दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.5 फीसद का संकुचन, पहली तिमाही में था 23.9 फीसद संकुचन

शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी वित्तवर्ष 2020-21 के दूसरी तिमाही (जुलाई – सितम्बर) के आकडे के अनुसार भारत के सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में 7.5 फिसद का संकुचन (नकारात्मक विकास) दर्ज किया गया| हालाँकि दूसरी तिमाही के जीडीपी का आंकड़ा अर्थशास्त्रियो द्वारा लगाये जा रहे अनुमान से काफी अच्छा है| पहली तिमाही में भारत की जीडीपी का संकुचन 23.9 फीसद रहा था|

जीडीपी वित्तवर्ष 2019-20 के दुसरे तिमाही के ₹ 35.84 लाख करोड़ की तुलना में वित्तवर्ष 2020-21 के दुसरे तिमाही में ₹ 33.14 लाख करोड़ रहा|

इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था अधिकारिक रूप से मंदी के दौर में प्रवेश कर गयी है| तकनीकी रूप से अगर किसी देश की अर्थव्यवस्था में लगातार दो तिमाही में संकुचन दर्ज होता है तो उस देश की अर्थव्यवस्था को मंदी में माना जाता है|

बता दें कि दूसरी तिमाही में जीडीपी की गिरावट की रफ्तार 10 फीसद के करीब रहने की उम्मीद जताई जा रही थी। इस तरह देखें, तो आंकडे़ उम्मीद से काफी बेहतर हैं। गिरावट की यह रफ्तार मौजूदा तिमाही में और धीमी पड़ेगी और चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च, 2021 में वृद्धि दर के सकारात्मक होने की संभावना है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़े के अनुसार उद्योग क्षेत्र, सेवा क्षेत्र की तुलना में तेजी से सामान्य हुआ है।    

रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई-सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग में 0.6% की बढ़ोतरी हुई, जो इससे पहले की तिमाही में बड़े पैमाने पर 39% कम हुई थी। कृषि क्षेत्र में 3.4% की वृद्धि हुई है जबकि व्यापार और सेवाओं में 15.6%  की संकुचन हुई है।

 


More Related Posts

Scroll to Top