प्रधानमंत्री मोदी के सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, देश बढ़ रहा है एक टीम की तरह

पीएम मोदी एक इंटरव्यू में कहते हैं कि, ‘मेरी सबसे बड़ी ताकत जो है टीम फॉर्मेशन में है। और मैं फेडरल स्ट्रक्चर को लेटरल स्पिरिट और विद लुब्रिकेटेड एटीट्यूड, मैं सीएम और पीएम की एक टीम की कल्पना करता हूँ। स्टेट और सेंटर सहकर्मी हैं, प्रतियोगी नहीं हैं। को-ऑपरैटिव पॉलिटिक्स होनी चाहिए, को-ऑपरैटिव एजेंडा होना चाहिए। ये रूप बदलने की जरूरत है।’ पीएम मोदी ने जो कहा वो सिर्फ शब्द नहीं थे बल्कि एहसास था उन 13 सालों का जो उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए महसूस किया। 2014 में भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पीएम मोदी ने संविधान की संघीय सोच को सही मायनों में जमीन पर उतारने का जतन किया और बना दी ‘टीम इंडिया’। एक ऐसी टीम हो खुद को दाता या भगवान न समझे बल्कि मिलकर साथ चलने की प्रेरणा बने। वो टीम जिसमें केंद्र और राज्य बराबर के भागीदार हों और आगे बढ़ने के लिए हाथ बढ़ाये।

क्या है ‘टीम इंडिया’

प्रधानमंत्री ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि तीन टीमें मिलकर टीम इंडिया बनाती हैं। पहली टीम है प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, दूसरी है प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल और तीसरी टीम है प्रधानमंत्री और उच्चाधिकारी। उन्होंने कहा कि इसी टीम इंडिया को योजना आयोग के बदले स्वरूप में भी परिलक्षित होना चाहिए। नई प्रस्तावित संस्था का मुख्य ज़ोर मिलकर काम करने वाले संघीय ढांचे पर होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना आयोग की परिकल्पना 1950 में तब हुई थी जब नियंत्रित अर्थव्यवस्था हुआ करती थी लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इसलिए योजना आयोग की भूमिका, महत्व और पुनर्गठन में नयापन महसूस होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल 2014 के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में योजना आयोग के बदले हुए रूप की बात की थी। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आमतौर पर सभी ने यह राय जताई कि योजना आयोग के स्वरूप में बदलाव होना चाहिए और इसमें केंद्र, राज्य के साथ ही विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।

योजना आयोग की जगह आया नीति आयोग

नीति आयोग, योजना आयोग के विपरीत, नीति आयोग, एक थिंक टैंक या मंच के तौर पर अधिक काम करेगा। योजना आयोग, पंचवर्षीय योजना बनाता था और आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए संसाधनों का आवंटन करता था। नीति आयोग में भारत के 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के नेता होंगे। लेकिन इसके पूर्ण कालिक कर्मचारी– एक उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विशेषज्ञ– 64 वर्षीय प्रधानमंत्री को सीधे रिपोर्ट करते हैं। जो कि इसके अध्यक्ष होंगें। यह योजना आयोग से अलग है क्योंकि यह राष्ट्रीय विकास परिषद को रिपोर्ट किया करता था। नीति आयोग और योजना आयोग के बीच योजना के दृष्टिकोण में प्रमुख अंतर यह है कि, नीति आयोग राज्यों की भागीदारी को बढ़ाएगा जबकि योजना आयोग एक ही आकार में सभी के फिट आ जाने वाले टॉप– डाउन अप्रोच को अपनाता था।

