पद्म अवॉर्ड : बस उन हाथों के हुनर को पहचाना जिसने भारत को तराशा

साधारण लोग, असाधारण काम, पैर में चप्पल नहीं, हाथ में पद्मश्री, इन नजारों ने दुनिया को विवश कर दिया ये सोचने पर कि आज का भारत कैसे अपने जननायकों को नवाजता है, कैसे अपने नायकों को पहचानता है। भारत रत्न के बाद देश के सर्वोच्च सम्मान के रूप में जाने जाने वाले पद्म पुरस्कारों को लेने के लिए राष्ट्रपति भवन में लाल कालीन पर जब ये गुमनाम नायक आगे बढ़े तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया, इन रीयल हीरो की कामयाबियों के आगे कई कीर्तिमान ढह गए। आज इन नायकों को देखकर लोग खुश हैं…

आपको याद होगा कुछ महीने पहले पीएम मोदी ने देशवासियों से ट्विटर पर लोगों से अपील की थी। पीएम ने लोगों से कहा था पद्म पुरस्कारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वालों लोगों का नाम भेजें। आज पीएम की इस अपील का असर दिख रहा है। चलिए जानते हैं वे कौन लोग हैं जिनकी उपलब्धियों का निगहबान पूरा देश बना, राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी में तालियों की गड़गड़ाहट से जिनका स्वागत पूरे देश ने किया…

तुलसी गौड़ा

तुलसी गौड़ा कर्नाटक की आदिवासी महिला हैं। तुलसी ने अपना पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है। वे लगभग 60 सालों से पर्यावरण के लिए काम कर रही हैं। तुलसी के बारे में बताया जाता है कि वे कभी स्कूल नहीं गईं लेकिन पर्यावरण को लेकर उनकी समझ ऐसी है कि उन्हें ‘इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेस्ट’ कहा जाता है। जड़ी-बूटियों की बेहतरीन समझ के कारण तुलसी अपने इलाके में पेड़-पौधों को लगाकर लोगों का बीमारियों से भी बचाव कर रही हैं। तुलसी सादगी की मूर्ति हैं। वे जब सम्मान लेने आईं तो बहुत ही साधारण लिबास में आईं। गले में आदिवासी प्रतीकों से जुड़ी कुछ मालाएं धारण की हुईं तुलसी नंगे पैर मंच तक पहुंची। तुलसी की इस सादगी को देख पूरा भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

 ऊषा चौमर

कभी मल उठाने का काम करने वाली राजस्थान के अलवर जिले की ऊषा चौमर का आज जगह-जगह स्वागत हो रहा है। वे लोगों के लिए आदर्श हैं। ऊषा चौमर लोगों को यह संदेश देना चाहती हैं कि महिलाओं को शिक्षा में बढ़ावा मिले। उन्हें पहले सफाईगिरी अवॉर्ड भी मिल चुका है।ऊषा चौमर का मैला ढोने जैसी कुप्रथा से संघर्ष ने लाखों-करोड़ों को प्रभावित किया। यही कारण है कि आज वे लोगों के लिए मिसाल हैं।राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ऊषा चौमर को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया है।

 हरेकला हजब्बा

हरेकला हजब्बा को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री से सम्मानित किया है।कर्नाटक के मैंगलोर के हरकेला एक फल विक्रेता हैं। हरकेला ने कोई स्कूली शिक्षा नहीं पाई, पर फल बेचकर एक प्राथमिक विद्यालय बनाया और ग्रामीण शिक्षा में अभूतपूर्व क्रांति लाई। आज उनके विद्यालय में 175 बच्चे पढ़ाई करते हैं। हरकेला की उपलब्धियों का बखान करते आज लोग नहीं थक रहे।हरेकला हजब्बा पुरस्कार में मिली राशि को भी अपने गांव में और अधिक स्कूलों के निर्माण में लगाना चाहते हैं।

 राहीबाई सोमा

जैविक खेती के क्षेत्र में राहीबाई ने एक मिसाल कायम की है। यही कारण है कि राहीबाई से प्रभावित होकर देश के कृषि वैज्ञानिक भी उनका लोहा मानते हैं। राहीबाई को लोग ‘सीड मदर’ के नाम से भी जानते हैं। राहीबाई महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की रहने वाली हैं। वे देसी फसलों की खेती करती हैं। लगभग बीस साल पहले राहीबाई ने बीजों को इकट्ठा करना शुरू किया। आज राहीबाई नारी सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल हैं।

 पद्म सम्मान के इस वर्तमान परंपरा ने न गरीब देखा, न अमीर, न ऊंच देखा, न नीच, बस उन हाथों के हुनर को पहचाना जिसने भारत को तराशा, जिसने भारतीयों को तराशा और जनमानस में एक मिसाल कायम की, जिसका हर भारतीय कायल है।

 


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