यह बात जगजाहिर है कि, कोई भी व्यक्ति, किसी व्यक्ति विशेष से प्रभावित होता है या पीढ़ित होता है तो, वह दोषारोपण उस व्यक्ति के जाति अथवा सम्प्रदाय पर करता है। अथवा ऐसा कोई कारनामा करता है जिससे लोगों का ध्यान उसके तरफ आकर्षित हो जाय। कुल मिला कर, यही वाक्या हुआ है, मधुबनी प्रकरण में। यह कोई नई बात नहीं है। इस तरह की घटनाएं अक्सर अपने पीछे एक बड़ा सवाल छोड़ जाती हैं।
मधुबनी हत्याकांड में पीढ़ित परिवार का क्रंदन और उन मासूम बच्चों के तन पर उतरन वस्त्र देख कर पत्थर भी पिघलने को विवश हो सकता है। हम सब तो फिर भी इंसान हैं। उस पीढ़ित परिवार के प्रति हमारी पूरी सहानुभूति है, उनके प्रति हम संवेदना प्रकट करते हैं और सरकार से यह मांग करते हैं कि उस परिवार के साथ न्याय हो, अपराधियों की यथाशीघ्र गिरफ्तारी हो और स्पीडी ट्रायल कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि, पुन: कोई अपराधी ऐसे घटना को अंजाम देने से पूर्व हजार बार सोचने पर मजबुर हो जाय।
निश्चित तौर पर प्रवीण झा एंड कम्पनी ने यह घिनौना एवं अक्षम्य अपराध किया है, ऐसे घृणित कार्य का निसंदेह विरोध होना चाहिए, उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की कोशिश की जानी चाहिए, ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति भी नहीं होनी चाहिए| ऐसे लोगों के साथ सहानुभूति रखने का सीधा मतलब अपराध और अपराधियों का मनोबल बढ़ाना ही है। वह हर शख्स जो अपराध को बढ़ावा देता है अथवा अपराध करता है, उसका सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
परंतु, इसके लिए हमें हमारी मानसिकता बदलने की जरूरत है। हमें अपराधी के जाति, धर्म, सम्प्रदाय का नहीं बल्कि,अपराध का विरोध करना होगा, क्योंकि अपराधियों की न कोई जाति होती है और न ही कोई धर्म... "अपराधी" उसकी जाति है और "अपराध करना", उसका धर्म। उसके बन्दूक से निकलने वाली गोली यह नहीं देखती कि वह किसके सीने को चीर रही है, वह यह भी फर्क नहीं समझती कि कौन अपराधी के जाति का है और कौन दूसरे जाति का। वावजूद हम हमारी संकुचित मानसिकता के चलते उसे जाति से जोड़ कर, उसका मनोबल बढ़ाते हैं, अथवा उसके जाति के सारे लोगों के खिलाफ जहर उगलते हैं, उसके खिलाफ एक ऐसा माहौल तैयार करते हैं जिससे उस पुरे जाति को ही कटघरे में खड़ा किया जा सके।
मधुबनी प्रकरण में कुछ बयानवीरों के बयान एवं सोशल मीडिया पर जिस प्रकार के पोस्ट देखने को मिल रहे हैं वह अपराध को बढ़ावा देने और अपराधियों के मनोबल को उच्चाई देने के लिए काफी है।
कुछ देर के लिए यह मान भी लिया जाय कि यह लड़ाई ब्राह्मण वर्सेज राजपूतों की है तो फिर भोला सिंह, अशोक सिंह, सफी इत्यादि लोग भी ब्राह्मण ही हैं? यदि यह लड़ाई दो जातियों की है तो अन्य जाति के लोग क्यों इसमें शामिल हुए हैं?
हमारे देश, हमारे समाज के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि जातीय गोलबन्दी से लगभग उबर चुके समाज को पुन: उस आग में झोंकने की ओर हम अग्रसर हो रहे हैं।
अब यहां सवाल यह उठता है कि, कोई भी अपराधी अचानक दुर्दांत कैसे हो जाता है? जरामय की दुनिया में कदम रखते ही वह कुख्यात तो नहीं हो जाता? क्या, ऐसे लोगों के सर पर बड़े-बड़े मठाधीशों का वरदहस्त प्राप्त नहीं होता है? क्यों, बनने दिया जाता है इन्हें देश व समाज का दुश्मन? क्यों, सारी हदें पार करने की छूट दी जाती है इन्हें? क्यों, इनके काले करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती है?
निश्चित ही, अपराधी चाहे जिस जाति अथवा धर्म का हो, उसका प्रतिकार किया जाना चाहिए। लेकिन, इससे भी जरूरी यह है कि, जो भी व्यक्ति, चाहे वह जितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, ऐसे असामाजिक तत्वों को प्रोत्साहित करता है, उसे संरक्षण देता है, तो उसकी भी कलई खुलनी चाहिए और साथ ही साथ उसे ऐसा दंड दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी आने वाली पीढ़ियों या अन्य किसी को भी ऐसा करने के लिए हजार बार सोचने की जरूरत पड़े। ऐसा कदम सिर्फ किसी क्षेत्र विशेष तक ही सीमित न हो बल्कि इसे देश स्तर पर उठाया जाना चाहिए।
मेरे इस लेख से कुछ लोग असहमत हो सकते हैं, कुछ लोग इसे जाति अथवा धर्म से भी जोड़ने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन, वैसे लोगों को यह भलीभांति समझना होगा कि, अपराधियों की न ही कोई जाति होती है और न ही कोई धर्म होता है, बल्कि ऐसे तत्व सदा ही समाज के लिए काले धब्बे ही होते हैं, समाज के दुश्मन ही होते हैं।
हमें इस बात पर भी पूरा ध्यान देना होगा कि,अपराधी के पूरी जाति और सम्प्रदाय को उस अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने के बजाय अपराध पर जोरदार प्रहार किया जाय। हमें सामाजिक असंतुलन और आपसी वैमनस्यता को बढ़ावा देने के बजाय, सामाजिक संतुलन और आपसी भाईचारे को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य करना होगा। हमें अपराधी के जाति से नहीं बल्कि, अपराध के खिलाफ एकजुटता दिखाना होगा। तब कहीं जाकर ही हम एक सभ्य, निर्मल और स्वच्छ समाज स्थापित करने में अपना योगदान दे सकते हैं।
(- निकेश चन्द्र तिवारी जनता दल यूनाइटेड के सदस्य है| सदस्य, राज्य परिषद, सदस्य, प्रदेश कार्यकारिणी एवं सारण प्रमंडल प्रभारी, मीडिया सेल, जदयू, बिहार)