वित्त मंत्री की अध्यक्षता में प्री-बजट बैठकें शुरू, जानें बजट की पूरी प्रोसेस

Budget 2023-24: अगले वित्त वर्ष के बजट 2023-24 के लिए तैयारियां शुरू हो रही हैं। इसी के तहत 21 नवंबर (सोमवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट-पूर्व बैठकें शुरू कर दी हैं। वित्त मंत्री की पहले दिन की मीटिंग उद्योग जगत के जानकारों और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री के साथ जलवायु परिवर्तन (CLimate Change) क्षेत्र के एक्सपर्ट्स के साथ हुई।

वित्त मंत्री लेंगी सुझाव

वित्त मंत्रालय की ओर से कल ट्वीट करके ये जानकारी दी गई है कि ये बैठकें वर्चुअल तरीके से होंगी और इनमें हितधारक 2023-24 के बजट के लिए सुझाव देंगे। प्री-बजट बैठकों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बिजनेस चैंबर, कृषि क्षेत्र के साथ एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों, फाइनेंशियल सेक्टर और कैपिटल मार्केट्स, सर्विसेज और ट्रेड के अलावा सोशल सेक्टर, ट्रेड यूनियनों और लेबर आर्गनाईजेशन के अलावा अर्थशात्रियों के साथ बैठक में उनके सुझाव लेंगी।

CII ने टैक्स रेट में कटौती की सिफारिश की

कंफेडरेशन ऑफ इंडिया इंडस्ट्री (CII) ने प्री बजट मीटिंग से पहले इनकम टैक्स की दरों में कमी का प्रस्ताव रखा है। इससे लगभग 5.83 करोड़ इंडिविजुअल्स को फायदा हो सकता है। इन लोगों ने असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया था। CII ने कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर सबसे ज्यादा 28% GST स्लैब में कटौती का भी प्रस्ताव दिया है।

जानें बजट की पूरी प्रोसेस

1. सबसे पहले वित्त मंत्रालय एक सर्कुलर जारी कर सभी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, स्वायत्त संस्थाओं को नए साल के लिए एस्टीमेट बनाने के लिए कहता है। उन्हें नए साल के लिए अनुमान देने के अलावा पिछले साल की खर्च और आमदनी का ब्योरा भी देना होता है। बजट सर्कुलर 2023-24 में कहा गया है ‘बजट आवंटन केवल उन योजनाओं के लिए किया जाएगा जो व्यय विभाग (डीओई) द्वारा अनुमोदित, अनुमानित प्रतिबद्ध देनदारियां (ईसीएल) मॉड्यूल में दर्ज हैं।’

2. एस्टीमेट मिलने के बाद केंद्र सरकार के अधिकारी उसकी पड़ताल करते हैं। इस पर संबंधित मंत्रालयों और व्यय विभाग के अधिकारियों की गहन चर्चा होती है। इसके बाद आंकड़ों को सिफारिशों के साथ वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है।

3. केन्द्रीय वित्त मंत्रालय सभी सिफारिशों पर गौर करने के बाद विभागों को उनके खर्च के लिए राजस्व का आवंटन करता है। राजस्व और आर्थिक मामलों का विभाग हालात को गहराई से समझने के लिए किसानों और छोटे कारोबारियों के प्रतिनिधियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों से संपर्क करता है।

4. प्री-बजट मीटिंग में वित्त मंत्री संबंधित पक्षों के प्रस्ताव और मांगों को जानने के लिए उनसे मिलते हैं। इनमें राज्यों के प्रतिनिधि, बैंकर, कृषि विज्ञानी, अर्थशास्त्री और कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। प्री-बजट मीटिंग खत्म होने के बाद वित्त मंत्री सभी मांगों पर अंतिम फैसला लेते हैं। बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से भी बात करते हैं।

5. बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी आयोजित होती है। इसी के साथ बजट की छपाई प्रक्रिया शुरू होती है। बजट प्रक्रिया में लगे अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहते हैं। बता दें वित्त वर्ष 2022-23 के बजट की प्रिंटिंग नहीं हुई और संसद सदस्यों को उसकी सॉफ्ट कॉपी दी गई।

एक फरवरी को पेश होगा केंद्रीय बजट

वित्त वर्ष 2023-24 का केंद्रीय बजट (India Budget) संसद में एक फरवरी, 2023 को पेश किया जाएगा। बता दें कि भारत का केंद्रीय बजट कई विभागों के आपसी विचार-विमर्श के बाद तैयार किया जाता है. इसमें वित्त मंत्रालय, नीति आयोग समेत सरकार के कई अन्य मंत्रालय भी शामिल होते हैं। वित्त मंत्रालय खर्च के आधार पर गाइडलाइन जारी करता है और इस पर मंत्रालयों द्वारा अपनी ओर से फंड की मांग बताई जाती है।

आपको बता दें यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पांचवां बजट और अप्रैल-मई 2024 में होने वाले आम चुनावों से पहले यह आखिरी पूर्ण बजट होगा। चुनावी साल में सरकार सीमित अवधि के लिए लेखानुदान पेश करती है। उसके बाद बजट जुलाई में पेश किया जाता है।

केन्द्र सरकार ने बदली बजट परंपरा

वित्त वर्ष 2023-24 का बजट एक फरवरी 2023 को पेश किए जाने की उम्मीद है। और नए संसद भवन में पहला बजट होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने फरवरी के अंत में बजट पेश करने की अंग्रेजों के जमाने की परंपरा को खत्म कर दिया था। तब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार 1 फरवरी, 2017 को बजट पेश किया था। इससे विभिन्न मंत्रालयों को अप्रैल में वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही फंड आवंटित कर दिया जाता है। साथ ही इससे कंपनियों को भी अपना बिजनेस और टैक्सेशन प्लान बनाने के लिए समय मिल जाता है।

 


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