कुचबिहार हिंसा के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर क्यों न हो उकसाने का मुकदमा दर्ज

शनिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) के चौथे चरण का मतदान हुआ। यह दौर अब तक का सबसे हिंसक एवं खून खराबे वाला साबित हुआ जिसमें 5 लोगों की जान चली गई।

हिंसा का सबसे ज्यादा वीभत्स रूप उत्तर बंगाल (North Bengal) के कुचबिहार (Cooch Bihar) में देखने को मिला। कूचबिहार जिले के सीतलकुची (Seetalkuchi) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर भाजपा समर्थक 18 वर्षीय आनंद बर्मन की वोट की लाइन से खींच कर के हत्या कर दी गई। तो वही एक दूसरे बूथ पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ (CISF) द्वारा आत्मरक्षा की गई फायरिंग में 4 लोगों की मौत हो गई।

कुचबिहार के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि करीब 250 से 300 लोगों की भीड़ ने सीआईएसएफ की टीम को घेर कर के पत्थर, लाठी-डंडे एवं देशी हथियारों से हमला कर दिया। मतदान कर्मियों पर भी हमला एवं ईवीएम को भी क्षति पहुंचाने की कोशिश की गयी तथा सुरक्षाकर्मियों से राइफल छीनने तक की कोशिश की गयी| इसके बाद अपनी तथा मतदान कर्मियों की रक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों ने पहले हवाई फायरिंग की लेकिन भीड़ नहीं हटने पर बाद में उन्हें सीधी फायरिंग करनी पड़ी| जिसमे चार लोग मोनिरुज्मान, हमीदुल मियां, नूर आलम मियां एवं समीउल हक की मौत हो गई जबकि 3 लोग घायल हो गए। चारों तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बताए जाते हैं।

घटना के बाद से ही इस पर जमकर के राजनीतिक बयानबाजी का दौर चालू है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऊपर हमले कर रही हैं तो भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रही है।

अब प्रश्न यह है कि आखिर इस हिंसा के लिए दोषी कौन है? भीड़ में इतनी हिम्मत कहां से आई कि वह सीआईएसएफ की टीम को घेर ले और उसका राइफल छीनने की कोशिश करें?

ज्ञात हो की कुछ दिन पहले ही इसी सीतलकुची विधानसभा क्षेत्र में ही एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय सुरक्षाबलों पर जमकर के हमले किए थे और उन्होंने टीएमसी के कार्यकर्ताओं को इस बात के लिए उकसाया था कि वह सुरक्षाबलों का घेराव करे।

और दुर्भाग्य से चुनाव के दिन ठीक वही हुआ| कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने सीआईएसएफ के जवानों का घेराव किया तथा सीआईएसएफ के जवानों से हथियार छीनने की भी कोशिश की| अब प्रश्न यह है आखिर इस पूरी घटना के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं होना चाहिए? चार लोगो की जान चली गयी लेकिन चारो तरफ सन्नाटा क्यों है? कोई ममता बनर्जी से प्रश्न क्यों नहीं पूछता समझ से परे है| ममता बनर्जी से पूछा जाना चाहिए कि आखिर उन्होंने टीएमसी के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को क्यों भड़काया कि वह सुरक्षा बलों का घेराव करें| जब उन्होंने वैसा ही किया तथा केंद्रीय सुरक्षाबलों का घेराव किया और जवाबी कार्रवाई में 4 मारे गए तो उसकी जवाबदेही किस पर है? उनको उकसाने के लिए ममता बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं होना चाहिए?

केवल कल्पना करके देखिए की जो बयान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिया था, वैसा ही बयान यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह ने दिया होता और शीतलकुची जैसी घटना हो गई होती तो आज कितना हंगामा मचा हुआ होता है।

लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान के बाद ऐसी घटना हुई लेकिन चारों तरफ सन्नाटा है।

हमें इस तरह की घटनाओं को रोकना है तो इन नेताओं को भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई करनी होगी| उनसे प्रश्न पूछना होगा कि आपने अपने कार्यकर्ताओं को उकसाया जिसके कारण चार जाने चली गई तो उसको लेकर के आपके खिलाफ कार्यवाही क्यों ना की जाए? चुनाव आयोग को भी चाहिए कि वह शख्स कदम उठाते ऐसे बयान देने वालो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें|

 


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