विगत कई दशकों से उपेक्षित रहे बुंदेलखंड को अब विकास के पंख लग चुके हैं। नई उड़ान भरने को तैयार उत्तर प्रदेश के इस पिछड़े क्षेत्र के विकास की रफ्तार तेज होने लगी है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों के चलते यहां एक के बाद एक नई परियोजनाओं का आगमन हो रहा है।
यूपी में डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर स्थापित करने की घोषणा के साथ ही बुंदेलखंड की तरक्की के द्वार खुल गये। कारिडोर के लिए जिन 6 जिलों का चयन किया गया था, उसमें दो जिले झांसी और चित्रकूट बुंदेलखंड के हैं। लाकडाउन से पहले हुए डिफेंस एक्सपो में दो दर्जन कंपनियां 50 हजार करोड़ के निवेश के एमओयू पर हस्ताक्षर भी कर चुकी हैं।
बुंदेलखंड तरक्की नहीं कर पा रहा था तो इसके पीछे वहां पानी का अभाव ही प्रमुख था। इसमें संदेह नहीं कि योगीराज्य सरकार ने जनता की इस पीड़ा को समझा और उसे दूर करने का प्रयास किया। योगी सरकार जिस तेजी के साथ बुंदेलखंड को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। साल-दर साल उसके लिए बजट प्रस्ताव कर रही है। वहां एक से बढ़कर एक परियोजनाएं दे रही है, अगर उतनी योजनाओं का भी ठीक से क्रियान्वयन हो जाए तो बुंदेलखंड के विकास को पंख लगते और उसके दिन बहुरते देर नहीं लगेगी।
परियोजनाएं व प्रयास जो बदलेंगी बुंदेलखंड की तस्वीर
• अर्जुन सहायक परियोजना - इस परियोजना के तहत लहचूरा बांध का लोकार्पण जल्द ही होगा। 2600 करोड़ रुपये की लागत वाली धसान नदी पर बनी इस परियोजना से महोबा, हमीरपुर और बांदा जिले के 168 गांवों के किसान लाभान्वित होंगे। डेढ़ लाख किसानों के 15 हजार हैक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी तो चार लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।
• बुंदेलखंड को एक्सप्रेस वे, डिफेंस कॉरिडोर और जल जीवन मिशन जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। डिफेंस कॉरिडोर में बनने वाली तोप और फाइटर प्लेन दुश्मन की छाती पर मूंग दलने का कार्य करेगी। स्थानीय नौजवानों को जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव रोजगार से जोड़ने, संस्थाओं के सीएसआर फंड से स्कूलों का कायाकल्प कराने पर भी सरकार का विशेष ध्यान सहज ही अपनी ओर आकृष्ट करता है।
• रसिन बांध परियोजना एवं चिल्लीमल पंप नहर परियोजना से जहां जल की आपूर्ति होगी वहीं बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के माध्यम से सड़क संपर्क बढ़ेगा तो जल्द ही हवाई सेवा भी शुरू होगी। चित्रकूट को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ने के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है। आने वाले दिनों में दिल्ली की दूरी 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी।
• सरकार की सख्ती के चलते अब यहां के प्राकृतिक संसाधनों का माफिया दोहन नहीं कर पाएंगे। यहां का पैसा यहीं के विकास पर खर्च होगा।
• हाल ही में वैद्यनाथ समूह ने हर्बल प्रोजेक्ट में यहीं के किसानों से माल खरीदने का कार्य किया। किसी की जमीन कब्जा नहीं की बल्कि लोगों को मुनाफा दिया।
• हर जिले में औद्योगिक क्लस्टर विकसित हो रहे हैं, इससे नौजवानों को व्यापक रोजगार मिलेगा।
कुल मिलाकर बुंदेलखंड में 229 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया जा चुका है। इसमें 168 परियोजनाएं लोकार्पण व 61 शिलान्यास की शामिल हैं। बांदा में 17 परियोजनाओं का लोकार्पण, 27 का शिलान्यास, हमीरपुर में 61 का लोकार्पण 20 का शिलान्यास, महोबा में 71 का लोकार्पण छह का शिलान्यास एवं चित्रकूट में 19 का लोकार्पण व आठ का शिलान्यास किया है। अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो बुंदेलखंड को विकसित होते देर नहीं लगेगी।