वर्तमान स्वरूप में उल्टा पड़ सकता है उत्तर प्रदेश का जनसंख्या नियंत्रण कानून

उत्तर प्रदेश विधि आयोग (Uttar Pradesh State Law Commission) द्वारा उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण कानून (Uttar Pradesh Population Control Bill) का जो स्वरूप जनता के विचार के लिए रखा गया है अगर इसी स्वरूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adithyanath) की सरकार इसे स्वीकृति प्रदान कर देती है तो यह जनसंख्या नियंत्रण कानून उल्टा भी पड़ सकता है। जिस उद्देश्य से इस कानून को लाया जा रहा है यह कानून अपने वर्तमान स्वरूप में उस अपेक्षित परिणाम को नहीं दे पाएगा।

अगर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस कानून को लेकर सावधानी नहीं बरती गई यह जनसंख्या नियंत्रण कानून योगी आदित्यनाथ की सरकार के गले की फांस बन सकता है।

योजनाओं से वंचित करने पर गरीब पर पड़ेगा उल्टा प्रभाव

इस ड्राफ्ट में उल्लंघन करने वालों को सरकारी योजनाओं से वंचित करने की बात कही गई है ताकि लोगों को कानून का उल्लंघन करने से रोका एवं हतोत्साहित किया जा सके। कानून के इस प्रावधान से सबसे ज्यादा पीड़ित गरीब होगा।

लोकतंत्र में कोई सरकार किसी गरीब को इसलिए राशन या अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर असहाय अवस्था में मरने के लिए नहीं छोड़ सकती कि उसको दो से अधिक बच्चे हैं। यह एक लोकतांत्रिक समाज में अकल्पनीय है। ऐसी स्थिति यह विपक्ष का सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार होगा| सरकार को गरीब विरोधी और गरीबों को प्रताड़ित करने वाला बताएगा। सरकार के लिए अपने इस निर्णय का बचाव करना और गरीब जनता को समझा पाना कठिन हो जाएगा।

फेक न्यूज़ फैलने का खतरा

इस कानून के विभिन्न प्रावधानों को लेकर सरकार ने सावधानी नहीं बरती और जनता में पूर्ण जागरूकता एवं सही जानकारी नहीं पहुंचाई तो इसके खिलाफ जनता में तेजी से फेक न्यूज़ फैलाया जा सकता है कि जिनके दो से अधिक बच्चे हैं उनके खिलाफ यह कानून है| समाज के ऐसे आबादी को स्पष्टता से सरकार को यह बताना होगा कि यह कानून वर्तमान पर नहीं भविष्य पर लागू होगा। नहीं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में यह योगी सरकार पर भारी पड़ सकता है।

कानून बाध्यकारी नही होने से पैदा होगा असंतुलन

यह कानून जनता के ऊपर बाध्यकारी नहीं होगा। अर्थात मैं इसका पालन करूं या ना करूं यह मेरे ऊपर होगा। यह अनिवार्य रूप से जनता पर लागू नहीं। इस कानून में आम जनता को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने की बात तो की गई है लेकिन समान रूप से सब पर लागू करने की नहीं।

मुस्लिम समाज में इस कानून का सबसे ज्यादा एवं भारी विरोध होगा। इसे मुस्लिम विरोधी कानून के रूप में प्रचारित किया जाएगा। क्योंकि यह कानून बाध्यकारी नहीं है अतः ऐसी संभावना है कि मुस्लिम समाज में एक बड़ा वर्ग इस कानून को ऐसे भी नहीं मानेगा। प्रोत्साहन नीति का उनके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कई मुस्लिम संगठन आम मुसलमानों को इस कानून के खिलाफ भड़काएंगे| इस कानून के कारण उनकी स्थिति खराब हुई तो वे संगठन उस स्थिति का अपने पक्ष में दोहन भी करेंगे।

इस नीति से हिंदू मुसलमान जनसंख्या में और असमानता की स्थिति पैदा हो सकती है। पूरी संभावना है की इस कानून को अपनाने वाले अधिक परिवार हिन्दू होंगे| इसका परिणाम यह होगा कि पहले से ही कम हिंदू परिवार में प्रजनन दर और कम होगी। मुसलमानों में अच्छी खासी आबादी इस कानून को नहीं अपना आएगी। मुस्लिम समाज में प्रजनन दर हिंदू समाज की अपेक्षा पहले से ही ज्यादा है और आगे यह अंतर और बढ़ सकता है।

लोकतंत्र में कुछ भी स्थाई नहीं होता है। सरकार भी नहीं। जब डेमोग्राफी बदलेगी, जनसंख्या का संतुलन बदलेगा तो सरकार भी बदलेगी और नई सरकार इस कानून को बदल देगी।

कानून होना चाहिए सबपर बाध्यकारी

ऐसे किसी कानून का तब तक फायदा नहीं जब तक वह समान रूप से पूरी आबादी पर बाध्यकारी नहीं हो। अगर बाध्यकारी नहीं बना सकते और चाहते है की अधिक से अधिक आबादी इस कानून का पालन करे तो इसमें कम से कम दो और संसोधन करने चाहिए|

विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव लड़ने पर भी लगे रोक

इस कानून में कहा गया है की अगर कोई व्यक्ति दो बच्चे के कानून का उल्लंघन करता है तो वह स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ने के अयोग्य होगा| यहाँ पर थोडा सा परिवर्तन करते हुए उसे विधानसभा एवं लोकसभा सहित किसी भी सदन का चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करने के साथ साथ किसी भी संवैधानिक पद के अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए| जिस भी व्यक्ति को दो से अधिक बच्चा हो उसे विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, सभी जगह सभी पदों के अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए|

कानून के उल्लंघन पर वोट देने का अधिकार हो ख़त्म

इसके अतिरिक्त इसमें एक और प्रावधान करने की जरुरत है की अगर कोई व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करता है तो वह अपने वोट देने के अधिकार को खो देगा|

ये दोनों प्रावधान तबतक संभव नहीं है जबतक संसद की सहमती न हो| इसके लिए केंद्र सरकार को पहल करनी होगी|

जब तक इन कमियों को दूर नहीं किया जाता तब तक जल्दबाजी में लागू करने से इस कानून के परिणाम राजनीतिक रूप से भी और सामाजिक रूप से भी उल्टा पड़ सकते हैं।

 


More Related Posts

Scroll to Top