चार राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों के धुआंधार प्रचार में सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है| एक तरफ चाहें भारतीय जनता पार्टी हो, तृणमूल कांग्रेस हो, डीएमके हो, या एआईएडीएमके हो सभी पार्टियाँ एक-एक वोट को अपनी तरफ करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं| दिन रात एक किए हुए हैं| वही कांग्रेस पार्टी के पूर्व एवं भावी अध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिकी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों एवं थिंक टैंक से जुड़े लोगों को इंटरव्यू देने में व्यस्त हैं|
इसी तरह का एक इंटरव्यू राहुल गांधी ने शुक्रवार को भी दिया, जिसमें उन्होंने इस बात पर निराशा जाहिर की कि आखिर लोकतांत्रिक मूल्यों का रक्षक अमेरिका भारत के वर्तमान परिस्थिति में हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा है| वह मूकदर्शक क्यों बन हुआ है?
सुनकर शायद विश्वास न हो कि देश की सबसे बड़ी पार्टी का पूर्व एवं भावी अध्यक्ष और भारत के प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहा व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है? वह किसी दुसरे देश से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की वकालत कैसे कर सकता है? लेकिन यही सच्चाई है और यही देश का दुर्भाग्य है|
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस जो सबको जयचंद होने का सर्टिफिकेट बैठती रहती है, उसी का पूर्व अध्यक्ष अमेरिका के एक प्रोफेसर से कहता है कि अमेरिका अपने मूल्यों की रक्षा नहीं कर रहा है| भारत में लोकतंत्र नहीं है| वह भारत के मामले में मुकदर्शक क्यों है| भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा है? ऐसी परिस्थितियों में वह (कांग्रेस) चुनाव कैसे जीत सकते हैं?
शुक्रवार को हॉवर्ड कैनेडी स्कूल (Harvard Kennedy School) के प्रोफेसर एवं पूर्व राजनयिक एंबेसडर निकोलस बर्न (Ambassador Nicholas Burn) से बातचीत में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि भारत के ढांचागत सभी संस्थाओं पर सत्तारूढ़ दल का कब्जा है, वित्तीय एवं मीडिया संस्थानों पर भाजपा का पूर्ण नियंत्रण है, ऐसी परिस्थितियों में कांग्रेसी ही नहीं समाजवादी पार्टी, NCP, बीएसपी कोई भी चुनाव नहीं जीत पा रहा है|
राहुल गाँधी ने कहा की, चुनाव लड़ने के लिए मुझे ढांचागत संरचना चाहिए, ऐसी न्यायिक व्यवस्था चाहिए जो मेरी रक्षा करें, स्वतंत्र मीडिया चाहिए, वित्तीय संस्थओं से सहयोग में बराबरी चाहिए|
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें ऐसे ढांचागत संस्थानों के पूर्ण समूह का सहयोग चाहिए ताकि वह अपनी पार्टी को चला सके| लेकिन उनके पास वह नहीं है|
India’s aspiring PM. Begging America to come and interfere in our nation’s affairs. pic.twitter.com/S5CSNvYqWD
— Abhijit Majumder (@abhijitmajumder) April 2, 2021
राहुल गांधी ने निकोलस बर्न से कहा कि भारत में जो कुछ भी हो रहा है अमेरिका उसमे हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा? अमेरिकी प्रशासन मौन क्यों है? आइडिया ऑफ अमेरिका की याद दिलाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि लोकतंत्र एवं व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा अमेरिकी संविधान की मूल ताकत है और आपका (अमेरिका का) उसमे विश्वास है तो भारत के बारे में अमेरिका की क्या राय है? भारत में लोकतंत्र को लेकर अमेरिका चुप क्यों है? भारत में अमेरिकी प्रशासन का हस्तक्षेप दिखाई क्यों नही देता?