केंद्रीय कपड़ा, वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगले तीन वर्षों में वस्त्रों के निर्यात में पांच गुना वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। जी हां, शुक्रवार को दिल्ली में भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (ITTA) के प्रतिनिधियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समय भारत के लिए उन वर्षों में तकनीकी वस्त्रों के अपने वार्षिक निर्यात को पांच गुना बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करने का है।
टेक्सटाइल सेगमेंट ने 5 वर्षों में गति की हासिल
दिल्ली में भारतीय तकनीकी वस्त्र संघ (ITTA) के प्रतिनिधियों से बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि तकनीकी टेक्सटाइल सेगमेंट ने पिछले 5 वर्षों में गति प्राप्त की है और वर्तमान में प्रति वर्ष 8% की दर से बढ़ रहा है। गोयल ने कहा, “हमारा लक्ष्य अगले 5 वर्षों में इस वार्षिक विकास दर को 15-20% तक तेज करना है।”
राज्यों में कपड़ा क्षेत्र के लिए PLI का समर्थन करेगी केंद्र सरकार
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार राज्यों में कपड़ा क्षेत्र के लिए PLI का समर्थन करेगी और कपड़ा निर्माण के लिए सस्ती जमीन और बिजली जैसे सस्ते बुनियादी ढांचे की पेशकश करेगा। आगे जोड़ते हुए केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि हमें वस्त्र निर्माण में सर्वोत्तम मानकों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।
तकनीकी वस्त्रों में अनुसंधान और विकास के लिए दिया सुझाव
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए वस्त्र की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तकनीकी वस्त्रों में अनुसंधान और विकास के लिए सरकारी धन के उपयोग में सार्वजनिक निजी भागीदारी का सुझाव दिया।
वर्तमान विश्व बाजार में भारत की कुल हिस्सेदारी
गोयल ने कहा कि वर्तमान विश्व बाजार 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर (18 लाख करोड़) का है और इसमें भारत की हिस्सेदारी 19 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारत इस बाजार में 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर (8 प्रतिशत हिस्सेदारी) के साथ एक महत्वाकांक्षी खिलाड़ी है।
ये रहा पुराना रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारत से कपड़ा और संबंधित उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2011 में सिर्फ 30.4 बिलियन डॉलर था, जो एक साल पहले कोविड संकट के कारण 10% कम था। इस वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों में, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में मजबूत आर्थिक सुधार से सहायता प्राप्त, इस तरह के निर्यात 87% साल-दर-साल बढ़कर 16.6 अरब डॉलर हो गए। हालांकि, लक्ष्य अभी भी बहुत महत्वाकांक्षी है।
हाल के वर्षों में, देश की निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) और RoSCTL Rebate of State and Central Taxes and Levies (RoSCTL) जैसी निर्यात कर वापसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।