशंसा की है। उच्चतम न्यायालय में जजों की अधिकतम संख्या मुख्य न्यायाधीश सहित 34 हो सकती है। वर्तमान में मात्र 25 जज ही है। यानी उच्चतम न्यायालय में कुल 9 रिक्तियां है। न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा के 18 अगस्त को सेवानिवृत्त हो जाने के बाद रिक्तियां बढ़कर 10 हो जायेंगी।

उच्चतम न्यायालय में जजों की नियुक्ति कॉलेजियम के माध्यम से होती है। पांच वरिष्ठ जज उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के सदस्य होते हैं। वर्तमान उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के सदस्य हैं मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ एवं न्यायमूर्ति एल नागेश्वरा राव।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जिन 9 नामों को सुप्रीम कोर्ट के नए जज के रूप में नियुक्त करने की अनुशंसा की है उसमें कर्नाटक उच्च न्यायालय की जज न्यायमूर्ति बीवी नगराथ्ना (Justice BV Nagarathna) का नाम भी शामिल है। अगर केंद्र सरकार कॉलेजियम की अनुशंसा स्वीकार कर लेती है तो वर्ष 2027 में नगराथ्ना भारत की मुख्य न्यायाधीश (first woman Chief Justice of India) बन सकती है। इस तरह से वह पहली महिला होंगी जो भारत की मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। न्यायमूर्ति नगराथ्ना के पिता इ एस वेंकटरमैया भी जून 1989 से दिसंबर 1989 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।

बी वी नगराथ्ना के अलावा कॉलेजियम ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हीमा कोहली (Justice Hima Kohli) एवं गुजरात उच्च न्यायालय की जज न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी (Justice Bela Trivedi) के नाम की भी अनुशंसा की है। इस तरह से उच्चतम न्यायालय में महिला जजों की संख्या 1 से बढ़कर 4 हो जाएगी जो अब तक का अधिकतम होगा। न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी उच्चतम न्यायालय में एकमात्र जज होंगी जिन्हें निचली अदालत में भी काम करने का अनुभव है। वह जिला अदालत से उच्च न्यायालय पहुंची और अब उच्चतम न्यायालय। इससे पहले न्यायमूर्ति आर बानुमति एवं न्यायमूर्ति सी नागप्पा के पास या अनुभव था।

जिन अन्य नामों की अनुशंसा कॉलेजियम द्वारा की गई है उसमें शामिल है कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय श्रीनिवास ओका (Justice Abhay Shriniwas Oka), गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath), सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी (Justice J K Maheshwari), केरल उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार (Justice C T Ravi Kumar) एवं मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेष (Justice M M Sundresh)।

कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट बार से भी एक नाम की अनुशंसा की है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एवं पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पी नरसिम्हा (P Narsimha) के नाम की अनुशंसा की गई है। पी नरसिम्हा वर्ष 2014 से 2018 तक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे हैं। उच्चतम न्यायालय में राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने महंत रामचंद्र दास का प्रतिनिधित्व किया था। पी नरसिम्हा प्राचीन भारतीय ज्ञान एवं तर्क शास्त्र के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

 


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