31 साल बाद अब फिर से गोरखपुर फर्टिलाइजर कारखाना शुरू

31 साल बाद अब फिर से गोरखपुर फर्टिलाइजर कारखाना शुरू हो गया है। जो प्रतिदिन 3,850 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन करेगा। इतनी क्षमता वाला ये अद्भुत कराखाना किसानों की यूरिया की जरूरत को पूरा करेगा। साथ ही साथ यूरिया की उपलब्धता के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और रोजगार के नए अवसर के साथ समृद्धि के द्वार खोलेगा। बता दें कार्यक्रम के दौरान इस कारखाने विशेषता को समझाने के लिए एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसमें विस्तार से इसके बारे में बताया गया।

साल 2016 में उर्वरक संयंत्र और एम्स की आधारशिला रखी थी

ज्ञात हो पीएम मोदी ने वर्ष 2016 में उर्वरक संयंत्र और एम्स की आधारशिला रखी थी। पांच वर्षों में दोनों परियोजनाएं तैयार हो गई। इन परियोजनाओं से अब इस क्षेत्र में भी बदलाव आएगा।

बता दें हमारे अन्नदाता जिनका कठोर परिश्रम और तप देश का गौरव है इसे ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कृषि विकास और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके लिए बीते साढ़े सात वर्षों में बीज, बीमा, बाजार और बचत पर चौतरफा काम किया गया है। इसके साथ ही अच्छी क्वालिटी के बीज और नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड और माइक्रो इरिगेशन और खाद सब्सिडी में वृद्धि जैसे सभी कदम किसानों की समृद्धि को समर्पित है।

देश में छोटे-छोटे किसानों की संख्या 10 करोड़ से भी ज्यादा

देश में छोटे-छोटे किसानों की संख्या 10 करोड़ से भी ज्यादा है। पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खाद उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता अहम है। पीएम मोदी ने बंद पड़े खाद कारखानों के जीर्णोद्धार और क्षमता में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया। इसी क्रम में साल 2016 में देश के पूर्वी राज्यों में वर्षों से बंद पड़े तीन खाद कारखानों को फिर से शुरू करने के लक्ष्य के साथ उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड की स्थापना करने का बड़ा निर्णय लिया गया।

गोरखपुर का खाद कारखाना पिछले 30 वर्षों से ठप्प पड़ा था और बंद पड़े कारखाने के कारण लोग लंबे समय से परेशान थे। बहुत से लोगों की नौकरियां छिन गई तो कारखाने के कारण चलने वाले अन्य कारखाने भी सिमटते चले गए जिसके कारण, जिसके कारण एक बड़ी आबादी के रोजी रोजगार पर संकट आ गया। खाद की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित थी जिसका जमकर फायदा बिचौलिये उठाते थे। यूरिया की जमाखोरी और कालाबाजारी होती थी। अधिक दाम पर खाद खरीदने के दबाव के कारण मेहनती किसानों पर आर्थिक मार पड़ती थी तो बिना खाद के फसल नुकसान का डर सताता रहता था। गोरखपुर खाद कारखाने को फिर से चालू कराने के की लोगों की मांग पर पहले की सरकारों के वायदे सिर्फ खोखले ही साबित हुए थे। इसके पश्चात पीएम मोदी ने साल 2016 में गोरखपुर खाद कारखाने के पुनरुद्धार की आधार शिला रखी।

8,603 करोड़ की लागत से बने इस कारखाने से प्रतिदिन 30850 मीट्रिक टन यूरिया और 2200 मीट्रिक टन लिक्विड अमोनिया का उत्पादन करेगा। ऊर्जा कुशल, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल गोरखपुर खाद कारखाने से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य जैसे बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हरियाणा के किसानों को भी सहजता से नीम कोटेड यूरिया हासिल होगा। नीम कोटेड यूरिया से कालाबाजारी पर रोक लगेगी और बीज से बाजार के संकल्प को बल मिलेगा। साथ ही साथ यह छोटे किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका भी निभाएगा। कारखाने के संचालन से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्र विकास की नई बुलंदियों को छू सकेंगे। इसके साथ ही करीब 20 हजार लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। वहीं प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्र के पारम्परिक उद्योग-धंधों को भी बढ़ावा मिलेगा। आजादी के इस अमृत महोत्सव की ऋृंखला में राष्ट्र और विशेष रूप से हमारे अन्नदाता को समर्पित यह खाद कारखाना पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती देगा। कारखाने में हर साल 12.7 लाख मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन होगा।

पूर्वांचल में पिछले पांच वर्षों में पूरी की गई मेगा परियोजनाएं:

– पूर्वांचल एक्सप्रेस

– एम्स-गोरखपुर

– फर्टिलाइजर प्लांट

– कुशीनगर एयरपोर्ट

– सरयू कनाल पोर्ट

– 8 मेडिकल कॉलेज

– चार वर्ल्ड क्लास अस्पताल

 


More Related Posts

Scroll to Top