पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन का राजनीतिक वनवास आखिरकार खत्म हो गया है|
शनिवार को भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार विधान परिषद के लिए होने वाले उपचुनाव में पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया| यह सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के त्यागपत्र देने के कारण खाली हुई थी| मालूम हो कि राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद सुशील कुमार मोदी ने बिहार विधान परिषद से त्यागपत्र दे दिया था|
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बहुत जल्द अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने वाले हैं| राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शाहनवाज हुसैन को भी नीतीश सरकार में मंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है| सुशिल कुमार मोदी के दिल्ली जाने के बाद बिहार सरकार में भाजपा का कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा है जिसकी बड़ी पहचान हो|
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सबसे कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने वाले सैयद शाहनवाज हुसैन 2014 का लोकसभा चुनाव भागलपुर से हार गए थे| लेकिन उनका राजनीतिक वनवास शुरू हुआ 2015 में जब पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उनसे नाराज हो गया|
दरअसल 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नीतीश कुमार एवं लालू यादव की जोड़ी के खिलाफ पूरी ताकत लगा दी थी| पार्टी नेतृत्व चाहता था कि शाहनवाज हुसैन बिहार विधानसभा का चुनाव लड़े| लेकिन शाहनवाज हुसैन विधानसभा का चुनाव लड़ना नहीं चाह रहे थे| कहा जाता है कि वह राज्यसभा जाना चाहते थे|
पार्टी नेतृत्व को शाहनवाज हुसैन का विधानसभा चुनाव न लड़ने का निर्णय नागवार गुजरा| उसके बाद लंबे समय तक पार्टी ने शाहनवाज हुसैन को दरकिनार कर दिया| यहां तक की 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया| संगठन में भी वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें सिर्फ प्रवक्ता बनाया गया| शाहनवाज हुसैन ने अपना धैर्य बनाए रखा और पार्टी द्वारा दिए गए दायित्वों का निर्वहन करते रहे|
2020 के अंत में हुए जम्मू एवं कश्मीर में हुए डीडीसी चुनाव में पार्टी ने केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर को चुनाव प्रभारी एवं शाहनवाज हुसैन को सहप्रभारी बनाया| अनुराग ठाकुर से वरिष्ठ होने के बावजूद शाहनवाज हुसैन ने उनके साथ मिलकर काम किया तथा पार्टी को अच्छी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| पहली बार भाजपा कश्मीर क्षेत्र में अपना खाता खोलने में सफल हुई|
अंततः शाहनवाज हुसैन को उनके धैर्य एवं मेहनत का पुरस्कार मिला और भाजपा ने उन्हें बिहार विधान परिषद् का सदस्य यानि एमएलसी बनाने का निर्णय लिया| और बहुत जल्द वह बिहार सरकार में मंत्री भी बनेंगे ऐसी पूरी संभावना जताई जा रही है|