G20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार 2 मार्च 2023 को नई दिल्ली में हुई। बैठक की शुरुआत में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बैठक में मौजूद अपने सभी समकक्षों से सीरिया और तुर्की में भीषण भूकंप के दौरान मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन धारण करने का आग्रह किया। तत्पश्चात् बैठक में पीएम द्वारा एक वीडियो संदेश दिया गया। पीएम मोदी ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि G20 विदेश मंत्रियों की ये बैठक ठोस उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एक साथ आने की भावना को प्रदर्शित करेगी। पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद और युद्ध जैसी परिस्थितियों से स्पष्ट है कि ग्लोबल गवर्नेंस अपने दोनों मैंडेट में विफल रहा है।''
'2005 से उच्चतम स्तर पर सुधार की भावना व्यक्त की जा रही है'
ग्लोबल गवर्नेंस के इसी मसले को लेकर बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य विश्व संस्थाओं में सुधार की भारत की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया का लोकतंत्रीकरण जरूरी है। विदेश मंत्री ने कहा कि 2005 से उच्चतम स्तर पर सुधार की भावना व्यक्त की जा रही है लेकिन जितनी देर हम इसे टालते रहेंगे उससे बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता उतनी ही क्षीण होती जाएगी।
'संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की संख्या चौगुनी हो गई है'
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक संरचना अपने आठवें दशक में है। इस अवधि में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की संख्या चौगुनी हो गई है। यह आज की राजनीति, अर्थशास्त्र, जनसांख्यिकी या आकांक्षाओं को प्रदर्शित नहीं करता।
'हमारे एजेंडे में खाद्य, उर्वरक और ईंधन सुरक्षा की चुनौतियां शामिल'
विदेश मंत्री ने कहा कि आज की चर्चाओं के हमारे एजेंडे में खाद्य, उर्वरक और ईंधन सुरक्षा की चुनौतियां शामिल हैं। ये वास्तव में विकासशील देशों के लिए अहम मुद्दे हैं। भारत का आग्रह है कि ये मुद्दे G20 किसी भी निर्णय लेने के केंद्र में हों। इसके साथ ही दुनिया को अधिक विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए भी प्रयास करना चाहिए।
'आज एक बार फिर वास्तव में कई संकटों का सामना कर रहे हैं'
विदेश मंत्री ने कहा कि G20 के विदेश मंत्रियों के रूप में, हम इस समय हमारे सामने आने वाली जटिल चुनौतियों का समाधान करने के अपने दृढ़ संकल्प की पुष्टि करते हुए एक सामूहिक संदेश भेज सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम पहली बार वैश्विक संकट के बीच एक साथ आए थे और आज एक बार फिर वास्तव में कई संकटों का सामना कर रहे हैं। इन मुद्दों पर विचार करते हुए, हम सभी हमेशा एक मन के नहीं हो सकते हैं। वास्तव में, राय और विचारों के तीखे मतभेद के कुछ मामले हैं। फिर भी, हमें सामान्य जमीन तलाशनी चाहिए और दिशा प्रदान करनी चाहिए, क्योंकि दुनिया हमसे यही उम्मीद करती है।