नंदीग्राम एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति की दशा एवं दिशा तय करने वाला है| नंदीग्राम आंदोलन से निकली तूफान ने 2011 में तीन दशक पुरानी वाम मोर्चा की सरकार को उखाड़ फेंकने एवं ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पदस्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी| आज ठीक एक दशक बाद पश्चिम बंगाल एवं नंदीग्राम उसी मुहाने पर खड़े हैं|
नंदीग्राम आंदोलन को ममता बनर्जी एवं उनके खास सहयोगी शुभेंदु अधिकारी ने मिलकर खड़ा किया था| लेकिन आज दोनों आमने-सामने है| एक तरफ जहां ममता बनर्जी अपनी एक दशक पुरानी सत्ता बचाने की जुगत में है तो दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को सत्ता से उखाड़ फेंकने पर तुले हैं|
नंदीग्राम इस विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बन गया है| यह पूरे चुनाव का केंद्र बिंदु बन गया है| अब यह सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं रहा बल्कि ममता बनर्जी एवं शुभेंदु अधिकारी के लिए व्यक्तिगत लड़ाई बन गया है| नंदीग्राम दोनों के अस्तित्व एवं आत्म सम्मान की लड़ाई बन गया है| यह सुप्रीमेसी की लड़ाई है| जीतने वाला बंगाल का बेताज बादशाह होगा और हारने वाले को इस झटके से निकलना आसान नहीं होगा|
नंदीग्राम की यह लड़ाई इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है| यह वह लड़ाई है जिसके बिना भारत का चुनावी इतिहास लिखा ही नहीं जा सकता| ऐसी चुनावी लड़ाइयां रोज रोज देखने को नहीं मिलती है| यह वैसी ही चुनावी लड़ाई होने जा रही है जैसी रायबरेली में इंदिरा गांधी एवं राज नारायण के बीच हुई थी| ग्वालियर में माधवराव सिंधिया एवं अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हुई थी| बेल्लारी में सोनिया गांधी एवं सुषमा स्वराज के बीच हुई थी| दिल्ली में शीला दीक्षित एवं अरविंद केजरीवाल के बीच हुई थी| और सबसे ताजा चुनावी लड़ाई जो अमेठी में राहुल गांधी एवं स्मृति ईरानी के बीच हुई थी|
अगर आपको चुनावी राजनीति में रुचि है तो आप नंदीग्राम से आंखें हटा ही नहीं सकते| यह लड़ाई इन सभी लड़ाई उसे सबसे ज्यादा तीखा एवं व्यक्तिगत होने जा रहा है| दोनों तरफ से होने वाले हमले एवं रणनीतिक तैयारियां सारी सीमाओं को पार करने वाले है|
दोनों ने एक दूसरे पर जवाबी हमले शुरू भी कर दिए हैं| एक तरफ ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी को सबक सिखाने की बात कर रही है तो शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी पर पश्चिम बंगाल को कश्मीर बनाने का आरोप लगा रहे हैं|
यह तो एक झलक मात्र है| अपनी आंख - कान को नंदीग्राम पर लगाए रहिए| इतिहास बन रहा है|