क्यों थी बदलने की जरूरत

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में घोषणा की थी कि योजना आयोग की जगह पर एक नई संस्था बनाई जाएगी। जो समकालीन आर्थिक दुनिया के अनुरूप हो। मुख्यमंत्रियों को सात दिसंबर को संबोधित करते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का हवाला दिया था। जिन्होंने पिछले साल 30 अप्रैल को कहा था कि सुधार प्रक्रिया शुरू होने के बाद के दौर में मौजूदा ढांचे का कोई अत्याधुनिक नजरिया नहीं है। उन्होंने ऐसे प्रभावी ढांचे की बात की थी जिससे ‘सहयोगी संघ’ और ‘टीम इंडिया’ की अवधारणा मजबूत होती हो। नीति आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) का इस्तेमाल करना और शिक्षा, कौशल विकास को बढाकर, लैंगिक असमानता को समाप्त कर यहां के युवाओं, पुरुषों एवं महिलाओं को सक्षम बनाकर रोजगार-परक शिक्षा देना है। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद संसाधनों का आवंटन करनेवाली पंचवर्षीय योजना अप्रासंगिक हो गई, क्योंकि बाकी बचेसंसाधन निजी क्षेत्र को दिए जानेलगे। आधुनिक भारत में पांच साल के लिए योजना तैयार करना आदिकालीन कदम ही कहलाएगा। आयोग के एक सलाहकार का कहना है, ‘‘जब फ्लि पकार्ट की वैल्यूएक साल में 1 अरब डॉलर से 7 अरब डॉलर हो सकती है तो पांच साल का आर्थिक लक्ष्य रखनेऔर आकलन का क्या तुक?’’ दूसरी बात यह है कि जब योजना आयोग की स्थापना हुई तब से अब तक सरकारी दखल का तरीका एकदम बदल चुका है। अपनेअस्तित्व के पहले19 साल में योजना आयोग ने देश के विकास का नजरिया बनाया और हर राज्य को अपने विवेक से फंड उपलब्ध करवाए। लेकिन वह दौर एकदम अलग था-लगभग सारे राज्यों में कांग्रेस का ही शासन था और हाल में स्वतंत्र हुए देश को जवाहरलाल नेहरू के विकास नजरिए में भरोसा था। लेकिन 1967 तक यह स्पष्ट हो चुका था कि इसे बंद ही किया जाना चाहिए।

इज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत ने लगाई लंबी छलांग

इन्हीं सब नीतियों का नतीजा है कि कि भारत अब तेजी से बिजनस करने के लिए सुगम स्थान के ररों में पहचान बना रहा है। भारत ने विश्व बैंक की व्यावसायिक सुगम्यता (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) रिपोर्ट 2020 में शानदार छलांग लगाई। भारत 14 रैंकों की छलांग लगाते हुए 190 देशों में 63वें रैंक पर पहुंच गया है। 2019 में भारत का स्थान 77वां था। भारत ने 10 में से 7 संकेतकों में सुधार किया है और अंतर्राष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यवहारों के निकट पहुंच गया है। विश्व बैंक की 2020 की रिपोर्ट में भारत को व्यावसायिक सुगम्यता में सुधार करने वाले 10 शीर्ष देशों में माना गया है और भारत ने यह सुधार लगातार तीसरी बार किया है। तीन वर्षों में भारत ने 67 रैंकों की सुधार की है। 2011 से लेकर अभी तक किसी बड़े देश द्वारा लगाई गई यह सबसे ऊंची छलांग है।

स्टार्टअप इंडिया – भारत को नवाचार में वैश्विक नेतृत्व दिया

स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 21,778 स्टार्टअप को मान्यता दी गई है। इनमें से 2,912 स्टार्टअप को एक जून, 2019 से मान्यता मिली है। स्टार्टअप इंडिया हब में पंजीकृत यूजरों की संख्या 3,42,614 है। इसमें 21,540 यूजर्स एक जून, 2019 से जोड़े गए हैं। एक अगस्त, 2019 को आयकर कानून के अनुच्छेद 54 जीबी में किए गए संशोधन के साथ स्टार्टअप में न्यूनतम 50 प्रतिशत शेयर पूंजी रखने या वोटिंग राइट की शर्त में छूट देकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2019

कुल लॉजिस्टिक्स लागत को देश के जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत पर लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की जा रही है। नीति का उद्देश्य व्यवसाय स्पर्धा को प्रोत्साहित करना, आर्थिक विकास में तेजी लाना और भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनाना है।बहु-मॉडल वस्तु परिवहन विधेयक, 2019 को मंजूरी के लिए अंतिम रूप दे दिया गया है। विधेयक का उद्देश्य निर्यात, आयात और घरेलू व्यापार के लिए वस्तुओं की आवाजाही में सहायता देना है। इससे दायित्व निर्धारित करने और इसके प्रावधानों के उल्लंघन के लिए देनदारियां तय करने में मदद मिलेगी।

 


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