शुक्रवार को 71वें संविधान दिवस के अवसर पर संसद में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जम कर हमला बोला। नेशन फर्स्ट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक हित के कारण देशहित पीछे छूट गया है।
मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में राजनीतिक दरार की ओर इशारा करते हुए कहा की, 'नागरिकों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए हमारे वीर जवानों ने मुंबई हमले के आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए अपना बलिदान है। संविधान बनाते वक्त देशहित सबसे ऊपर था। अनेक बोलियों, पंथ और राजे-रजवाड़ों को संविधान के जरिए एक बंधन में बांधा गया। इसका मकसद था कि ऐसा करके देश को आगे बढ़ाया जाए। आज शायद हम संविधान का एक पेज भी पूरा न लिख पाते, क्योंकि राजनीति के चलते नेशन फर्स्ट और देशहित पीछे छूट जाता है।'
राजनीतिक दलों में परिवारवाद को प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताया। किसी दल का नाम लिए बिना उन्होंने कहा की 'देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक जाइए। भारत एक संकट की तरफ बढ़ रहा है और वो है पारिवारिक पार्टियां। पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाई द फैमिली... और अब आगे कहने की जरूरत नहीं लगती है। ये लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। संविधान हमें जो कहता है, यह उसके विपरीत है। जब मैं कहता हूं कि पारिवारिक पार्टियां, तो मैं ये नहीं कहता कि परिवार के एक से ज्यादा लोग राजनीति में न आएं। योग्यता के आधार पर और जनता के आशीर्वाद से आएं। जो पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार चलाता रहे, वो लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा संकट होता है।'
प्रधानमंत्री का यह बयान कांग्रेस एवं गाँधी परिवार के साथ-साथ, अखिलेश यादव, लालू यादव, फारुक अब्दुलाह, महबूबा मुफ़्ती, उद्धव ठाकरे, के चंद्रशेखर राव, एम के स्टालिन जैसों पर सीधा हमला है।
संविधान के बहाने प्रधानमंत्री भर्ष्टाचार के मुद्दे पर भी विपक्ष पर जबरदस्त हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा, 'क्या हमारा संविधान इसकी इजाजत देता है। कानून है, व्यवस्था है, लेकिन समस्या तब होती है जब भ्रष्टाचार के लिए किसी को न्यायपालिका ने सजा दे दी हो और राजनीति के कारण उनका महिमामंडन चलता रहे। जब राजनीतिक लाभ के लिए लोकलाज छोड़कर, मर्यादा छोड़कर उनका साथ दिया जाता है, तो लोगों को लगता है कि भ्रष्टाचार की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। उन्हें भी लगता है कि भ्रष्टाचार में चलना गलत नहीं है। भ्रष्टाचार के कारण गुनाह सिद्ध हुआ है तो सुधरने का मौका दिया जाए, लेकिन सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठा देने की प्रतिस्पर्धा चल रही है, वह नए लोगों को लूटने के रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित करती है।' प्रधानमंत्री का यह बयान परोक्ष रूप से चारा घोटाला में सजायाप्ता लालू यादव ओम प्रकाश चौटाला एवं उनसे मिलने वाले विपक्षी नेताओं पर हमला है।
कर्तव्य एवं अधिकारों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज जरूरी है कि हम कर्तव्य के माध्यम से अधिकारों की रक्षा के रास्ते पर चलें। कर्तव्य वो पथ है जो अधिकार को सम्मान के साथ दूसरों को देता है। आज हमारे भीतर भी यही भाव जागे कि हम कर्तव्य पथ पर चलें। इसे जितनी ज्यादा मात्रा में निष्ठा से मानाएंगे, उससे सभी के अधिकारों की रक्षा होगी। यह कार्यक्रम किसी राजनैतिक दल का नहीं था। किसी प्रधानमंत्री का नहीं था। यह कार्यक्रम स्पीकर पद की गरिमा थी। हम संविधान की गरिमा बनाए रखें। हम कर्त्तव्य पथ पर चलते रहें।'