गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में गिरफ्तारी, आखिर निशाना कौन है चाचा या भतीजा?

2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब महज डेढ़ साल रह गए हैं| प्रदेश में राजनीतिक समीकरणों के बनने बिगड़ने एवं अपने विरोधियों को धराशाई करने का खेल शुरू हो गया है| पार्टियां अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में व्यस्त हैं|

उत्तर प्रदेश में चल रहे इस राजनीतिक शतरंज की एक झलक तो अभी-अभी संपन्न हुए राज्यसभा के चुनाव में देखने को मिल गया था| संख्या बल कम होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की अप्रत्यक्ष मदद से पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती अपना एक उम्मीदवार राज्यसभा में भेजने में सफल रही थी| हालाँकि भाजपा द्वारा छोड़ी गई एक सीट बसपा के खाते में जाता देख समाजवादी पार्टी के प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खेल करने की कोशिश जरुर की थी| बसपा के कुछ विधायकों को तोड़कर अपने साथ मिला भी लिया| लेकिन उनके उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के कारण उनकी यह कोशिश नाकामयाब रही| हां मायावती इस से आगबबूला जरूर हो गई और अखिलेश यादव को सबक सिखाने की घोषणा भी कर दी| जिसका असर विधानसभा उपचुनाव में भी देखने को मिला|

इस राजनितिक सतरंज का ताजा मामला लखनऊ में बने गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में सीबीआई द्वारा की गई गिरफ्तारी है| इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है|

यह सर्वविदित है कि लखनऊ का गोमती रिवरफ्रंट अखिलेश यादव सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था| लेकिन जब से योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तब से ही वह इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर घोटाला का आरोप लगाते रहे हैं| उनकी सरकार की अनुशंसा पर अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है|

सीबीआई ने पिछले सप्ताह सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव एवं वरिष्ठ सहायक राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया| सीबीआई जानना चाहती है कि आखिर करोड़ों रुपए के ठेके बिना निविदा के कैसे जारी कर दिए गए|

इसी रूप सिंह यादव की गिरफ्तारी राजनीति कयासों को जन्म दे रही है| इसकी वजह है रूप सिंह यादव एवं अखिलेश यादव के चाचा पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के संबंध|

गोमती रिवर फ्रंट अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था| जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब शिवपाल सिंह यादव ही सिंचाई मंत्री थे और रूप सिंह यादव उनके करीबी अफसरों में शामिल थे|

2017 से ही अखिलेश यादव एवं शिवपाल सिंह यादव के बीच संबंधों में भारी खटास की वजह से घमासान चल रहा है|

चाचा – भतीजा के बीच चल रहे इस युद्ध में योगी सरकार हमेशा ही चाचा शिवपाल पर दरियादिली दिखाती रही है| जिसका खामियाजा अखिलेश यादव को 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उठाना पड़ा|

लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों के बीच जमी बर्फ पिघली है तथा उनके संबंधों में कुछ कड़वाहट कम हुई है| परिवार के एक बार फिर साथ आने की खबरें भी आती रही|

इसलिए रूप सिंह यादव की गिरफ्तारी को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं आखिर निशाना कौन है चाचा या भतीजा?

 


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