विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है तमिलनाडु की राजनीति| पिछले 4 दशक में तमिलनाडु विधानसभा का यह पहला चुनाव है जब प्रदेश की राजनीति के दोनों शिखर पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि एवं पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता इस दुनिया में नहीं है|
विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले जब पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी सहयोगी वी के शशिकला जेल से रिहा हुई तो ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि चिन्मा यानी शशिकला के जेल से रिहा होकर चेन्नई पहुंचने पर तमिलनाडु की राजनीति विशेषकर सत्तारूढ़ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एआईएडीएमके (AIADMK) में उत्तल पुथल हो सकती है|
एआईएडीएमके की पूर्व महासचिव शशिकला ने रिहा होने के बाद कुछ राजनीतिक बयान भी दिया था| लेकिन दो दिन बाद अचानक राजनीति से न सिर्फ संन्यास लेने की घोषणा कर दी बल्कि एआईएडीएमके के सभी गुटों को एकजुट होने की अपील कर दी| पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का हवाला देकर एआईएडीएमके के कैडर से अपील की कि वे एकजुट होकर विपक्षी डीएमके (DMK) की हार सुनिश्चित करें| शशिकला ने कहा कि डीएमके को सत्ता में आने से रोकना पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी|
शशिकला के बयान के बाद उनके भतीजे और एआईएडीएमके से अलग होकर एएमएमके (AMMK) बनाने वाले टीटीवी दिनाकरण ने नरमी दिखाते हुए संकेत दिया कि एआईएडीएमके एवं एएमएमके के एक साथ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है|
तमिलनाडु की राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शशिकला के इस अप्रत्याशित निर्णय के पीछे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का हाथ है| बताया जाता है कि भाजपा नहीं चाहती थी कि एआईएडीएमके का वोट बटे और डीएमके को उसका फायदा हो| शशिकला के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान विपक्षी डीएमके को ही होगा|
भारतीय जनता पार्टी इसबार हर हाल में तमिलनाडु में अपना खाता खोलना चाह रही है| भाजपा एवं एआईएडीएमके गठबंधन में किसी तरह की दिक्कत दिखाई नहीं दे रहा है| दोनों दलों के बीच काफी अच्छा तालमेल बना हुआ है| भाजपा नेतृत्व का मुख्यमंत्री के पलानिस्वामी एवं उपमुख्यमंत्री ओ पनीर शिलवम से काफी अच्छा तालमेल है| प्रधानमंत्री मोदी भी लगातार अपने आपको एवं भाजपा को तमिल संस्कृति से जोड़ने की कोशिश करते रहे है|
तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में अब तक कोई प्रभाव नहीं रखने वाली भाजपा धीरे-धीरे अपने एजेंडे को एआईएडीएमके के जरिए लागू कर रही है| इसकी एक झलक उस वक्त देखने को मिली जब एआईएडीएमके ने विपक्षी डीएमके को एंटी हिंदू यानी हिंदू विरोधी पार्टी करार दिया| यह पहला मौका है जब तमिलनाडु की राजनीति में खुलकर हिंदू हितों की बात कही जा रही है|
पिछले कुछ समय से तमिलनाडु की राजनीति भारी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है| आने वाले दिनों में यह परिवर्तन और अस्पष्टता से दिखाई देने लगेगा|