जाते जाते ट्रम्प प्रशासन ने चीन की दुखती रग पर एक बार फिर से हाथ रख दिया है| ट्रम्प प्रशासन के निमंत्रण पर तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुखिया लोबसांग सांग्ये पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति भवन वाइट हाउस पहुंचे और अमेरिकी अधिकारियो से मुलाकात किया| छह दशक में यह पहला मौका है जब भारत में रह रहे तिब्बत की निर्वासित सरकार का कोई प्रतिनिधि वाइट हाउस पहुंचा हो|
अमेरिका के इस कदम से चीन का बौखलाना निश्चित है| तिब्बत का नाम आते ही चीन बौखला जाता है| तिब्बत पर जबरन कब्ज़ा किये हुए चीन को लगभग 70 साल हो गए| चीन ने तिब्बत की पूरी डेमोग्राफी बदल दी, तिब्बती संस्कृति की पहचान को ख़त्म कर दिया| लेकिन अभी भी उसे यह डर सताता रहता है की तिब्बत कही उसके हाथ से न निकल जाए| चीन के इस डर का सबसे बड़ा कारण है भारत और भारत में रह रहे तिब्बती शरणार्थी|
हिमांचल प्रदेश की धर्मशाला स्थित केन्द्रीय तिब्बत प्रशासन ने एक वक्तव्य में कहा की अमेरिकी प्रशासन के तिब्बत मामलो के विशेष समन्वयक राबर्ट डेस्ट्रो के आमंत्रण पर केन्द्रीय तिब्बत प्रशासन के राष्ट्रपति लोबसांग सांग्ये ने वाइट हाउस का दौरा किया और राबर्ट डेस्ट्रो से मुलाकात किया|
लोबसांग सांग्ये ने ट्विट कर कहा की औपचारिक रूप से व्हाइट हाउस में प्रवेश करने वाला केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का पहला राजनीतिक प्रमुख होना एक बड़ा सम्मान की बात है|
It is a great honor to be the first political head of the Central Tibetan Administration to formally enter the White House https://t.co/nbdVONjlmg
— Lobsang Sangay (@Drlobsangsangay) November 20, 2020
जबसे ट्रम्प प्रशासन ने राबर्ट डेस्ट्रो को तिब्बत मामलो के विशेष समन्वयक के रूप में नियुक्त किया है तबसे चीन आग बबूला है तथा इसे चीन की आन्तरिक मामलो में हस्तक्षेप बता रहा है|
जब डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने तबसे ही वह लगातार चीन की विस्तारवादी नीति का पुरजोर विरोध कर रहे है| अगर ये कहें की चीन और उसके सुपर पॉवर बनने के बीच ट्रम्प खड़ा थे तो यह गलत नहीं होगा| रोनाल्ड रीगन से लेकर बराक ओबामा तक अमेरिका के सभी राष्ट्रपतियों ने चीन को बढावा देने का काम किया है| जिसका परिणाम ये है की आज चीन अमेरिका के हितो के लिए ही खतरा बन गया है| चीन की विस्तार को पहलीबार राष्ट्रपति ट्रम्प ने चुनौती दी और घोषणा की की अमेरिका के हितो को नुकशान पहुचाकर एवं अमेरिका की अर्थव्यवस्था की कीमत पर चीन के हितो एवं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा नहीं देंगे| इसीलिए राष्ट्रपति ट्रम्प की हार से सबसे ज्यादा खुश चीन ही है|