विदेश मंत्री एस जयशंकर ने SCO बैठक में कहा कि विभिन्न देशों के बीच संपर्क सुविधाओं संबंधी उपायों को विचार-विमर्श के जरिए पारदर्शी और समावेशी बनाया जाना चाहिए। ऐसा करते समय विभिन्न देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए मूलभूत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने गुरुवार को शंघाई सहयोग संगठन के सरकार प्रमुखों की परिषद की 20वीं बैठक में भाग लिया। अपने संबोधन में जयशंकर ने चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना उनके प्रयासों की आलोचना की।
इन मुद्दों पर किया विचार विमर्श
कजाकिस्तान की अध्यक्षता में नूर सुल्तान में आयोजित बैठक में एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, व्यापार और संस्कृति आदि मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में एससीओ के आतंकवाद विरोधी क्षेत्रीय अवसंरचना (रैट्स) के कार्यकारी निदेशक ने भी भाग लिया। एससीओ में भारत, चीन, पाकिस्तान और रूस के अतिरिक्त कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान मिलाकर कुल आठ सदस्य देश हैं।
चाबहार बंदरगाह परियोजना मध्य एशियाई देशों के लिए महत्वपूर्ण
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान में भारत की चाबहार बंदरगाह परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह मध्य एशियाई देशों के लिए समुद्र तक व्यापारिक पहुंच हासिल करने का कारगर माध्यम बनेगा। भारत चाहता है कि चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है एससीओ क्षेत्र में भौगोलिक और डिजिटिल संपर्क सुविधाओं का विस्तार हो।
भारत एससीओ को मानता है एक महत्वपूर्ण गुट
चीन का उल्लेख किए बिना विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत एससीओ को मान्य अंतरराष्ट्रीय नियमों, प्रशासन, विधि का शासन, मुक्त व पारदर्शी व्यवस्था और समानता पर आधारित सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण गुट मानता है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि एससीओ में द्विपक्षीय मुद्दों को जानबूझ कर उठाने की कोशिश की जाती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा करना एससीओ चार्टर और इसके सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय मुद्दों को उठाए जाने से संगठन में मत्येक्य और सहयोग विपरीत रूप से प्रभावित होता है। ऐसे प्रयासों की निंदा की जानी चाहिए।
सदस्य देशों के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का किया उल्लेख
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ सदस्य देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन सुरक्षा, व्यापार और संस्कृति आदि क्षेत्रों में सदस्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तत्पर है। उन्होंने कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौती का उल्लेख करते हुए इसका सामना करने के लिए भारत की पहल और उपायों का जिक्र किया। विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें वर्तमान वास्तविकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
एससीओ की आज की बैठक में चीन ने सरकार प्रमुखों की परिषद की वर्ष 2022 अध्यक्षता के लिए ग्रहण की।