प्रधानमंत्री मोदी ने ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन’ की स्थापना की घोषणा की, जानिए क्या है?

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का नया वैश्विक केंद्र बनाने के लिए रविवार को लाल किले से राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन National Hydrogen Mission की स्थापना की घोषणा की। इसी के साथ उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य भी तय किया।

2047 तक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत हर साल 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करता है। इसलिए भारत को यह संकल्प लेना होगा कि देश की आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले भारत को एनर्जी इंडिपेंडेंट बनाएंगे। इसका मतलब है कि आजादी के 100 साल पूरे होने यानि अगले 25 वर्षों में देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा।

इसके लिए भारत का रोडमैप बेहद स्पष्ट

मोदी ने कहा कि इसके लिए हमारा रोडमैप बहुत ही स्पष्ट है। उन्होंने कहा इसके लिए देश को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाना होगा। सीएनजी-पीएनजी का नेटवर्क हो, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट हो, भारत इस दिशा में एक तय लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ भी कदम बढ़ाया है और रेलवे के शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन के काम में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट जीरो कार्बन इमिटर बनने का लक्ष्य रखा है। इन सारे प्रयासों के साथ ही देश ‘मिशन सर्कुलर इकोनॉमी’ पर भी बल दे रहा है।

इस दशक के अंत तक रिन्यूएबल एनर्जी के 450 गीगावॉट का लक्ष्य किया तय

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी इसका एक बड़ा उदाहरण है। आज जी-20 देशों के समूह में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो अपने क्लाइमेट गोल्स को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत ने इस दशक के अंत तक रिन्यूएबल एनर्जी के 450 गीगावाट (GW) का लक्ष्य तय किया है। इसमें से 100 गीगावाट (GW) के लक्ष्य को भारत ने तय समय से पहले प्राप्त भी कर लिया है। हमारे ये प्रयास दुनिया को भी एक भरोसा दे रहे हैं। ग्लोबल स्टेज पर ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ इसका बड़ा उदाहरण है।

बताना चाहेंगे कि बिजली व ऊर्जा क्षेत्र बुनियादी ढांचा क्षेत्र के सबसे बड़े घटक हैं। प्रत्येक दिन भारत एक स्थायी राष्ट्र बनाने और आर्थिक विकास की राह में आगे बढ़ने, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार और इसके साथ-साथ ऊर्जा तक पहुंच में सुधार के परिकल्पित लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब पहुंच रहा है। वहीं हरित ऊर्जा यानि ग्रीन एनर्जी के लिए भारत के प्रयास लगातार जारी हैं। देश ने फिलहाल कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता में 100 गीगावाट (GW) का मील का पत्थर पार कर लिया है। इसलिए यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इससे देश में हरित ऊर्जा प्रक्षेपवक्र में तेजी आई है क्योंकि भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता अब 383.73 गीगावॉट हो गई है। इसके अतिरिक्त भारत एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर है- जो वर्ष 2022 के अंत तक 175 GW अक्षय ऊर्जा की क्षमता प्राप्त करने, और 2030 तक 450 GW तक उसे विस्तारित करने पर पूरा होगा। बता दें, अक्षय ऊर्जा में यह अब तक दुनिया की सबसे बड़ी विस्तार योजना है।

भारत को क्वांटम जंप देने वाला है ‘ग्रीन हाइड्रोजन का क्षेत्र’

उन्होंने कहा, “भारत आज जो भी कार्य कर रहा है, उसमें सबसे बड़ा लक्ष्य है, जो भारत को क्वांटम जंप देने वाला है- वह है ग्रीन हाइड्रोजन का क्षेत्र। मैं आज तिरंगे की साक्षी में ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन’ की घोषणा कर रहा हूं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा सबसे पहले इस साल फरवरी में पेश 2021-22 के बजट में की गयी थी। वर्तमान में देश में जो भी हाइड्रोजन की खपत होती है, वह जीवाश्म ईंधन से आती है।

क्या है हाइड्रोजन ?

आवर्त सारणी पर हाइड्रोजन पहला और सबसे हल्का तत्त्व है। चूंकि हाइड्रोजन का वजन हवा से भी कम होता है, अतः यह वायुमंडल में ऊपर की ओर उठती है। इसलिए यह शुद्ध रूप में बहुत कम ही पाई जाती है। मानक तापमान और दबाव पर हाइड्रोजन एक गैर-विषाक्त, अधातु, गंधहीन, स्वादहीन, रंगहीन और अत्यधिक ज्वलनशील द्विपरमाणुक गैस है। ऑक्सीजन के साथ दहन के दौरान हाइड्रोजन ईंधन एक शून्य-उत्सर्जन ईंधन है। इसका उपयोग फ्यूल सेल या आंतरिक दहन इंजन में किया जा सकता है। यह अंतरिक्ष यान प्रणोदन के लिए ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ क्या है?

पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी-21) के 21वें सत्र के दौरान 121 सदस्य देशों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और सौर ऊर्जा संयंत्रों की तैनाती के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का निवेश जुटाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद द्वारा नवंबर 2015 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) किया गया। बता दें, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, ऐसे सौर संसाधन संपन्न देशों का एक गठबंधन है, जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित है। इस गठबंधन का उद्देश्य सौर ऊर्जा अनुप्रयोगों को बढ़ाना, स्वैच्छिक आधार पर शुरू किए गए कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से समन्वित कार्रवाई करना और सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास गतिविधियों को सुविधाजनक बनाना है।

 


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