कोरोना के अंत की शुरुआत, प्रधानमंत्री ने किया देश में टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार सुबह 10.30 बजे पुरे देश में कोरोना टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ किया| इसके साथ ही भारत में कोरोना महामारी की अंत की शुरुआत हो गयी|

प्रधानमंत्री द्वारा विधिवत घोषणा के बाद देश भर में 3006 टीकाकरण केन्द्रों पर टीकाकरण का कार्य शुरू हो गया| पहले दिन प्रत्येक केंद्र पर 100 लोगो को टिका लगाया जायेगा|

कोरोना का पहला टिका देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स में दिया गया, जहाँ खुद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन उपस्थित थे|

एम्स में पहला टिका एक सफाई कर्मचारी को दिया गया| उसके बाद तीसरे नंबर पर एम्स के निदेशक तथा देश के बड़े डॉक्टरों में से एक डॉ रणदीप गुलेरिया को दिया गया| उसके बाद नीति आयोग के सदस्य तथा कोरोना टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष डॉ वी के पॉल को दिया गया| एम्स में सभी को भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया टिका कोवैक्सीन का टिका दिया गया|

टीकाकरण के पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों एवं फ्रंट लाइन कोरोना योद्धाओं का टीकाकरण किया जाएगा|

टीकाकरण के लिए चुनाव आयोग के डाटा का उपयोग किया जायेगा, चुनाव आयोग ने इसकी अनुमति दे दी है|

टीकाकरण अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा की टीकाकरण शुरू होने का यह मतलब नहीं है की हम कोरोना के खिलाफ सावधानी वरतना छोड़ दें| हमे दवाई के साथ साथ कड़ाई भी जारी रखना है|

प्रधानमंत्री ने कहा की आमतौर पर एक वैक्सीन बनाने में बरसों लग जाते हैं। लेकिन इतने कम समय में एक नहीं, दो-दो मेड इन इंडिया वैक्सीन तैयार हुई हैं। इतना ही नहीं कई और वैक्सीन पर भी काम तेज गति से चल रहा है। ये भारत के सामर्थ्य, भारत की वैज्ञानिक दक्षता, भारत के टैलेंट का जीता जागता सबूत है। ऐसी ही उपलब्धियों के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था- मानव जब ज़ोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है !!

मोदी ने कहा की भारत का टीकाकरण अभियान बहुत ही मानवीय और महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है। जिसे सबसे ज्यादा जरूरी है, उसे सबसे पहले कोरोना का टीका लगेगा। जिसे कोरोना संक्रमण का रिस्क सबसे ज्यादा है, उसे पहले टीका लगेगा। जो हमारे डॉक्टर्स हैं, नर्सेंस हैं, अस्पताल में सफाई कर्मी हैं, मेडिकल-पैरा मेडिकल स्टाफ हैं, वो कोरोना की वैक्सीन के सबसे पहले हकदार हैं। चाहे वो सरकारी अस्पताल में हों या फिर प्राइवेट में, सभी को ये वैक्सीन प्राथमिकता पर लगेगी। इसके बाद उन लोगों को टीका लगाया जाएगा, जिन पर जरूरी सेवाओं और देश की रक्षा या कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है। जैसे हमारे सुरक्षाबल हो गए, पुलिसकर्मी हो गए, फायरब्रिगेड के लोग हो गए, सफाई कर्मचारी हो गए, इन सभी को ये वैक्सीन प्राथमिकता पर लगेगी। और मैंने जैसा पहले भी कहा है- इनकी संख्या करीब-करीब तीन करोड़ होती है। इन सभी के वैक्सीनेशन का खर्च भारत सरकार द्वारा उठाया जाएगा।

इतिहास में इस प्रकार का और इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया है। ये अभियान कितना बड़ा है, इसका अंदाज़ा आप सिर्फ पहले चरण से ही लगा सकते हैं। दुनिया के 100 से भी ज्यादा ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से कम है। और भारत वैक्सीनेशन के अपने पहले चरण में ही 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है। दूसरे चरण में हमें इसको 30 करोड़ की संख्या तक ले जाना है। जो बुजुर्ग हैं, जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें अगले वाले चरण में टीका लगेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 30 करोड़ की आबादी से ऊपर के दुनिया के सिर्फ तीन ही देश हैं- खुद भारत, चीन और अमेरिका। और कोई भी देश ऐसा नहीं है जिनकी आबादी इनसे ज्यादा हो। इसलिए भारत का टीकाकरण अभियान इतना बड़ा है। और इसलिए ये अभियान भारत के सामर्थ्य को दिखाता है। और मैं देशवासियों को एक और बात कहना चाहता हूं। हमारे वैज्ञानिक, हमारे एक्सपर्ट्स जब दोनों मेड इन इंडिया वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर आश्वस्त हुए तभी उन्होंने इसके इमरजेंसी उपयोग की अनुमति दी है। इसलिए देशवासियों को किसी भी तरह के प्रोपेगैंडा, अफवाएं, दुष्प्रचार से बचकर रहना है।

प्रधानमंत्री ने कहा की भारत उन गिने-चुने देशों में है जिसने मुश्किल के बावजूद दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में ज़रूरी दवाएं और ज़रूरी मेडिकल सहायता पहुंचाई। पैरासिटामॉल हो, हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन हो, टेस्टिंग से जुड़ा सामान हो, भारत ने दूसरे देश के लोगों को भी बचाने की हर संभव कोशिश की। आज जब हमने अपनी वैक्सीन बना ली है, तब भी भारत की तरफ दुनिया आशा और उम्मीद की नज़रों से देख रही है। हमारा टीकाकरण अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, दुनिया के अनेक देशों को हमारे अनुभवों का लाभ मिलेगा। भारत की वैक्सीन, हमारी उत्पादन क्षमता, पूरी मानवता के हित में काम आए, ये हमारी प्रतिबद्धता है।

 


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