कर्नाटक में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा अभी दिल्ली में है। उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि 10 मिनट तक चले प्रधानमंत्री के साथ इस बैठक में उन्होंने अपने स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की उम्र 78 साल है तथा उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रह रहा है। कर्नाटक जैसे बड़े एवं औद्योगिक राज्य के लिए एक ऊर्जावान मुख्यमंत्री की जरूरत महसूस की जा रही थी।
भारतीय जनता पार्टी में 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाने का अलिखित नियम है। लेकिन बीएस येदियुरप्पा को इससे छूट मिली हुई थी क्योंकि कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के पास विकल्प नहीं था।
शनिवार को येदियुरप्पा ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की तथा कर्नाटक के राजनीतिक हालात और उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर के चर्चा की।
येदियुरप्पा की राय एवं पसंद का ख्याल रखा जाएगा
ऐसी चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी जिसको भी बीएस येदियुरप्पा के उत्तराधिकारी के रूप में चुनेगी उसमें बीएस येदियुरप्पा की राय एवं पसंद का ख्याल रखा जाएगा। येदियुरप्पा कर्नाटक में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा है। कर्नाटक में भाजपा का मूल वोट बैंक और आधार लिंगायत समाज है और येदियुरप्पा लिंगायत के सबसे बड़े नेता। कर्नाटक में भाजपा ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगी जिससे उसके मूलभूत बैंक लिंगायत समाज में कोई नाराजगी पैदा हो।
येदियुरप्पा को बदलने का निर्णय भी उनकी सहमती से ही लिया जायेगा। उनके समर्थको में कोई नाराजगी न हो इसी लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में पहले येदियुरप्पा की करीबी शोभा करान्जले को मंत्री बनाया गया। नए मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में येदियुरप्पा के एक बेटे को मंत्री बनाया जायेगा।
मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल लिंगायत चेहरे
यदि भारतीय जनता पार्टी किसी लिंगायत को ही नया मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लेती है तो ऐसी परिस्थिति में कर्नाटक के वर्तमान उपमुख्यमंत्री 61 वर्षीय लक्ष्मण शिवाडी, राज्य के गृहमंत्री 61 वर्षीय बसवाराज बोम्मई तथा राज्य सरकार में मंत्री 56 मुर्गेश नीरानी का नाम प्रमुखता से शामिल है।
मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल गैरलिंगायत चेहरे
यदि भारतीय जनता पार्टी लिंगायत के अलावा अन्य नामों पर भी विचार करती है तो उस स्थिति में वर्तमान उपमुख्यमंत्री 52 वर्षीय सीएन अश्वथनारायण, केन्द्रीय मंत्री 58 वर्षीय प्रहलाद जोशी, राज्य सरकार में पूर्व मंत्री तथा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव 53 वर्षीय सीटी रवि का नाम नए मुख्यमंत्री के दौड़ शामिल हो सकता है।
दौड़ में राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष का नाम भी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष का नाम भी समय-समय पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में चलता रहता है। 55 वर्षीय बीएल संतोष के साथ दिक्कत यह है कि वे संघ (RSS) से भारतीय जनता पार्टी में आए हैं तथा कभी चुनावी राजनीति में शामिल नहीं हुए। वह कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के धुर विरोधी भी माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त वह ब्राह्मण है तथा कर्नाटक में ब्राह्मण आबादी मात्र 3 प्रतिशत है।
उनके पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है की अविवाहित बीएल संतोष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के पूर्णकालिक प्रचारक है। राज्य में पार्टी संगठन पर उनकी जबदस्त पकड़ है। युवा नेता प्रताप सिम्हा एवं तेजस्वी सूर्या को आगे बढ़ाने का श्रेय इन्हें ही जाता है। सीटी रवि को भी बीएल संतोष ने ही राष्ट्रीय राजनीति में लाया| पार्टी की केन्द्रीय नेतृत्व पर भी बीएल संतोष की अच्छी पकड़ है| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी RSS के पूर्णकालिक प्रचारक थे तथा भाजपा के संगठन महासचिव थे जब संगठन महासचिव को किसी राजनीतिक पद पर नियुक्त नहीं करने की परम्परा को तोड़ते हुए उन्हें सीधे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था| तो क्या एक बार फिर से वह परंपरा टूटेगी और बीएल संतोष कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेगे?
वैसे भी पिछले कुछ सालों में भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सबको चौकाता रहा है| चाहे वह हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर हो, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस हो या फिर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ| सबसे ताजा उदाहरण है उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी का चुनाव|
कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर स्पष्टता के साथ तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता जब तक भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा इसकी विधिवत घोषणा नहीं कर दी जाती है|