क्योंकि लड़की मुस्लिम है इसलिए इंटरफेथ शादियों की वकालत करने वालों ने चुप्पी साध ली

सराय काले खां (Sarai Kale Khan) की घटना ने देश एवं समाज में इंटरफेथ शादियों (Interfaith Marriage) की वकालत करने वालों के साथ – साथ दलित एवं महिला अधिकारों की लड़ाई के झंडाबरदार बने फिरते लोगों के दोहरे चरित्र को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है|

पिछले सप्ताह दिल्ली के सराय काले खां के हरिजन बस्ती में हिंसा का जबरदस्त तांडव देखने को मिला| जो आप सीसीटीवी फुटेज में देख सकते हैं|

दरअसल एक 22 साल के दलित युवक ने एक 19 साल की एक मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह कर लिया है| बाद में लड़की ने पुलिस को भी यह बयान दे दिया कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है|

लड़की के घरवालों को यह पसंद नहीं आया| लड़का एवं लड़की अपनी जान बचाने के लिए भाग कर दूसरी जगह चले गए| लेकिन लड़की के परिवार एवं मुहल्ले वालों ने इसका गुस्सा लड़के के घर एवं परिवार के साथ साथ पूरी हरिजन बस्ती पर निकाल दी|

एक वीडियो जारी कर अपनी जान पर खतरा बताते हुए नवविवाहित जोड़े ने अपने लिए सुरक्षा मांग की है|

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए उनको सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है| दिल्ली पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है|

देश की राजधानी में इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी न तो इंटरफेथ शादियों की बात करने वाले सामने आए, न दलित अधिकारों की बात करने वाले और नहीं महिला अधिकारों की बात करने वालों की जुबान से एक शब्द निकला| यहाँ तक कि मीडिया ने भी इस को काफी हद तक अनदेखा कर दिया|

आखिर क्यों तनिशक के विज्ञापन विवाद के समय इंटरफेथ शादियों के समर्थन में गला फाड़ रहे लोग इस बार चुप है? क्या इसलिए की इस मामले में लड़की मुस्लिम है?

यकीन मानिए यदि सराय काले खां मामले में भी लड़का मुसलमान एवं लड़की हिंदू होती तो यह मामला देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में फैल गया होता| लेकिन यह मामला उल्टा है| लड़का हिंदू है एवं लड़की मुसलमान और यह इन लोगों के नैरेटिव में फिट नहीं बैठता है|

इसे ठेकेदारों के लिए इंटरफेथ शादियों की वकालत, दलित एवं महिला अधिकारों की बात तभी तक जब तक वह इनके नैरेटिव में फिट बैठता है|

 


More Related Posts

Scroll to Top