पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान की मृत्यु से खाली हुई राज्यसभा की सीट पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर दिया है| इसी के साथ बिहार की राजनीति भी गरमाने लगी है विशेषकर सत्तारूढ़ एनडीए की अंदर की राजनीति एक बार फिर से गरमाने लगी है|
लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान के लिए यह सीट मांग रही है| वही जनता दल यूनाइटेड लोजपा का नाम सुनकर ही भड़क जा रही है|
लोजपा का कहना है कि चुकी यह सीट 2019 के लोकसभा चुनाव के समय हुए सीट बंटवारे के तहत पार्टी को दी गई थी| इसलिए उपचुनाव में भी यह सीट रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान को ही दी जानी चाहिए| यही रामविलास पासवान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी|
लोजपा प्रमुख चिराग पासवान को लेकर जदयू का गुस्सा सातवें आसमान पर है| लोजपा को राज्यसभा की सीट देने की बात तो दूर वह लोजपा को केंद्र में भी NDA से बाहर करने की मांग कर रही है|
बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान एवं उनकी पार्टी लोजपा ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उनकी पार्टी जदयू को नुकसान पहुंचाया है, उसके बाद यह सोचना कि जदयू चिराग पासवान की मां को राज्यसभा भेजने के किसी भी कोशिश का समर्थन करेगी, मूर्खता ही होगी|
जदयू का कहना है कि राज्यसभा भेजना तो दूर लोजपा को तो प्रस्तावक भी नहीं मिलेंगे|
चुकी एक सीट का उपचुनाव होना है इसलिए जीतेगा वही जिसके पास बहुमत यानी 122 विधायकों का समर्थन होगा| चुकी विधानसभा में एनडीए को बहुत छोटी बहूमत ही हासिल है इसलिए एनडीए को कोई ऐसा चेहरा मैदान में उतारना होगा जो सब को स्वीकार हो|
ऐसे में सुशील कुमार मोदी का नाम सामने आ सकता है| क्योंकि उनके नाम पर किसी को विरोध भी नहीं होगा और सभी दल उनके नाम पर खुशी-खुशी सहमति दे देंगे|
इससे ना सिर्फ NDA में होने वाले किसी भी तरह के संभावित खटपट को रोका जा सकेगा बल्कि भाजपा भी भावी योजनाओं के तहत उन्हें बिहार की राजनीति से दूर करना चाहेगी ताकि बिहार में पार्टी द्वारा किए गए नेतृत्व परिवर्तन को अंजाम तक पहुंचाया जा सके|
पिछले 15 सालों से बिहार भाजपा का नेतृत्व सुशील कुमार मोदी के हाथों में था और उनके बिहार की राजनीति में सक्रिय रहते हुए नए नेतृत्व को अपने अनुसार काम करने की पूर्ण आजादी नहीं मिल पाएगी| मोदी के बिहार की राजनीति से अलग हो जाने के बाद नवनियुक्त दोनों मुख्यमंत्रियों तारकेश्वर प्रसाद एवं रेनू देवी को अपना प्रभाव एवं नेतृत्व स्थापित करने में आसानी होगी| दोनों सुशील कुमार मोदी की छाया से खुद को एवं पार्टी को बाहर ला पाएंगे|
अंतिम समय में अगर कुछ उथल-पुथल नहीं हुआ तो सुशील कुमार मोदी ही बिहार राज्यसभा उपचुनाव में NDA के प्रत्याशी होंगे|