एसईसी ने सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड को पास किया, देश में कोरोना टीकाकरण अभियान की तैयारी

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोरोना पर विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। अंतिम मंजूरी के लिए इसे देश के दवा महानियंत्रक (डीसीजीआइ) वीजी सोमानी के पास भेजा जाएगा, जो कभी भी इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दे सकते हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन को भारत में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआइआइ) कोविशील्ड के नाम से तैयार कर रही है।

उधर कोविड 19 टीकाकरण अभियान की तैयारी पुरे जोर शोर चल रही है, देशभर में दो जनवरी को ट्रायल रन होगा|

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने देशभर में दो जनवरी, 2021 (शनिवार) को कोविड-19 टीकाकरण ट्रायल रन के लिए सभा स्थलों पर की गई तैयारियों की समीक्षा को लेकर एक उच्च-स्तरीय बैठक की। 

शनिवार के देशव्यापी ड्राई रन को किसी भी तरह की गड़बड़ी से मुक्त बनाने के लिए उठाए गए क़दमों की चर्चा की गयी। टेलिफोन संचालकों की संख्या में वृद्धि की गई है, जो जमीन पर ड्राई रन का संचालन करने वाली टीमों के सवालों के हरसभंव जवाब देते हैं, सभा स्थलों के भौतिक निरीक्षण के लिए प्रखंड स्तर पर कार्य बल का गठन किया गया है और सभी कर्मियों को अन्य मुद्दों के बीच आम तौर पर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के प्रसार के उद्देश्य को लेकर भी अवगत कराया गया है।

डॉ. हर्षवर्धन ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की अपील की कि टीकाकरण स्थल और प्रभारी अधिकारी विस्तृत चेकलिस्ट का पालन करें। इसके अलावा टीकाकरण के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी पालन किया जाए। ड्राई रन के संचालन में मार्गनिर्देशन के लिए एसओपी को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ भी साझा किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ड्राई रन को एक उदाहरण के रूप में स्थापित करने के लिए प्रशासन और चिकित्सा अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है, जिससे बाद में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान को सक्षम किया जा सकेगा।

उन्होंने इस आयोजन को चुनावों में शामिल जन भागीदारी के बराबर महत्व दिया। डॉ. हर्षवर्धन ने आगे कहा, ‘आइए हम इसके सूक्ष्म विवरण पर ध्यान देने के साथ एक वास्तविक अभ्यास के रूप में इसे लागू करने का प्रयास करें। आपसी समझ बनाने के लिए सही समन्वय एक लंबा रास्ता तय करने वाला होगा, जिससे आगामी टीकाकरण अभियान बिना किसी गड़बड़ी के आगे बढ़ सके।’

 


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