जानें क्या है इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया एवं अंतिम तिथी

देश के आयकर दाताओं को एक बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी CBDT ने वित्त वर्ष 2020-21 और एससमेंट ईयर 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब व्यक्तिगतकर दाता 30 सितंबर तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न Income Tax Return दाखिल कर सकते हैं।

सीबीडीटी ने इनकम टैक्स एक्ट के 1961 के सेक्शन 119 के तहत अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इनकम टेक्स रिटर्न भरने की समय सीमा बढ़ा दी है। वहीं सीबीडीटी ने कंपनियों के लिए भी कर्मचारियों को फॉर्म-16 जारी करने की जो समय सीमा है, उसे भी एक महीने आगे कर दिया है। अब कंपनियां 15 जुलाई तक अपने कर्मचारियों को फॉर्म-16 जारी कर सकेंगी। रिवाइज इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जो समयसीमा है, अब वो 31 जुलाई 2022 होगी। ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की जो पूरी प्रक्रिया है, उसे जानना बेहद जरूरी है।

30 सितम्बर 2021 तक भर सकते हैं टैक्स रिटर्न

टैक्स मामलों के जानकार और आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन बताते हैं कि टैक्स रिटर्न भरने की नॉर्मल डेट 31 जुलाई होती है, लेकिन इस वर्ष अप्रैल और मई माह में कोविड की सेकेंड वेव देश के भीतर चल रही थी। इन दो महीनों में कोरोना के प्रभाव के चलते सभी कार्यालय भी बंद रहे। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने टैक्स रिटर्न जमा कराने की तारीख को 31 जुलाई से बढ़ा कर 30 सितम्बर 2021 किया। 1 जून के बाद से देश में स्थिति लगभग सामान्य नजर आ रही है। देश के एक दो राज्य ही होंगे, जहां अभी भी हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है, जैसे कि केरल।

आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा, देश में इस स्थिति में फिलहाल सभी बैंक काम कर रहे हैं और सभी दफ्तर सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। ऐसे में सभी करदाता इस डेडलाइन तक कर अदा कर सकते हैं। करदाता आने वाले दो महीनों के अंदर 30 सितंबर तक अपने टैक्स की रिटर्न भर सकते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए क्योंकि एम्पलॉयर के एक फॉर्म नंबर-16 जारी करता है, जिसमें वे एम्पलॉई को दो गई सेलरी और उस पर जो टैक्स काटा गया है उसका ब्यौरा देते हैं, उसकी अवधी भी बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी गई है। फॉर्म-16 आने के बाद सब एम्पलॉइज के लिए और इंडिविजुअल के लिए अपने-अपने टैक्स रिटर्न भरने के रास्ते आसान हो जाएंगे।

करदाताओं को मिलेगी एक और नई सुविधा

इसके अलावा इस साल एक और अच्छा काम हुआ है। दरअसल, अब करदाता की इनकम टैक्स रिटर्न ऑटो पॉपुलेटेड होगी, जिससे कि करदाता की सारी इन्फॉर्मेशन जो उसके एम्पलॉयर के पास होगी और जो अन्य जगहों से आई होगी और करदाता की जो व्यक्तिगत सूचनाएं हैं, जैसे एंटिजन नंबर या एड्रेस इत्यादि, वह खुद-ब-खुद रिटर्न में एड होकर आएगा और करदाता को उसे भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सुविधा भी अपने आप में काफी अहम साबित होगी।

सभी करदाता टैक्स से संबंधित सही जानकारी भरें

सभी करदाता कोशिश करके अपना सारा डाटा इकट्ठा करें और जो भी उनकी टैक्सेबल इनकम बनती है उसे करेक्टली रिपोर्ट करें। दरअसल, कई बार करदाताओं से गलती हो जाती है, जैसे कि बैंक में कोई खाता खोला है तो सेविंग बैंक का कोई इंटरेस्ट मिला है या कोई फिक्स डिपॉजिट जमा कराया है तो उसके ऊपर इंटरेस्ट मिला है वो टैक्स रिटर्न में शामिल करना रह जाता है। इसके अलावा किसी कंपनी में यदि निवेश किया हुआ है, तो उसका जो डिविडेंट आता है, उसका ब्यौरा देना भी जरूरी है। जी हां, इस साल से डिविडेंट टैक्सेबल करदाता के हाथ में हो गया है। ऐसे में करदाता को अपनी डिविडेंट इनकम भी दिखानी होगी। वहीं इससे पहले जो भी डिविडेंट इनकम एकजर्प्ट हुई थी, उसे भी दिखाना होगा। इन सबके अलावा यदि कोई और फेसिलिटी मिल रही है तो आपको वो भी दिखानी होगी। वहीं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक और कंसेशन दिया है, जिसमें कि कोविड-19 के चलते एम्पलॉइज को राहत प्रदान की गई है।

आयकर रिटर्न :

– करदाता अब आयकर रिटर्न 30 सितंबर 2021 तक करवा सकेंगे जमा

– केंद्र सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए आयकर रिटर्न भरने की समय सीमा बढ़ाई

– वर्ष 2020-21 की व्यक्तिगत आयकर रिटर्न 30 सितंबर तक जमा करा सकते हैं।

– यदि आपको एक वित्त वर्ष में कुल सालाना आय 2.50 लाख रुपए से ज्यादा है तो इनकम टैक्स रिटर्न भरना जरूरी है।

– नौकरी कारोबार या पेशे से टैक्स छूट की सीमा से अधिक आमदनी होती है तो आपके लिए आयकर रिटर्न भरना जरूरी है।

– थोड़ी सी लापरवाही से आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है।

टैक्स फाइल करते वक्त किन डॉक्यूमेंट्स की होगी जरूरत ?

टैक्स एक्सपर्ट वेद जैन बताते हैं कि अब एप के माध्यम से रिटर्न की कैल्क्युलेशन बेहद आसान हो गई है। इस प्रक्रिया में करदाता को केवल अपना डाटा फीड करना होता है। उसके बाद एप में करदाता की कम्पयूटेशन इनकम पर कितना टैक्स बनता है, जिस तारीख पर करदाता ने टैक्स जमा कराया है उसको भरने के बाद उसके ऊपर कोई इंटरेस्ट की लायब्लिटी बनती है तो वह ऑटोमेटिकली कैल्क्युलेट हो जाती है।

आगे जोड़ते हुए वे कहते हैं कि यदि किसी साधारण व्यक्ति की बात करें जो किसी कंपनी या किसी क्षेत्र में कार्य कर रहा है, उसका मेन सोर्स ऑफ इनकम एक ‘सैलरी’ होती है। सैलरी की इनकम पर एक एंप्लॉयर का दायित्व है कि उसके ऊपर टैक्स काटे और कैल्क्युलेशन कर, फॉर्म-16 भरे। ऐसे में करदाता को एम्पलॉयर से मिला फॉर्म-16 अपने सामने रखना है और उसमें जो सेलरी मिली है और कंपनी की ओर से जो भी डिडक्शन की गई है और जो टैक्स एम्प्लॉई ने दिए हैं, वे सभी करदाता को अपने रिटर्न के अंदर फिलअप करने हैं। करदाता के द्वारा भरा जाने वाला रिटर्न उसके फॉर्म-16 से मैच करना चाहिए। इस प्रकार से करदाता अपना सही ढंग से टैक्स रिटर्न भर सकता है।

- PBNS


More Related Posts

Scroll to Top